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आश्का गोराड़िया से पाएं फाइनेंशियल परेशानियों का हल

प्रकाशित Sat, 12, 2018 पर 17:42  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहते हैं। जानना चाहते हैं कि आपके इरादों का साथ आपकी जेब दे पाएगी या नहीं। अपने पर्सनल फाइनेंस की प्लानिंग खुद आमने सामने बैठ कर करवाना चाहते हैं तो आवाज़ पर मिलिए आश्का से। आश्का को आप एक मशहूर टीवी एक्ट्रेस के तौर पर तो जानते हैं लेकिन पर्सनल फाइनेंस की दुनिया में भी उन्होंने दर्शकों से एक नया नाता जोड़ लिया है।


गेट रिच विद आश्का में आज आश्का के साथ हैं बेंगलुरू के वैभव गुप्ता और समीक्षा। वैभव और समीक्षा की फाइनेंशियल सेहत की की बात करें तो इनकी कुल आमदनी 1.3 लाख रुपये महीनें और कुल खर्च 40 हजार रुपये है। इनकी मासिक बचत है 90 हजार रुपये।


अब बात करते हैं वैभव और समीक्षा की फाइनेंशियल प्लानिंग की। वैभव पर किसी की जिम्मेदारी नहीं, माता-पिता अब भी कार्यरत हैं। वैभव और समीक्षा की फाइनेंशियल सेहत की बात करें तो इन्होंने 2-3 लाख रुपये बतौर इमरजेंसी फंड एफडी में जमा कर रखे हैं। वैभव के पास कंपनी का दिया हेल्थ कवर है। हेल्थ पॉलिसी में समीक्षा और माता-पिता भी शामिल हैं। समीक्षा के पास भी कंपनी का हेल्थ कवर है। दोनों के पास 12-12 लाख रुपये का हेल्थ कवर है। लाइफ पॉलिसी का समीक्षा 50 हजार और वैभव 10 हजार सालाना प्रीमियम चुकाते हैं।


आश्का की सलाह की सलाह है कि वैभव और समीक्षा ट्रेडिशनल पॉलिसी का भारी प्रीमियम चुका रहे हैं। वैभव और समीक्षा दोनों आत्मनिर्भर, अभी लाइफ कवर की जरूरत नहीं है। फैमिली बढ़ने पर दोनों टर्म प्लान जरूर लें। ट्रेडिशनल पॉलिसी से क्यों बचें? इसका जवाब ये है कि ट्रेडिशनल पॉलिसी में लाइफ कवर और निवेश दोनों का मिक्स होता है। मनी बैक होने के कारण प्रीमियम बहुत ज्यादा होता है। इसकी समस्या है प्रीमियम भारी और सस्ते टर्म पॉलिसी के सामने कवर बहुत कम।


वैभव ने एमएफ मे भी निवेश कर रखा है। इन्होंने टैक्स सेविंग फंड, स्मॉल-मिड कैप फंड और ब्लू चिप में पैसे लगाए हैं। आश्का की सलाह है कि ये लंबे समय में बेहतर रिटर्न के लिए इक्विटी में पैसा लगाएं। एमएफ में हर महीने 13 हजार का एसआईपी निवेश करें। पोर्टफोलियो में सिर्फ एक अच्छा टैक्स सेविंग फंड काफी, बाकी पैसों को इक्विटी फंड्स में लगाएं। अपने निवेश लक्ष्य तय करते वक्त समय-सीमा और जरूरी रकम का ख्याल रखें। घर की प्लानिंग करते वक्त डाउन पेमेंट और लोन की रकम तय करें।