Moneycontrol » समाचार » राजनीति

आवाज़ अड्डाः कर्नाटक के चुनावी दंगल से मिलेंगे 2019 के सिग्नल!

प्रकाशित Fri, 11, 2018 पर 20:27  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कर्नाटक चुनाव के लिए माहौल बनाने का समय समाप्त हो चुका है। अब जनता की बारी है। और कर्नाटक की जनता जो फैसला देगी, उससे देश के राजनीतिक मौहाल को दिशा मिलेगी। अगले कुछ महीनों में राज्यों के चुनाव और उनके बाद या उन्हीं के साथ लोकसभा का चुनाव? ये सवाल भी कर्नाटक के नतीजों में जवाब ढूंढेगा। वैसे तो कर्नाटक में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस सत्ता के संघर्ष में त्रिकोण बना रही है। ऐसे में कर्नाटक का चुनाव राष्ट्रीय पार्टियों के साथ-साथ क्षेत्रीय पार्टियों को भी बड़े सबक दे सकता है।


कर्नाटक की जनता सिर्फ अपनी सरकार नहीं चुनेगी, बल्कि 2019 के लिए बीजेपी और कांग्रेस की दावेदारियों का दम भी तय करेगी। कर्नाटक के प्रचार अभियान में राष्ट्रीय राजनीति और 2019 की आहट कई बार साफ तौर पर देखने को मिली। कांग्रेस ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों और सामाजिक माहौल पर सवाल उठाए तो बीजेपी ने कांग्रेस के वंशवाद और राहुल गांधी को टार्गेट किया। यहां तक कि प्रधानमंत्री पद पर राहुल गांधी की दावेदारी पर भी बयानबाजियां हुईं।


दक्षिण भारत में बीजेपी की सबसे दमदार मौजूदगी कर्नाटक में है। इसलिए कर्नाटक की सफलता-असफलता बीजेपी के दक्षिण में विस्तार को प्रभावित करेगी। कर्नाटक में प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत करिश्मे और अमित शाह के मैनेजमेंट का भी एक बड़ा टेस्ट होगा। इसी साल मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव होने हैं। इन तीनों राज्यों में भी मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच होगा। प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा के साथ राज्यों के चुनाव करवाने के हिमायती रहे हैं।


कर्नाटक में परिणाम अच्छे रहे तो हो सकता है कि इसी बार इसकी शुरूआत हो जाए और लोकसभा चुनाव थोड़े पहले हो जाएं। इसके अलावा विपक्ष की दो अहम पार्टियां जेडीएस और बसपा कर्नाटक में बीजेपी और कांग्रेस से अलग गठबंधन बनाकर लड़ रही हैं। उनके परफॉर्मेंस पर भी सबकी नजर है। ऐसे में कुल मिलाकर कर्नाटक के चुनाव परिणाम हर हाल में दिलचस्प परिस्थितियां पैदा करेंगे।