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आवाज़ अड्डा: उन्नाव कांड से निपटने में नाकाम रहे योगी!

प्रकाशित Fri, 13, 2018 पर 08:05  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

उत्तर प्रदेश में बलात्कार की कहानी उलझती जा रही है। हालत ये है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ही नहीं देश की सरकार और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी भी उत्तर प्रदेश के मामले में निरुत्तर ही नजर आ रही है। उन्नाव रेप कांड में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर पॉस्को एक्ट के तहत एफआईआर तो हुई लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई। मामला सीबीआई को सौंपने का फैसला भी हो गया और हद तो ये कि राज्य के डीजीपी ने कह दिया कि विधायक की गिरफ्तारी का फैसला अब सीबीआई को ही करना है। यानि जबतक सीबीआई मामले को हाथ में नहीं लेती तबतक यूपी पुलिस और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रहेगी।


आखिर कुलदीप सिंह सेंगर में ऐसी क्या खास बात है कि साल भर में 1 हजार एनकाउंटर करने वाली यूपी पुलिस और अपराध के खिलाफ हुंकार भरने वाले योगी आदित्यनाथ उसको हाथ नहीं लगा रहे हैं। अड्डा में इसी पर चर्चा करेंगे, लेकिन पहले देखते हैं कानून और राजनीति के लिहाज से अब तक क्या कुछ हुआ है।


यूपी सरकार ने उन्नाव रेप कांड और पीड़ित के पिता की हत्या के मामलों को सीबीआई के हवाले कर जैसे अपना कर्तव्य पूरा कर लिया है। क्योंकि इसी बात का एलान करने के साथ डीजीपी ओ पी सिंह ने साफ कर दिया है कि आरोपी विधायक सेंगर की गिरफ्तारी पर भी अब सीबीआई ही फैसला लेगी।


ध्यान रहे कि डीजीपी के ऐसा कहने से पहले उन्नाव कांड के लिए गठित एसआईटी की रिपोर्ट आ चुकी है और विधायक पर पॉस्को एक्ट के तहत एफआईआर भी हो चुकी है। यही नहीं आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर इस गहमागहमी के बीच लखनऊ एसएसपी के दफ्तर से भी घूम आए। विधायक कह रहे हैं कि वो निर्दोष हैं और पार्टी उनके साथ है।


इधर रेप पीड़िता को सीबीआई जांच के बावजूद इंसाफ की उम्मीद नहीं जग रही है क्योंकि विधायक खुला घूम रहे हैं। वो कह रही है कि इंसाफ की गुहार में सवालों के जवाब देते-देते वो थक चुकी है। इधर सेंगर के समर्थन में बयान देकर एक के बाद एक बीजेपी नेता विवाद को तूल दे रहे हैं। बलिया के बैरिया से बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह ने कहा था कि 3 बच्चों की मां के साथ रेप नहीं हो सकता। अब केंद्रीय मंत्री सत्यापाल सिंह विधायक के निर्दोष होने की संभावना जताकर कांग्रेस के निशाने पर आ गए हैं।


सवाल उठता है कि क्या योगी आदित्यनाथ उन्नाव कांड से निपटने में नाकाम रहे हैं? और अब सीबीआई जांच की सिफारिश कर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं? योगी सरकार पर चौतरफा दबाव के बीच खबर ये भी है कि प्रधानमंत्री खुद यूपी के 20 विधायकों से फोन पर बात कर योगी राज की सच्चाई का पता लगाएंगे। तो क्या उपचुनावों में हार, दलित सांसदों की शिकायत और लगातार बिगड़िती छवि को लेकर योगी आदित्यनाथ पहले से पार्टी आलाकमान के निशाने पर हैं और उन्नाव कांड ने पार्टी के भीतर उनके विरोधियों को एक बड़ा मौका दे दिया है? अड्डा में इन्हीं सवालों पर हो रही है बड़ी चर्चा।