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ऑटो एक्सपो 2018: कैसा होगा आगे का रोडमैप

प्रकाशित Sat, 10, 2018 पर 14:49  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

ऑटो एक्सपो 2018 में सीएनबीसी-आवाज चर्चा करने जा रहा है ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के फ्यूचर्स पर। द फ्यूचर ऑप ऑटोमोबिल इंडस्ट्री इन इंडिया ऑपोच्यूनिटी एंड चैलेंजर्स। मौजूदा समय में जिस तरह से ऑटो कंपनियों कामकाज करती है वह सब बदलने जा रहा है। इंडस्ट्री का फोकस है अब इको-फ्रेंडली व्हीक्लस बनाने पर। अब ऑटो इंडस्ट्रीज यहां से आगे क्या रोडमैप तैयार करेगी और इन कंपनियों के सामाने क्या चुनौतियां है इस पर बात करने के लिए सीएनबीसी- आवाज के साथ मौजूद है मारुति सुजुकी के सीनियर ईडी आर एस कलसी, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के डिप्टी एमडी एन राजा और ह्युंदई सेल्स एंड मार्केटिंग के सीनियर वीपी राकेश श्रीवास्तव।


ऑटो इंडस्ट्रीज के जानकारों का कहना है कि मौजूदा समय में इंडस्ट्री जि तरह से कामकाज कर रही है वहां से उसे काफी कुच बदलाव करना है जिसके लिए ऑटो इंडस्ट्रीज को सरकार के सपोर्ट की जरुरत है।  इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए चार्जिंग स्टेशन की जरुरत है जिसके लिए सरकार को ऑटो इंडस्ट्रीज की मदद करनी होगी।


इलेक्ट्रिक व्हीकल में ओईएम का अहम रोल है। टेक्नोलॉजी की निवेश लागत होगी क्योंकि टेक्नोलॉजी इंपोर्ट करने पर खर्च ज्यादा लगता है। इलेक्ट्रिक व्हीकल की कीमत में 40 फीसदी हिस्सा बैटरी की कीमत की होगी। इलेक्ट्रिक व्हीकल की कीमत काफी ज्यादा है।


जानकारों का मानना है कि ऑटो इंडस्ट्रीज को टेक्नोलॉजी का अहम हिस्सा मानना होगा। इंडस्ट्रीज की ग्रोथ का मतलब यह है कि आप देश की इकोनॉमी ग्रोथ हुई। रोजगार के मौके लोगों को मिले इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार को इंडस्ट्रीज से जुड़े नियमों में बदजलाव करने की जरुरत है। मौजूदा समय़ में इंडस्ट्रीज को इंजीनियरिंग संसाधनों की जरुरत है और पूंजी निवेश की जरुरत है। टेक्नोलॉजी को ध्यान में रखकर सरकार को नई पॉलिसी लानी चाहिए।


साल 2030 तक देश में करीब एक करोड़ गाड़ियां बनेंगी जिसमें 60 लाख गाडियां इंटरनल कंबशन इंन के साथ होगी। इसलिए सरकार और इंडस्ट्रीज का हाइब्रिड इंजन पर फोकस होना चाहिए।