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इंश्योरेंस इंडस्ट्री की बजट पर नजर

प्रकाशित Sun, 27, 2011 पर 15:03  |  स्रोत : Moneycontrol.com

27 जनवरी 2010

सीएनबीसी आवाज़



बजट में इंश्योरेंस कंपनियों के लिए कौन से कदम उठाकर सरकार इंश्योरेंस में लोगों की दिलचस्पी बढ़ा सकती है। जानते हैं इंश्योरेंस से जुडी समस्याओं पर बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस के चीफ डिस्ट्रीब्यूशन ऑफिसर ए एस नारायणन और अपना पैसा डॉट कॉम के सीईओ हर्ष रुंगटा की राय-

सवाल : अभी तक हमारे देश में लोग बीमा को निवेश के तौर पर देखते हैं। टैक्स बचाने या निवेश करने के लिए यूलिप या कोई भी ट्रेडिशनल प्लान लिया जाता है। इस बजट में वित्तमंत्री ऐसे क्या कदम उठाए जिससे बीमा कराने की आदत को बढ़ावा मिल सकता है। 

ए एस नारायणन: लंबी अवधि के निवेश के लिए अलग से टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। लाइफ इंश्योरेंस के लिए टैक्स छूट की सीमा अलग से 50,000 रुपये बढ़ाई जाए और इसके अलावा ईईई के तहत भी टैक्स छूट जारी रहनी चाहिए। साथ ही बीमा कंपनियों के घाटे पर लगने वाले मैट की सुविधा बढ़ाई जाए।


देश में इंश्योरेंस कल्चर बढ़ाने के लिए इस बजट में बहुत कुछ किया जा सकता है। इंश्योरेंस लंबी अवधि का बचत निवेश है और भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ोतरी के लिए इसकी बहुत जरूरत है। इंश्योरेंस बचत करने की आदत बढ़ाती है और साथ ही देश की जीडीपी का 5 फीसदी हिस्सा इंश्योरेंस से आता है। अब 50,000 रुपये की लिमिट में ट्यूशन, लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस भी शामिल हैं। इस लिमिट को 1,50,000 रुपये से बढ़ा दिया जाए या 50,000 रुपये सिर्फ लाइफ इंश्योरेंस के लिए टैक्स छूट मिलनी चाहिए।


सवाल : क्या लंबी अवधि के निवेश के लिए अलग से टैक्स छूट की सीमा बढ़ानी चाहिए। क्या इंश्योरेंस कंपनियों को फायदा देने के लिए ऐसे कदम लागू होंगे।

हर्ष रुंगटा : इंश्योरेंस उत्पाद खरीदने पर ग्राहक को सर्विस टैक्स न देना पड़े, इसके लिए बजट में इंश्योरेंस खरीदने के लिए प्रोत्साहन देने वाले कदम उठाए जाने चाहिए।  


सवाल : रेगुलेटर और बीमा नियामकों के बीच में तालमेल नहीं दिख रहा है। इसकी वजह से बीमा उत्पादों को लेकर कुछ उलझनें बढ़ रही हैं?

ए एस नारायणन
: जब कोई रेगुलेशन पास होता है और 1-2 महीने में लागू करने की घोषणा की जाती है तो इतने सारे बदलाव कम समय में करना संभव नहीं होता है। और ऐसी कंपनी जो पहले से नुकसान में है वो अपने खर्चों को नियंत्रित नहीं कर सकती है। अगर पहले से बताया जाए कि क्या बदलाव किए जाने वाले हैं तो सारी इंडस्ट्रीज पहले से तैयारी कर सकती है और सुचारु रुप से नए नियमों का लागू करना संभव है।


सवाल
: इंश्योरेंस अमेंडमेंड बिल पर वित्तमंत्री कुछ निर्णय ले सकते हैं?     

ए एस नारायणन: इंश्योरेंस एक्ट में कुछ सुधार देखे जा सकते हैं।


सवाल
: इस वक्त बीमा नियामक किस तरह के बदलाव कर सकते हैं क्या उम्मीद है? रेगुलेटर और सरकार दोनों मिलकर क्या कदम उठा सकते हैं?

हर्ष रुंगटा
: नियामकों ने काफी बदलाव किए हैं और कुछ और कदम उठाने की जरुरत है। खासतौर पर हेल्थ या टर्म इंश्योरेंस में पारदर्शी तरीके से बदलाव आना चाहिए। जितने बदलाव आए हैं उससे इंडस्ट्रीज पर असर हुआ है लेकिन ये लंबी अवधि के लिए अच्छा है। मेडिकल इंश्योरेस सेक्टर का अलग से एक नियामक होना जरुरी है।


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