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वॉलमार्ट की ट्रॉली में फ्लिपकार्ट, किसको फायदा!

प्रकाशित Thu, 10, 2018 पर 07:51  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी वॉलमार्ट ने भारत की लीडिंग ऑनलाइन रिटेल कंपनी फ्लिपकार्ट को खरीद लिया है। वॉलमार्ट, फ्लिपकार्ट में 77 फीसदी हिस्सा खरीदेगी। ऑनलाइन सेक्टर में ये भारत की सबसे बड़ी डील है जिसकी कीमत 16 अरब डॉलर है। ये डील साल के अंत तक पूरी होगी। फ्लिपकार्ट को लिस्ट कराने की भी तैयारी है। कंज्यूमर अड्डा में इसी डील पर हो रही है बड़ी चर्चा।


फ्लिपकार्ट के सफर का बात करें तो ये भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है। ई-कॉमर्स बाजार का 39 फीसदी मार्केट शेयर इसके पास है। फ्लिपकार्ट की शुरुआत साल 2007 में हुई। सचिन बंसल, बिन्नी बंसल ने सिर्फ 4 लाख रुपये की पूंजी के साथ इसकी स्थापना की थी। 2009 में एस्सेल इंडिया ने इसमें 10 लाख डॉलर लगाए। 2010 में कंपनी ने 1 करोड़ डॉलर जुटाए। फ्लिपकार्ट ने टाइगर ग्लोबल से साल 2011 में 2 करोड़ डॉलर जुटाए। इसने 2014 में Myntra.com का अधिग्रहण किया। 2017 में सॉफ्टबैंक ने कंपनी में 2.5 अरब डॉलर का निवेश किया।


सॉफ्टबैंक फ्लिपकार्ट की सबसे बड़ी निवेशक है। सॉफ्टबैंक के पास फ्लिपकार्ट की 20.79 फीसदी हिस्सेदारी है। इस डील को वॉलमार्ट के नजरिए से देखें तो इससे वॉलमार्ट को भारत के ऑनलाइन बाजार में एंट्री मिलेगी और बड़ा भारतीय बाजार मिलेगा। ई-कॉमर्स बाजार में फ्लिपकार्ट की 39 फीसदी हिस्सेदारी है। भारत में वॉलमार्ट अमेजॉन को टक्कर देगी। ई-कॉमर्स बाजार में अमेजॉन की 30 फीसदी हिस्सेदारी है।चीन में भी दोनों कंपनियों के बीच सीधी टक्कर है। इस डील से वॉलमार्ट को भारतीय बाजार में कारोबार बढ़ाने का मौका मिलेगा।


वहीं फ्लिपकार्ट के नजरिए से देखें तो फ्लिपकार्ट को वॉलमार्ट के ऑफलाइन स्टोर्स का फायदा मिलेगा। रिटेल कारोबार में वॉलमार्ट का लंबा अनुभव है। नई टेक्नोलॉजी का भी सपोर्ट मिलेगा। फ्लिपकार्ट को वॉलमार्ट की सप्लाई चेन का फायदा भी मिलेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर में नए निवेश से फायदा होगा और ग्लोबल मार्केट में पहुंच बढ़ेगी।


डील को कंज्यूमर के नजरिए से देखें तो उसे सामान पर अच्छी डील मिल सकती है। विदेश में वॉलमार्ट कम दाम पर सामान बेचती है। वॉलमार्ट की एंट्री से डिस्काउंट वॉर बढ़ सकता है। भारत में एव्री डे लो प्राइसिंग कॉन्सेप्ट संभव है। सामान की फास्ट डिलिवरी होगी। ग्रोसरी आइटम्स की भी फास्ट डिलिवरी होगी। कस्टमर केयर की सुविधा बेहतर होगी।


उधर ऑफलाइन रिटेलर्स के आरोप हैं कि वॉलमार्ट रिटेल एफडीआई से देश में एंट्री नहीं कर पाई इसलिए मल्टी-ब्रांड रिटेल में ई-कॉमर्स के जरिए एंट्री कर रही है। डील से पहले 75 फीसदी ऑनलाइन विक्रेताओं की मंजूरी जरूरी है। वॉलमार्ट विदेश से सामान लाएगी और भारत को डंपिंग ग्राउंड बना देगी। भारतीय रिटेलर्स प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे। ऑफलाइन रिटेलर्स का कारोबार चौपट हो जाएगा और करीब 3 करोड़ रिटेलर्स को डील से नुकसान होगा।