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क्या है आपकी निवेश रणनीति

प्रकाशित Wed, 16, 2011 पर 14:47  |  स्रोत : Moneycontrol.com

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शेयर बाजार में फायदेमंद निवेश करने के लिए जरूरी है कि अपनी जरूरतों के मुताबिक रणनीति अपनाई जाए। अवधि, जोखिम, लक्ष्य को ध्यान में रखकर निवेश की रणनीति तय करें।

वैल्यू इंवेस्टिंग
वैल्यू इंवेस्टिंग को सबसे सफल निवेश रणनीति माना जाता है। इसमें मूल्यांकन से कम भाव पर मिल रहे शेयरों को ढूंढकर निवेश किया जाता है। किसी शेयर का सही मूल्य पता करने के लिए कंपनी के फंडामेंटल्स पर ध्यान दें, जैसे
- कंपनी की न्यूनतम बिक्री का लक्ष्य क्या है
- कंपनी के एसेट उसकी कर्जों के दोगुने होने चाहिए
- पिछले 5 सालों का रिटर्न
- शेयर का भाव पीई रेश्यो से ज्यादा न हो
- कंपनी के पास नकद होना जरूरी है

वॉरेन बुफे और बेंजामिन ग्राहम वैल्यू इंवेस्टिंग में विश्वास रखते थे।

ग्रोथ इंवेस्टिंग
ग्रोथ इंवेस्टिंग में ऐसी कंपनी को ढूंढा जाता है, जिसकी ग्रोथ सेक्टर के मुकाबले ज्यादा रहने के संकेत मिल रहे हों। कंपनी का चुनाव करते वक्त कारोबार, मैनेजमेंट, मार्जिन, उत्पाद पर ध्यान दिया जाता है।

फिलिप फिशर की पसंदीदा निवेश रणनीति ग्रोथ इंवेस्टिंग थी।

बार्गेन हंटिंग
भारी गिरावट वाले शेयर में खरीदारी करने को बार्गेन हंटिंग कहते हैं। इसमें अच्छे शेयरों को सस्ते में खरीदा जाता है। शेयर में तेजी आते ही मुनाफावसूली की जाती है।

जॉन टेम्पल्टन ने बार्गेन हंटिंग की शुरुआत की थी।

चेज यूअर इंवेस्टमेंट्स
चेज यूअर इंवेस्टमेंट्स मतलब है ऐसी कंपनी या कारोबार ढूंढना जिसके बारे में बाजार को पता नहीं है। इस तरह से निवेश करके ज्यादा रिटर्न कमाए जा सकते हैं।

चेज यूअर इंवेस्टमेंट्स पीटर लिंच की पसंदीदा रणनीति थी।

कंट्रेरियन अप्रोच
कंट्रेरियन अप्रोच में ऐसे शेयरों में निवेश किया जाता है जो बाजार को ज्यादा पसंद ना हों। इस निवेश रणनीति में किसी भी सेक्टर के सबसे सस्ते शेयर में निवेश किया जाता है। इस रणनीति का आधार है कि किसी अच्छी खबर से दिग्गज शेयरों के मुकाबले कम पसंद शेयरों को ज्यादा फायदा मिलता है। वैसे ही, बुरी खबर का असर दिग्गज शेयरों के मुकाबले कम पसंद शेयरों पर कम पड़ता है।

इस लेख के लेखक अनिल रेगो हैं, जो निवेश सलाहकार हैं।