अब आ गया टैक्स प्लानिंग का समय -
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अब आ गया टैक्स प्लानिंग का समय

प्रकाशित Sat, 15, 2011 पर 14:11  |  स्रोत : Moneycontrol.com

15 जनवरी 2011

सीएनबीसी आवाज़


वर्तमान वित्तीय वर्ष की समाप्ति में अब कुछ ही माह शेष रह गए हैं। जहाँ एक ओर कर्मचारी वर्ग को अपने नियोक्ता को टैक्स बचत के लिए किए गए निवेश का ब्यौरा देना है, वहीं प्रोफेशनल एवं व्यापारी वर्ग को अपनी टैक्स देयता का अनुमान लगाकर एडवांस टैक्स अदा करना है। ऐसे में अब समय आ गया है कि हम अपने व्यस्ततम समय में से कुछ समय निकालकर टैक्स प्लानिंग कर लें।


टैक्स प्लानिंग के लिए टैक्स स्लेब एवं टैक्स छूट के प्रावधानों की जानकारी आवश्यक है। आयकर अधिनियम की विभिन्ना धाराओं के तहत टैक्स बचत का भी प्रावधान है। आयकर अधिनियम की प्रमुख धाराएँ, जिनके तहत वर्तमान वित्तीय वर्ष में छूट प्राप्त की जा सकती है, वह निम्न प्रकार है :


‑धारा 80 सी, 80 सीसीसी, 80 सीसीडी :- आयकर अधिनियम की धारा 80 सी, 80 -सीसीसी एवं 80-सीसीडी के तहत व्यक्तिगत करदाता 100000 तक का अनुमोदित निवेश/अंशदान/खर्च/हाऊसिंग लोन रिपेमेंट आदि की छूट प्राप्त कर सकते हैं। अनुमोदित निवेश/ अंशदान के तहत ईपीएफ/पीपीएफ में अंशदान, एनएससी, टैक्स सेविंग एफडी, टैक्स सेविंग बॉण्ड, सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम, इंश्योरेंस प्रीमियम, ईएलएसएस एवं यूलिप आदि में निवेश किया जा सकता है। साथ ही दो बच्चों की पूर्णकालिक एजुकेशन की टयूशन फीस एवं वित्तीय वर्ष में यदि किसी हाउस प्रॉपर्टी की खरीदी की गई हो तो उस पर चुकाए गए स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क की भी छूट प्राप्त की जा सकती है।


धारा 80 सीसीएफ :- वित्तीय वर्ष 2010-2011 से व्यक्तिगत एवं एचयूएफ करदाता, आयकर अधिनियम की धारा 80 सीसीएफ के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉण्ड में निवेश कर 20000 तक की आय से छूट प्राप्त कर टैक्स बचत कर सकते हैं। यह छूट आयकर अधिनियम की धारा 80 सी, सीसीसी एवं सीसीडी के तहत प्राप्त हो रही है, एक लाख की छूट के अतिरिक्त है।


धारा 80 डी :- आयकर की धारा 80 डी के अंतर्गत स्वयं, पत्नी/पति एवं बच्चों के मेडिक्लेम पॉलिसी की सालाना प्रीमियम पर अधिकतम इ 15000 तक की आय में छूट प्राप्त की जा सकती है। सीनियर सिटीजन की दशा में 20000 तक की छूट प्राप्त की जा सकती है। माता-पिता की मेडिक्लेम पॉलिसी की सालाना प्रीमियम 15000 (सीनियर सिटीजन की दशा में 20000) तक की भी अतिरिक्त छूट प्राप्त की जा सकती है।


‑धारा 80 ई :- आयकर अधिनियम की धारा 80-ई के तहत व्यक्तिगत करदाता स्वयं, जीवनसाथी या बच्चों की उच्च शिक्षा हेतु लिए गए लोन पर चुकाए गए ब्याज की राशि की आय में से छूट प्राप्त कर सकते हैं।


टैक्स बचत के लिए निवेश करते समय हमें न केवल टैक्स बचत के उद्देश्य को ध्यान में रखना चाहिए बल्कि अपनी भविष्य की आवश्यकताओं, जीवन सुरक्षा, स्वयं की जोखिम-वहन-क्षमता, आय के साधन, बचत की क्षमता आदि बातों का ध्यान रखकर उचित विकल्प का चुनाव करना चाहिए। अगले अंकों में टैक्स बचत के तहत्‌निवेश के विभिन्ना विकल्पों को हम विस्तार से प्रकाशित करेंगे, जो आपके लिए टैक्स बचत के तहत निवेश के बेहतर विकल्प को चुनने में सहायक होंगे।


 


ये लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड के सीएफपी (सीएम), उमेश राठी द्वारा लिखा गया है।