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साल 2011 के लिए बीमा में नए चलन

प्रकाशित Mon, 07, 2011 पर 17:06  |  स्रोत : Moneycontrol.com

07 फरवरी 2011


Moneycontrol.com


 


बीमा जगत के लिए 2010 काफी महत्वपूर्ण साल रहा। यूलिप विवाद, सेबी बनाम इरडा का झगड़ा और कैशलेस बीमा के ऊपर काफी जद्दोजहद देखी गई। इसके अलावा काफी सारे आईपीओ तथा नए विलय और अधिग्रहणों ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया।


 


2010 में बीमा उत्पादों और बीमा प्लान में बदलाव


 


2010 में इरडा ने यूलिप में कुछ अहम बदलाव किए हैं। इरडा ने खर्चों पर नियंत्रण लगाया है, न्यूनतम लॉक-इन को बढ़ाया है, निवेशकों के लिए निश्चित रिटर्न की सीमा तय की है और इसके साथ ही न्यूनतम हेल्थ कवर और सम अश्योर्ड को भी तय किया गया है। इन सब बदलावों के बाद यूलिप पॉलिसी पहले से बेहतर बीमा विकल्प हो गई है।


 


साथ ही एक प्रस्ताव के तहत बैंकों को ज्यादा स्वायत्तता देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत बैंकों को ऐसे अधिकार दिए जाएंगे जिससे बैंक विभिन्न बीमा कंपनियों के बीमा उत्पादों के लिए एजेंट की तरह काम कर सकें। हालांकि अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है।


 


बीमा कंपनियों द्वारा कैशलेस सुविधाओं को जारी रखने पर रोक लगा दी गई है। अब बीमा कंपनियों ने बढ़ते खर्चों के चलते कैशलेस अस्पताल भर्ती की सुविधा से इंकार कर दिया है। बीमा नियामक इरडा ने भी इस विवाद का निपटारा करने से इंकार कर दिया है। 


2011 में बीमा चलन


 


2010 में बीमा इंडस्ट्री में जो बदलाव किए गए हैं वो 2011 और आने वाले कई सालों के लिए चलन में रहने वाले हैं।


 


जीवन बीमा


यूलिप में किए गए बदलावों के बाद 2011 में ये पॉलिसी और अधिक लोकप्रिय हो जाएगी। हालांकि एक चिंता की बात नजर आ रही है कि बीमा कंपनियां यूलिप बिक्री में ज्यादा रुचि नहीं लेंगी और परंपरागत बीमा प्लान पर वापस लौटेंगी।


 


परंपरागत बीमा प्लान जैसे व्होल लाइफ इंश्योरेंस, एन्डाओमेंट प्लान और मनीबैक प्लान पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है। बदलावों के बाद टर्म इंश्योरेंस प्लान सस्ते हो सकते हैं क्योंकि इनके प्रीमियम जीवन अवधि की संभावना के विपरीत अनुपात में होते हैं।


 


इसके साथ ही बैंक बीमा से जुड़े उत्पाद कारोबार पर अपना ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। अब तक बैंकों को सिर्फ एक प्रोवाइजर के जरिए बीमा बेचने की अनुमति मिली हुई थी। इसके बाद बैंकिंग सेक्टर काफी सारे इंश्योरेंस प्रोवाइडर के लिए एक साथ एडेंट के रूप में काम कर सकता है। इसके बाद ग्राहकों के पास इंश्योरेंस खरीदने के लिए एक और माध्यम खुल गया है।


 


क्या हो आपका नजरियाः आपके पास एक टर्म प्लान अवश्य होना चाहिए। यूलिप के अधिक आकर्षक और प्रभावशाली हो जाने के बाद आप लंबी अवधि के लिए यूलिप खरीद सकते हैं। आपको हमेशा किसी भरोसेमंद और स्थायी बीमा प्रोवाइडर से इंश्योरेंस लेना चाहिए क्योंकि इस सेक्टर में अत्याधिक ग्रोथ दिखने की वजह से रोज नए खिलाड़ी मैदान में आ रहे हैं।


 


मेडिकल इंश्योरेंस


बढ़ते चिकित्सा खर्चों और क्लेम के चलते मेडिकल इंश्योरेंस भी महंगे होते जा रहे हैं।


 


हेल्थ इंश्योरेंस के क्षेत्र में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों की बढ़ती आमद के चलते प्रतियोगिता बढ़ने के पूरे आसार हैं। इसके साथ ही इस बात की भी पूरी उम्मीद है कि आपके सामने कई हेल्थ बीमा उत्पाद आएं। हालांकि लंबी अवधि में बीमा उत्पादों की कीमत नीचे आने के संकेत कम ही हैं। कई बीमा कंपनियां सस्ते दामों पर बीमा उत्पाद बेच रही हैं लेकिन ये सिर्फ ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ही है। इसलिए आपको सावधान किया जाता है कि ऐसी स्कीम से बचें जिनके प्रीमियम जरुरूत से ज्यादा ही कम होते हैं।


 


इस बात की भी चर्चा चल रही है कि इंश्योरेंस में उच्च आय वर्ग के लिए नए हेल्थ बीमा उत्पाद लाए जाएं। इसमें लक्जरी इलाज और स्वास्थ्य देखभाल के खर्चों को उठाने की भी सुविधा मिल सके इस बात का प्रावधान लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हां ये खास तौर पर विशिष्ट ग्राहकों के लिए ही उपलब्ध होंगे क्योंकि इनकी कीमत स्वाभाविक रुप से ऊंची होगी।


 


कंपनियों द्वारा हेल्थ कवर की सीमा घटाए जाने की संभावना है क्योंकि हेल्थ कवर के खर्चे बढ़ते जाने की उम्मीद की जा रही है। हो सकता है कि आगे चलकर कर्मचारियों को अपनी कंपनियों द्वारा दिए जा रहे हेल्थ बीमा में मेडिकल खर्चों में भागीदारी करनी पड़े।


 


कैसा हो आपका नजरियाः हेल्थ इंश्योरेंस हमेशा हेल्थ कवर के लिए लें ना कि इसलिए कि इनका प्रीमियम कम होता है। कम प्रीमियम लंबी अवधि तक जारी नहीं रह सकते और इंश्योरेंस कंपनियों को 1-2 साल में प्रीमियम बढ़ाने ही पडेंगे। लिहाजा केवल अपने ऑफिस द्वारा मुहैया कराए जा रहे हेल्थ बीमा पर निर्भर ना रहें। आपको खुद बीमा कंपनियों की हेल्थ बीमा के कवर का तुलनात्मक अध्य्यन करना चाहिए और इसके आधार पर फैसला करना चाहिए।


होम इंश्योरेंस


 


यद्यपि होम इंश्योरेस का अभी भारतीय बाजारों में प्रवेश नहीं हुआ है। लेकिन बैंक धीरे-धीरे होम इंश्योरेंस की महत्ता को समझ रहे हैं। होम इंश्योरेंस बैंकों और कर्जदारों दोनों के लिए ही फायदेमंद हो सकता है। बैंक विचार कर रहे हैं कि होम लोन मंजूर करने से पहले होम इंश्योरेंस कराना अनिवार्य कर दिया जाए। अगर ऐसा हो जाता है तो होम इंश्योरेंस प्लान को लेकर काफी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।


 


क्या हो आपका नजरियाः अपने घर की सुरक्षा के लिए होम इंश्योरेंस कराना अच्छी बात है लेकिन इस बीमा के नियम और शर्तों के बारे में अच्छी तरह जांच पड़ताल कर लेनी चाहिए। अगर आप वास्तव में अपने घर को किसी दुर्घटना से बचाना चाहते हैं तो इस बीमा को जरूर अपनाएं।


 


ऑटो इंश्योरेंस


आने वाले समय में बढ़ते वाहनों की संख्या के आधार पर ऑटो इंश्योरेंस पैकेज की मांग भी काफी बढ़ने वाली है।


क्या हो आपका नजरियाः आपको उचित ऑटो इंश्योरेंस पैकेज लेना चाहिए जो आपकी सभी जरुरतों के मुताबिक हो।


 


अन्य चलन


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2011 में कुछ इंश्योरेंस कंपनियों के आईपीओ आने की संभावना है। आईपीओ के जरिए बीमा कंपनियां अपने आकड़ों को अधिक पारदर्शी बनाने पर ध्यान देंगी और इससे ग्राहकों को भी बेहतर बीमा कंपनी चुनने में मदद मिलेगी।


 


भारत में बीमा उद्योग के उज्जवल भविष्य की उम्मीद के चलते विश्वस्तरीय बीमा कंपनियों के घरेलू बाजार में उतरने के आसार हैं। उम्मीद की जा सकती है कि लोगों को अपनी खास जरूरतों के मुताबिक खास और बेहतर बीमा विकल्प मिल सकेंगे।