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कंज्यूमर अड्डा: प्राइवेट कोचिंग क्लास पर लगाम

प्रकाशित Tue, 17, 2018 पर 06:51  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

हर माता-पिता अपने बच्चों के लिए अच्छा कैरियर चाहते हैं। सब चाहते हैं कि कंपीटिशन में उनका बच्चा आगे निकले। इसके लिए वो बच्चों की कोचिंग पर लाखों रुपये खर्च करने के लिए तैयार रहते हैं। इसमें शक नहीं कि कोचिंग क्लास में बच्चों को एक एक्स्ट्रा एज मिलता है लेकिन इसमें भी कोई दो राय नहीं कि कोचिंग क्लास अब कमाई का धंधा ज्यादा हो गई है। इसलिए अब महाराष्ट्र सरकार कोचिंग क्लास को रेगुलेट करने के लिए कानून बनाने जा रही है। लेकिन ज्यादातर कोचिंग क्लासेस महाराष्ट्र सरकार के इस कदम का विरोध कर रही हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि अगर सब कुछ ठीक से चलता है तो फिर रेगुलेशन का विरोध क्यों। इसी पर कंज्यूमर अड्डा में हम कर रहे हैं खास चर्चा।


प्राइवेट कोचिंग पर लगाम के लिए महाराष्ट्र प्राइवेट कोचिंग क्लासेस रेगुलेटरी बिल लाने की तैयारी हो रही है। सरकार कोचिंग क्लासेस काउंसिल बनाएगी और काउंसिल रेगुलेटरी अथॉरिटी के तौर पर काम करेगी। काउंसिल कोचिंग पर नजर रखने का काम करेगी। कोचिंग कानून के प्रस्ताव के मुताबिक फीस बढ़ाने की सीमा तय होगी और एक बैच में 120 से ज्यादा छात्र नहीं होंगे। लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग टॉयलेट होने चाहिए। बिल्डिंग में पार्किंग और सिक्योरिटी जरूरी होगी। हर साल कोचिंग की जानकारी अपडेट करनी होगी। टैक्स से जुड़ी सारी जानकारी देनी होगी और फीस कैश में नहीं ली जा सकेगी। प्राइवेट कोचिंग के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा और हर 3 साल में दोबारा रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।


हालांकि प्राइवेट टीचर्स एसोसिएशन ने महाराष्ट्र के इस प्रस्तावित बिल का विरोध किया है। प्राइवेट टीचर्स एसोसिएशन की दलील है कि डॉक्टर, वकील की फीस रेगुलेट नहीं होती है। शिक्षक की पेमेंट योग्यता के आधार पर होती है और शिक्षक की पेमेंट फिक्स करना मुमकिन नहीं है। दरअसल महाराष्ट्र सरकार का इस बिल के जरिए प्राइवेट कोचिंग की मनमानी पर लगाम लगाने की कोशिश है। साथ ही कॉलेज और कोचिंग की सांठगांठ पर नजर होगी।