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आवाज़ अड्डाः पीएम पद पर राहुल की दावेदारी, कितना दम!

प्रकाशित Wed, 09, 2018 पर 07:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

राहुल गांधी ने कहा है कि अगर 2019 में कांग्रेस की सरकार बनेगी तो वो प्रधानमंत्री बनेंगे। राहुल गांधी ने ये भी कहा है कि एकजुट विपक्ष के आगे मोदी नहीं टिक पाएंगे। वैसे तो ये बड़ा स्वाभाविक सा निष्कर्ष लगता है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या ममता बनर्जी, शरद पवार, मायावती जैसे क्षेत्रीय क्षत्रप राहुल का नेतृत्व स्वीकार करेंगे। जनता इसका जवाब चाहेगी। क्योंकि चाहे चुनाव के पहले हो या चुनाव के बाद, ये सवाल तो उठेगा।


कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के स्वाभाविक दावेदार हैं, लेकिन ये तो राहुल को भी पता है कि मौजूदा गुणा गणित में विपक्ष की एकजुटता के बगैर मोदी को सत्ता से बेदखल करना असंभव नहीं तो बेहद मुश्किल है। फिर भी बंगलुरू में एक सवाल के जवाब में राहुल ने कहा है कि कांग्रेस के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनेगी तो वो प्रधानमंत्री बनेंगे।


राहुल मानते हैं कि उनका प्रधानमंत्री बनना कांग्रेस के प्रदर्शन पर निर्भर करता है और कांग्रेस का प्रदर्शन विपक्षी गठबंधन पर। विपक्ष में मोदी को हराने लायक ताकत पैदा करने के लिए क्षेत्रीय क्षत्रपों की जो टीम खड़ी करने पड़ेगी उसमें ममता बनर्जी, मायावती, अखिलेश यादव, चंद्रबाबू नायडू, शरद पवार, लालू प्रसाद, नवीन पटनायक और के चंद्रशेखर राव जैसे लोगों का होना जरूरी है। इनमें से कई लोग अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दलों के नेतृत्व में फेडरल मोर्चा बनाने की बात कर रहे हैं। इनमें से कई लोगों में प्रधानमंत्री पद की महत्वाकांक्षा भी देखी जाती है। लेकिन एनसीपी ये दावा कर रही है कि शरद पवार ने विपक्ष के सभी दलों को इसी शर्त पर एकजुट किया है कि विपक्ष बिना किसी चेहरे के चुनाव लड़ेगा और प्रधानमंत्री के पद पर फैसला चुनाव के बाद होगा। 


लेकिन बीजेपी और उसके सहयोगी मानते हैं कि विपक्ष में एकजुटता संभव नहीं है और प्रधानमंत्री पद की दावेदारी कर राहुल गांधी बिखराव को और बढ़ावा दे रहे हैं। 


साफ है कि राहुल कांग्रेस नहीं संयुक्त विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री पद के दावेदार हों तो तभी बीजेपी पर दबाव बढ़ेगा। लेकिन क्या ये समय रहते हो पाएगा? अगर नहीं तो फिर बिना किसी चेहरे के विपक्ष मोदी का विकल्प बन पाएगा?