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आवाज़ अड्डा: कर्नाटक में धार्मिक कार्ड, किसका चलेगा सिक्का!

प्रकाशित Tue, 10, 2018 पर 08:06  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कर्नाटक में विधानसभा का दंगल अब जोर पकड़ने वाला है। बीजेपी ने 72 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है और इस लिस्ट में दूसरे दलों से आने वालों के साथ ही लिंगायत को वरीयता दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही कांग्रेस की लिस्ट भी सामने आएगी। वहीं लिंगायत धर्मगुरुओं ने कांग्रेस का समर्थन करने की अपील की है। कर्नाटक में राहुल गांधी ने खुद मोर्चा संभाल रखा है तो राज्य में मोदी लहर पैदा करने की तैयारी चल रही है और त्रिपुरा में जीत का परचम लहराने वाले राम माधव स्ट्रैटेजी बना रहे हैं। 2019 के नजरिए से कर्नाटक के चुनाव सेमीफाइनल नहीं तो कम से कम क्वार्टरफाइनल जरूर साबित होंगे।


कर्नाटक चुनाव के लिए बीजेपी ने 72 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। बीजेपी ने दलितों, ओबीसी, कडवा, आदिवासी तमाम वर्गों को जगह दी है लेकिन 1 मुस्लिम, इसाई या जैन को टिकट नहीं मिला है और सबसे ज्यादा 21 लिंगायतों को टिकट दिए गए हैं। साफ है कि लिंगायतों को अलग धर्म की मान्यता देकर कांग्रेस ने बीजेपी के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। लिंगायत धर्मगुरुओं के कांग्रेस को समर्थन की घोषणा ने भी कांग्रेस का उत्साह बढ़ाया है। लेकिन एक बड़ा पेंच उस जातीय जनगणना ने भी फंसा दिया है जिसके आकंड़े सिद्धारमैया सरकार ने जारी नहीं किए।


इस सेंसस के लीक हुए डाटा के मुताबिक कर्नाटक की आबादी में सबसे बड़ा 18 फीसदी हिस्सा दलितों का है, उसके बाद मुस्लिम 12.5 फीसदी, लिंगायत लगभग 10 फीसदी, वोकालिंगा 8 फीसदी और कुरबा 7 फीसदी हैं। कहा जा रहा है कि नए जातीय आंकड़े सिद्धारमैया ने इसीलिए जारी नहीं किए क्योंकि इससे सारे सियासी समीकरण गड़बड़ा सकते हैं। इन दिनों दलितों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। ऐसे में कर्नाटक के 18 फीसदी दलित किसे वोट देंगे ये बड़ा सवाल है? लेकिन उससे पहले सवाल ये है कि क्या कांग्रेस को लिंगायतों को अलग धर्म और अल्पसंख्यक का दर्जा देने के फैसले का चुनावी फायदा मिलेगा!  इन्हीं सवालों पर आधारित है आज का आवाज़ अड्डा।