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आपका टैक्स और टैक्स गुरु

प्रकाशित Sat, 12, 2011 पर 11:55  |  स्रोत : Moneycontrol.com

12 फरवरी 2011



सीएनबीसी आवाज़



टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया
के मुताबिक आयकर के नियम 114 बी के तहत पैन नंबर (परमानेंट अकाउंट नंबर) देना अनिवार्य है। इसमें उन चीजों की जानकारी भी दी गई है जिसके तहत पैन नंबर देना जरूरी होता है।



1. 5 लाख रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त के साथ
2. मोटर व्हीकल खरीदने या बेचने पर
3. बैंको में 50,000 रुपये से ज्यादा के एकमुश्त डिपॉजिट के साथ
4. पोस्ट ऑफिस बचत खाते में 50,000 रुपये से ज्यादा जमा कराने पर
5. 1 लाख रुपये से ज्यादा की सिक्योरिटीज की खरीदारी करने पर
6. बैंक में खाता खुलवाने, फोन लगवाने की अर्जी, मोबाइल खरीदने के लिए
7. 25,000 रुपये से ज्यादा के होटल बिल भुगतान पर
8. 50.0000 रुपये से ज्यादा का बैंक ड्राफ्ट बनवाने के साथ
9. बैंक में 50.000 रुपये से ज्यादा जमा कराने पर
10. विदेश यात्रा के लिए 25,000 रुपये से ज्यादा के टिकट, ट्रैवलर्स चेक खरीदने पर 



ज्यादातर किसानों के पास पैन नंबर नहीं होता है। अगर पैन नंबर नहीं है और किसानों को प्रॉपर्टी बेचनी-खरीदनी हो या बड़ी पूंजी का भुगतान करने हों तो इसके लिए किसान फॉर्म 61 भरकर दे सकते हैं। इसके अलावा सामान्य व्यक्तियों के पास पैन नंबर नहीं है और बड़ी पूंजी का भुगतान आदि की स्थिति आती है तो फॉर्म 61 भरकर देना होगा।


हालांकि टैक्स गुरु के मुताबिक पैन नंबर बनवा लेना ही सबसे सही सुझाव है। दो हफ्ते के भीतर आयकर विभाग पैन नंबर जारी कर देता है और ये जरूरी नहीं कि पैन नंबर होने पर आयकर देना ही होगा।


टैक्स गुरु के मुताबिक व्यापारियों के लिए बुक्स ऑफ अकाउंट रखना टैक्स बचाने के नजरिए से बेहतर है। अगर व्यापार के लिए व्हीकल लोन लिया है तो इस लोन पर लगने वाले ब्याज को अकाउंट बुक में दिखाएं और टैक्स छूट का फायदा लें।



टीडीएस की जानकारी



सुभाष लखोटिया के मुताबिक अपने टीडीएस की जानकारी घर बैठे ले सकते हैं। incometaxindia.gov.in पर लॉग ऑन करें और फॉर्म 26एएस देख सकते हैं। रजिस्ट्रेशन की प्रकिया पूरी करें। इससे आप जान सकते हैं कि आपका कितना टीडीएस काटा गया है। अगर टीडीएस में कुछ गलती है उस व्यक्ति से संपर्क करें जिसने टीडीएस काटा है।



एचयूएफ को दिए उपहार पर टैक्स छूट



आयकर नियमों के तहत व्यक्ति अपने एचयूएफ को कोई गिफ्ट नहीं दे सकता है। उदाहरण के लिए अगर एचयूएफ को कोई मकान गिफ्ट किया तो पहले इस पर स्टैम्प ड्यूटी देनी होगी। इसके बाद अगर उक्त मकान से किराए की आय आती है तो इसे उपहार देने वाली की आय में जोड़कर इस पर टैक्स लिया जाएगा।



बेटी की शादी पर दिए गए उपहार पर टैक्स छूट



माता-पिता द्वारा अपनी बेटी को शादी में दिए गए उपहार पर टैक्स नहीं देना होगा। उन्हें केवल इसकी एक सूची बनाकर अपनी बेटी को देनी होगी। गहने, एफडी या नकद उपहार पर भी ये नियम लागू होता है।



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