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आवाज़ अड्डा: धर्म के आधार पर रेपिस्ट का बचाव क्यों!

प्रकाशित Sat, 14, 2018 पर 13:05  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बलात्कार के मामलों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुप्पी तोड़ी है और कहा है कि पिछले दिनों की घटनाएं शर्मनाक हैं और दोषियों को सजा दिलाई जाएगी। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के उन दो मंत्रियों ने भी इस्तीफा दे दिया है जिन्होंने आरोपियों का बचाव करने वालों का समर्थन किया था। सच पूछा जाए तो 8 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप और फिर उसकी हत्या पर प्रतिक्रिया देने के लिए शब्द ढूंढना मुश्किल है। लेकिन इस जघन्य कांड पर अपनी राजनीतिक सुविधा या पसंद के हिसाब से तर्क ढूंढने को शर्मनाक के सिवा और क्या कहा जा सकता है। आज आवाज़ अड्डा में कठुआ मामले पर ही बात होगी।


सारा देश एक सुर से कठुआ कांड के दोषियों के लिए कठोर सजा की मांग कर रहा है। नाबालिग से बलात्कार के लिए फांसी के कानून की मांग भी उठ रही है। लेकिन इससे पहले मामले को जम्मू में सांप्रदायिक भावनाएं इस कदर हावी हुई कि अभियुक्तों के बचाव के लिए हिंदु एकता मंच नाम का संगठन बनाया गया जिसमें क्षेत्र में सक्रिय सभी पार्टियों से जुड़े लोग शामिल थे। तिरंगा लेकर विरोध मार्च निकाल गया। वकीलों ने जम्मू बंद बुलाया और यहां तक कि कोर्ट में चार्जशीट फाइल करने जा रही पुलिस को घंटों रोके रखा। अब सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल, जम्मू बार एसोसिएशन और कठुआ बार एसोसिएशन से इसपर जवाब तलब किया है तो कठुआ और जम्मू बार एसोसिएशन अब इस आरोप से इंकार कर रहे हैं और कह रहे हैं कि पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए अब वो भी कैंडल मार्च निकालेंगे।


इस पर विपक्ष सरकार पर देश का सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने का आरोप लगा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका ने दिल्ली में एक कैंडल मार्च में हिस्सा लिया और कठुआ और उन्नाव की घटनाओं पर न्यायपूर्ण कार्रवाई की मांग की है। लेकिन बीजेपी कह रही है कि कठुआ के मामले में जम्मू-कश्मीर की सरकार ने तेजी से जांच करवाई है और विपक्ष राज्यों के मामले पर केंद्र को घेरने की चाल चल रहा है और चुने हुए मामलों को सामने कर राजनीति की जा रही है। बीजेपी नेता मीनाक्षी लेखी ने अपना तर्क समझाने के लिए इसी महीने असम में हुए बलात्कार के एक मामले का उदाहरण भी दिया।


सवाल उठता है कि क्या वाकई अब अपराध को भी राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है? आखिर वो कौन लोग हैं जो किसी भी तर्क के आधार पर बलात्कार के आरोपियों का बचाव करते हैं? और उन वकीलों के साथ क्या किया जाए जिन्होंने चार्जशीट दायर करने जा रही पुलिस का रास्ता घंटों रोके रखा!