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बीमा पॉलिसी पर मिलेगा कम रिटर्न

प्रकाशित Sat, 05, 2011 पर 11:40  |  स्रोत : Moneycontrol.com

5 मार्च 2011

सीएनबीसी आवाज़



बजट में इंश्योरेंस पर सर्विस टैक्स बढ़ाने से बीमाधारकों को पॉलिसी पर कम रिटर्न मिलेगा।



इंश्योरेंस पॉलिसी पर सर्विस टैक्स बढ़ाने के बाद यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी के प्रीमियम के एक हिस्से पर टैक्स लगेगा। पहले मोर्टेलिटी, फंड मैनेजमेंट पर ही चार्ज लगता था। साथ ही एंडोमेंट पॉलिसी में सर्विस टैक्स 1.03 फीसदी से बढ़ाकर 1.54 फीसदी कर दिया गया है।



बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस के चीफ डिस्ट्रीब्यूशन ऑफिसर ए एस नारायण के मुताबिक नए नियम के बाद यूलिप के सारे चार्ज पर 10.3 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा। इससे यूलिप के रिटर्न में 0.25 फीसदी की कमी आ सकती है।



भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर वी श्रीनिवासन के मुताबिक सर्विस टैक्स बढ़ने के बाद परंपरागत बीमा पॉलिसी की कॉस्ट 1 फीसदी से बढ़कर 1.5 फीसदी हो जाएगी। इससे बीमाधारक के रिटर्न में कमी आएगी। पहले जहां 15-20 साल की पॉलिसी में 8.5 फीसदी के करीब रिटर्न मिलते थे वहीं नए नियमों के बाद ये रिटर्न घटकर 8 फीसदी रह जाएगा।



एचडीएफसी लाइफ की सीएफओ विभा पाडलकर के मुताबिक बजट में इंश्योरेंस में एफडीआई लिमिट को बढ़ाकर 49 फीसदी करने पर मंजूरी के संकेत मिले हैं। सरकार को जल्द ही इसे लागू करने पर मंजूरी देनी चाहिए।



विभा पाडलकर के मुताबिक बजट में लॉन्ग टर्म सेविंग के लिए अलग से टैक्स छूट की सीमा नहीं बढ़ाना निराशाजनक है। सराकर को इस ओर कुछ स्पष्ट दिशानिर्देश की घोषणा करनी चाहिए थी। सरकार को 80 सी के अलावा जीवन बीमा पॉलिसी में 50,000 रुपये के निवेश पर अतिरिक्त टैक्स छूट देनी चाहिए थी।



वी श्रीनिवासन के मुताबिक सरकार हर साल बजट में बीमा जगत के लिए अलग-अलग नियम लाती रहती है। इससे असमंजस का माहौल बनता है। बीमा लंबी अवधि का निवेश है और इसके लिए ठोस नियम होने चाहिए जिससे बीमा कराने में लोगों की रुचि बढ़े।



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