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कर्ज भुगतान में देरीः जानिए आपके अधिकार

प्रकाशित Mon, 07, 2011 पर 15:52  |  स्रोत : Moneycontrol.com

7 फरवरी 2011



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आपकी वित्तीय उतार-चढ़ाव के चलते कर्ज के भुगतान में देरी होना जायज है। कभी कभार परिस्थितियां आपके नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं जिससे कर्ज का बोझ बढ़ता ही जाता है। ये परिस्थितियां खराब आर्थिक परिस्थिति, नौकरी के छूटने, आंशिक या पूर्ण विकलांगता या फिर पारिवारिक आपदाओं के चलते पैदा हो सकती हैं।



बैंकिंग क्षेत्र में कर्ज के भुगतान में गड़बड़ी करना अपराध है। ऐसे हालात में उधारी लेनेवाले व्यक्ति को कुछ अवसर पर कर्ज के भुगतान के लिए दी गई समयसीमा में बढ़ोतरी की जाती है। हालांकि, यदि इसके बाद भी उधारी लेनेवाला व्यक्ति कर्ज भुगतान में देर करता है तो उसे परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।



बैंकों में कार्यरत रिकवरी एजेंट की ओर से ग्राहकों के कर्ज भुगतान में गड़बड़ी करने की सूरत में की गई कार्रवाई को आरबीआई के निर्देश में लाने पर ग्राहकों को कुछ नियमों के तहत राहत मिलने की संभावना होती है।



आरबीआई के कौन-से नियमों तथा शर्तों से होगी आसानी



आरबीआई की ओर से तय किए गए नियम एवं शर्तें निम्नप्रकार से है -



1. रिकवरी एजेंट की ओर से ग्राहक को कर्ज की वसूली के लिए शारीरिक रुप से प्रताड़ित करना अपराध है। ग्राहक के साथ इसप्रकार की बदसलूकी होने पर बैंक को जिम्मेदार माना जाएगा।



2. रिकवरी एजेंट की ओर से ग्राहक को किसी भी अनुचित समय पर कॉल नहीं किया जा सकता है।



3. किसी भी प्रकार के मानसिक प्रताड़ना करने पर बैंक को दोषी ठहराया जा सकता है।



बैंकों की संस्था आईबीए ने एक कोड स्थापित किया है, जिसे मॉडेल कोड कहते हैं जिसका उपयोग ग्राहकों के साथ लेनदेन का व्यवहार करते समय इसी कोड का उपयोग किया जाता है। आरबीआई की ओर से बनाए गए नियमों का उल्लेख इस कोड में किया गया है।



बैंकों की एक अन्य संस्था बैंकिंग कोड एंड स्टैंडर्ड बोर्ड ऑफ इंडिया ने भी देश भर में इन्हीं नियमों एवं शर्तों वाले कोड को लागू किया है। इस नियमों के तहत बैंकों को सख्त निर्देश हैं कि रिकवरी एजेंट की नियुक्ति से पूर्व उसकी पृष्ठभूमि की पूरी जांच करें और रिकवरी एजेंसी से ग्राहकों को प्रताड़ित न किया जाय इसकी गारंटी लेनी होगी।



ग्राहकों को प्रताड़ना और यातनाओं से बचने के लिए ढ़ेरों नियमों को अमल में लाया गया है। हालांकि, इस बात का ख्याल रहे कि बैंकों को ग्राहक से कर्ज की पूरी वसूली करने का अधिकार है इसके लिए आरबीआई ने नियम बनाए हैं।



यदि आपकी वित्तीय स्थिति में उतार-चढ़ाव के चलते आपने कर्ज का भुगतान नहीं किया है तो तुरंत बैंक को इसकी जानकारी दें। अधिकांश बैंकों की ओर से इस स्थिति में चर्चा की जाती है और आपको कर्ज भुगतान करने के अन्य स्त्रोतों से अवगत कराया जाता है। बैंक से चर्चा करने के बाद रिकवरी एजेंट की ओर से आपको प्रताड़ित किया जाता है तो आप बैंक में जाकर इस बात की तक्रार करें। बैंक को आपकी शिकायत का 30 दिनों में जवाब देना होगा और इसकी जानकारी आप बैंकिंग ओम्बुडसमैन को दे सकते हैं।



कर्ज का भुगतान न करने की सूरत में बैंक की ओर से आपको बुलावा भेजा जाता है। हालांकि बैंक को इस संबंध में कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है। जैसे कि होम लोन के मामले में बैंक 3-4 महीने में कोई कार्रवाई कर सकती है, कार लोन की सूरत में बैंक 1 महीने में कार्रवाई कर सकती है। पर्सनल लोन के मामले में बैंक 1 महीने से कम समय में कार्रवाई कर सकती है। बैंक की ओर से कुछ मामले में आपको छूट भी दी जा सकती है।