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यूलिप हुए ज्यादा फायदेमंद

प्रकाशित Sat, 08, 2011 पर 12:36  |  स्रोत : Moneycontrol.com

8 जनवरी 2011

सीएनबीसी आवाज़



बीमा उत्पादों में यूलिप काफी लोकप्रिय माध्यम रहा है। नए दिशानिर्देशों के बाद यूलिप निवेश से ज्यादा बीमा के रूप में उपयोग में लाया जा रहा है और यही इसका सही तरीका है। माई इंश्योरेंस क्लब के वाइस प्रेसिडेंट मनोज असवानी के मुताबिक पहले की तुलना में आजकल की यूलिप पॉलिसी ग्राहकों के हितों का अधिक ख्याल रखती हैं।

यूलिप पर सलाह

मनोज असवानी के मुताबिक पहले यूलिप में प्रीमियम एलोकेशन शुल्क 25-28 फीसदी के बीच हुआ करते थे जो घटकर 6-10 फीसदी के बीच हो गए हैं। इसके अलावा फंड मैनेजमेंट चार्जेज भी पहले के 1.75 फीसदी से कम होकर 0.85 फीसदी के आसपास आ गए हैं।

मनोज असवानी के मुताबिक अच्छे यूलिप उत्पादों में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ टाइम सुपर का नाम लिया जा सकता है। इसमें निवेशकों को 18-20 फीसदी के रिटर्न मिल सकते हैं।


यूलिप की लॉक-इन अवधि बढ़ाने से ग्राहक के पास अच्छी राशि इकट्ठी हो जाती है और बाद में ये अच्छे रिटर्न देने में सक्षम होती हैं।


सस्ते बीमा उत्पाद- पेंशन प्लान/टर्म प्लान


मनोज असवानी के अनुसार एलआईसी पेंशन प्लस के फंड मैनेजमेंट चार्जेज बीमा उद्योग के सबसे बेहतर और सबसे कम शुल्क वाली पॉलिसी में से एक हैं। एलआईसी पेंशन प्लस के फंड मैनेजमेंट चार्ज 0.7-0.8 फीसदी हैं जो अन्य कंपनियों की तुलना में काफी कम हैं।


इसके अलावा इस पॉलिसी में पहले साल में 6.75 फीसदी प्रीमियम एलोकेशन चार्ज लगते हैं और दूसरे साल में 4.5 फीसदी शुल्क लगते हैं।


बजाज आलियांज फ्यूचर सिक्योर एसेट एलोकेशन फंड में ज्यादा अच्छे रिटर्न नहीं मिल पा रहे हैं तो इसमें से पूंजी निकाल कर कहीं और लगाई जा सकती है।


बिड़ला एडवांटेज में अच्छा सम एश्योर्ड मिलता है। पॉलिसी का टर्म 10 साल है हालांकि इसमें 5 साल तक ही प्रीमियम देना होता है। अतिरिक्त कवर के लिए इस पॉलिसी में पैसा लगा सकते हैं।


मनोज असवानी के मुताबिक आईसीआईसीआई की ऑनलाइन पॉलिसी का प्रीमियम भी समान फीचर वाली अन्य कंपनियों की पॉलिसी से काफी कम है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल आई-प्रोटेक्ट बीमा के सबसे सस्ते टर्म प्लान में से एक है।


ऑनलाइन पॉलिसी/हैल्थ इंश्योरेंस


मनोज असवानी का कहना है कि ऑनलाइन पॉलिसी लेने में संदेह नहीं रखने चाहिए क्योंकि ऑनलाइन पॉलिसी के क्लेम, प्रीमियम आदि से जुड़ी सर्विसेज के लिए लगभग सभी कंपनियों में अलग सेल होती है।


हैल्थ इंश्योरेंस कराते समय को-पेमेंट क्लॉज के बारे में अवश्य पता करें। इसके तहत कंपनी इलाज की 80 फीसदी राशि का भुगतान करती है। बाकी बची 20 फीसदी राशि का खुद भुगतान करना होता है।


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