Moneycontrol » समाचार » राजनीति

आवाज़ अड्डाः कर्नाटक चुनाव में बड़ी पार्टी का तर्क देकर फंसी बीजेपी!

प्रकाशित Thu, 17, 2018 पर 20:28  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बी एस येदियुरप्पा कर्नाटक के मुख्यमंत्री बन गए हैं। लेकिन कर्नाटक के नाटकीय घटनाक्रम पर देश में नई बहस छिड़ गई है। कर्नाटक में सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का मौका देने के तर्क को आधार बनाकर अब गोवा में कांग्रेस और बिहार में आरजेडी जैसे दल मांग कर रहे हैं कि उन्हें सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए। इधर चुनाव के बाद पैदा हुई जेडीएस की अहमियत ने क्षेत्रीय दलों का उत्साह बढ़ा दिया है और अब कांग्रेस को मायावती नसीहत दे रही हैं कि बीजेपी को वाकई रोकना है तो कांग्रेस क्षेत्रीय दलों की अहमियत को समझें।


येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण के साथ विपक्ष ने कर्नाटक समेत देश भर में बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने सभी प्रदेश इकाइयों को विरोध प्रदर्शन करने को कहा है। लेकिन सबसे दिलचस्प है विरोध का वो नायाब तरीका जिसमें बीजेपी को उसी के तर्क से घेरने की कोशिश की जा रही है। गोवा, मणिपुर और मेधालय में बीजेपी ने चुनाव के बाद जोड़ तोड़ के आधार पर सरकारें बनाई और अब कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी का तर्क दे रही है। तो कांग्रेस कह रही है कि उसे गोवा में सरकार बनाने का मौका दिया जाए और बिहार में आरजेडी भी यही मांग कर रही है।


तेजस्वी यादव की बातों से साफ है कि बीजेपी के खिलाफ जंग में कांग्रेस या जेडीएस के अलावा विपक्ष की दूसरी क्षेत्रीय पार्टियां भी अपने लिए मौका देख रही हैं। कांग्रेस के लिए ये अच्छी खबर है लेकिन इसमें चेतवानी भी है। कर्नाटक में कांग्रेस ने जेडीएस को भाव नहीं दिया। उल्टा प्रचार के दौरान उसे बीजेपी की बी-टीम भी बताया। लेकिन चुनाव के बाद कांग्रेस जिस तरीके से जेडीएस को आगे रखने पर मजबूर हुई है, वो दूसरे क्षेत्रीय दलों का उत्साह बढ़ाने वाला है। आने वाले दिनों में कांग्रेस के साथ ये पार्टियां जबर्दस्त मोलभाव करेंगी। इसके संकेत इस बात से समझे जा सकते हैं कि मायावती ने कांग्रेस को साफ चेतावनी दी है कि वो कर्नाटक वाली गलती फिर ना दोहराए।


कांग्रेस के लिए क्षेत्रीय दलों का साथ दोधारी तलवार की तरह है - उन्हें साथ लेने से बीजेपी के खिलाफ मजबूती तो मिलेगी, लेकिन क्षेत्रीय दलों का असर जितना ज्यादा बढ़ेगा, कांग्रेस की राजनीतिक जमीन सिकुड़ती जाएगी। ऐसे में राहुल गांधी का प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब भी दांव पर लग सकता है। तो बड़ा सवाल ये है कि कांग्रेस क्षेत्रीय दलों के दबाव से कैसे निपटेगी। लेकिन सबसे दिलचस्प सवाल ये है कि तेजस्वी यादव के चुभते सवालों से बीजेपी कैसे निपटेगी?