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2011 के लिए निवेश विकल्प

प्रकाशित Sat, 29, 2011 पर 15:18  |  स्रोत : Moneycontrol.com

29 जनवरी 2011
सीएनबीसी आवाज



साल 2010 निवेशकों के लिए काफी मायने में शानदार साबित हुआ है। भारत की विकास दर वापस पटरी पर आती देखी, बढ़िया मानसून से काफी खुशी फैली, जोरदार बिक्री से ऑटो सेक्टर की ग्रोथ में भारी तेजी देखी गई और सबसे बढ़कर बाजार एक बार फिर 2008 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। 2010 के अंत से अमेरिकी बाजारों में सुधार देखा जा रहा है और इसका असर 2011 में देखा जाएगा।



इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए हम यहां उन विकल्पों पर ध्यान देंगे जो 2011 के लिए अच्छे फायदेमंद निवेश विकल्प साबित हो सकते हैं।



2011 के लिए निवेश विकल्प और नए चलन



अपने बाजार, अर्थव्यवस्था के आंकड़ों और सूचकांकों के आधार पर हम देखेंगे कि बाजार में निवेश के लिए कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं।



सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड

जैसा कि सब जानते हैं कि सरकारी और बॉन्ड योजनाएं हमेशा से कम रिटर्न और जोखिम मुक्त निवेश के साधन हैं। सरकारी बॉन्ड की तुलना में कॉर्पोरेट बॉन्ड ज्यादा अच्छे रिटर्न देते हैं। 2011 में सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को सहारा देने के लिए अधिक बॉन्ड ला रही है। ये निवेशकों के लिए एक और विकल्प बनकर सामने आया है।



इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में कॉर्पोरेट भी नए बॉन्ड लेकर सामने आ रहे हैं और निवेशक इनमें निवेश के जरिए ऊंचे रिटर्न कमा सकते हैं।



इसके साथ ही सरकार महंगाई से जुड़े बॉन्ड लाने पर भी विचार कर रही है। अगर ऐसा हो जाता है तो ये निवेशकों के पास महंगाई को हराने के लिए एक अच्छा साधन बन जाएगा



इक्विटी और इक्विटी आधारित म्युचुअल फंडों में निवेश



2010 में शेयर बाजार ने अच्छा प्रदर्शन किया है। बाजार 2008 के सर्वाधिक उच्च स्तर के काफी नजदीक पहुंच गया था। 2010 में शेयर बाजार ने करीब 17 फीसदी का रिटर्न दिया। उम्मीद है कि 2011 में भी बाजार विकास की तेज रफ्तार दिखाएगा और वैश्विक आर्थिक तस्वीर अच्छी रहेगी। 



अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के प्रयास जिसे क्यूई के तौर पर भी जाना जाता है। अमेरिका में क्यूई के प्रयास किए जा रहे हैं जिनका बाजार पर सकारात्मक प्रभाव हो सकता है। माना जा रहा है भविष्य में उभरते बाजारों में ज्यादा पूंजी प्रवाह देखने को मिलेगा। भारत में विदेशी पूंजी पर कड़ा नियंत्रण नहीं है इसलिए काफी संभावना है कि उभरते बाजारों में सबसे ज्यादा पूंजी भारत में ही आए। इसके फलस्वरूप बाजार में जबर्दस्त तेजी आ सकती है।



2010 में म्युचुअल फंडों से निवेशकों द्वारा काफी पैसा निकालते हुए देखा गया है। उम्मीद है कि 2011 में म्युचुअल फंडों में नई खरीदारी देखी जा सकती है।


डाइवर्सिफाइड म्युचुअल फंड में निवेश करने से किसी खास शेयर में निवेश से होने वाले जोखिम की संभावना को कम किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त नीचे दिए गए खास सेक्टर आधारित म्युचुअल फंड में निवेश से भी निवेशक अच्छा मुनाफा मिलने की उम्मीद कर सकते हैं।



इन सेक्टर पर ध्यान रखें



बैंकिंग सेक्टरः भारत की ग्रोथ 9-10 फीसदी के आसपास बनी रहेगी तो बैंकिंग सेक्टर का प्रदर्शन भी बेहतर होता रहेगा।
पावर सेक्टरः तेजी से विकास करती अर्थव्यवस्था के लिए भारत को ऊर्जा की काफी जरूरत पड़ेगी। उद्योगों और इंफ्रास्ट्रक्चर की ग्रोथ के लिए बिजली की बहुत जरूरत पड़ने वाली है। 2012 तक सरकार ने सबको बिजली पहुंचाने का लक्ष्य बनाया हुआ है। इन सब को देखते हुए निवेशकों के पास पावर सेक्टर में निवेश से बढ़िया रिटर्न कमाने के अवसर हैं।



कृषि सेक्टरः
खाद्य उत्पादों और कृषि उत्पादन की बढ़ती मांग के चलते कृषि सेक्टर में निवेशकों के पास कमाई के बहुत ज्यादा मौके बन रहे हैं। इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में भी लोगों का ध्यान बढ़ रहा है और 2011 में इस सेक्टर में भी कमाई के अच्छे मौके निकलकर सामने आ सकते हैं।



इंफ्रास्ट्रक्चरः
सरकार ने घोषणा की है कि अगले 10 सालों में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इसके बाद इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेज ग्रोथ की उम्मीद है और लंबी अवधि के निवेशक इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।



संभावित जोखिम तथ्य

निवेशकों को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि अच्छा कोष इकट्ठा करने के लिए समय पर प्रोजेक्ट का पूरा होना काफी जरूरी है। काफी जानकार विकासशील देशों से ज्यादा विकसित देशों में कमाई के ज्यादा मौके देख रहे हैं और ऐसे देशों पर अपने दांव लगा रहे हैं। इस वजह से एफआईआई पूंजी की काफी मात्रा देश से बाहर जा सकती है जो ग्रोथ की रफ्तार को कम कर सकती है।



सोना और चांदी

अमेरिका की क्वांटिटेटिव इजिंग की नीति के तहत बाजार में डॉलर की भरमार हो सकती है। डॉलर के ऊपर जाने के फलस्वरूप सोने के दाम में बढ़त देखी जा सकती है। अमेरिका में निम्न ब्याज दरें सोने की कीमतों को और भी सपोर्ट कर सकती हैं। 2011 में निवेशकों के लिए सोने में निवेश करना काफी अच्छा साबित हो सकता है।



इसके साथ चांदी ने भी पिछले 5 सालों में शानदार रिटर्न दिए हैं। उम्मीद है कि उद्योगों में चांदी के बढ़ते प्रयोग से 2011 में भी चांदी नई ऊंचाई पर पहुंचेगी।



जाने माने निवेशक मार्क मोबियस और जिम रोजर 2011 और इसके आगे के सालों के लिए कीमती धातुओं में बेहतरीन रिटर्न मिलने की संभावना जता रहे हैं।



संभावित जोखिम तथ्य



ये सारी उम्मीदें डॉलर के कमजोर होने के अनुमान पर लगाई जा रही हैं। इसलिए इस खतरे को नहीं भूलना चाहिए कि अगर विकसित देशों की अर्थव्यवस्था उभरते बाजारों से ज्यादा अच्छा प्रदर्शन करती हैं तो डॉलर में तेजी आएगी और सोने में गिरावट आ सकती है। इसके अलावा ब्याज दरों के बढ़ने का भी सोने की कीमतों पर नकारात्मक असर हो सकता है।



अन्य विकल्प

आपके पास निवेश के लिए कुछ अन्य विकल्प भी हैं जैसे यूलिप, रियल एस्टेट सेक्टर और फार्मास्यूटिकल सेक्टर आदि। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि अच्छे म्युचुअल फंड में निवेश करें जिससे जोखिम की संभावना कम हो सके।