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महाराष्ट्र में रेरा से टूट रहा विश्वास!

प्रकाशित Thu, 05, 2018 पर 16:33  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

महाराष्ट्र रेरा लागू करने वाला पहला राज्य था। लेकिन पिछले एक साल में 800 से ज्यादा मामले निपटाने के बाद भी घर खरीदारों की शिकायतें निपटाने में महारेरा ज्यादा सफल नहीं हो पाया है। कभी बिल्डरों का पक्ष लेने तो कभी अपनी कार्य प्रणाली की वजह से महारेरा विवादों में घिरता रहा है।


80 साल के श्रीनिवासन सुन्दरेसन को ये कमरा अपने पोते के साथ शेयर करना पड़ रहा है क्योंकि 14 साल पहले इन्होंने एक बड़ा फ्लैट रुनवाल बिल्डर के मुलुंड प्रोजेक्ट में बुक किया था जो आज तक बनकर तैयार नहीं हो पाया है। रुणवाल बिल्डर्स का ये प्रोजेक्ट रुनवाल इंफिनिटी 2009 में ही तैयार होना था। लेकिन आज भी इसमें कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा हैं। बिल्डर का कहना हैं की ये प्रोजेक्ट 2027 तक ही पूरा हो पायेगा।


पहले फॉरेस्ट और एनवायरमेंट क्लियरेंस के अड़ंगे और फिर बाद में प्रोजेक्ट में बदलाव की वजह से लंबे समय तक ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। जब 2018 में काम दोबारा शुरू हुआ तो प्रोजेक्ट की लागत काफी बढ़ चुकी थी। इसकी वसूली बिल्डर पुराने घर खरीदारों से करना चाहता है।


घर खरीदारों के हित में फैसला सुनाए जाने की आस लेकर जब श्रीनिवासन रेरा में गए तो वहां उनके पक्ष को सुने बिना ही बिल्डर से समझौता करके केस निपटाने को कहा गया। रेरा की कार्यप्रणाली से परेशान श्रीनिवासन अकेले शख्स नहीं हैं। पुणे के पास लवासा में 45 लाख रुपये के फ्लैट की बुकिंग करने वाले के के मौर्य भी रेरा के ढीले रवैये के भुक्तभोगी हैं। मौर्य ने लवासा के मुगांव टाउनशिप में 2013 में फ्लैट बुक किया था। बिल्डर ने 2016 तक पजेशन देने का वादा किया था। लेकिन 25 लाख रुपये जमा करने के बाद भी इन्हें अभी तक घर नहीं मिला है। जब मौर्य ने रिफंड की मांग की तो बिल्डर ने उन्हें टालना शुरू कर दिया। इसके बाद मौर्य ने रेरा में गुहार लगाई। लेकिन यहां मामला सुलझने के बजाय और उलझ गया।


श्रीनिवासन और मौर्य दोनों ही पिछले 5 महीनों से रेरा के चक्कर काट रहे हैं। ऐसे में 60 दिनों के अंदर मामला निपटाने का दावा खोखला साबित हो रहा है। साथ ही रेरा के ऊपर से इनका विश्वास भी टूट रहा है।