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संपत्ति से लाभ पर ऐसे बचाएँ टैक्स

प्रकाशित Sat, 05, 2011 पर 13:24  |  स्रोत : Moneycontrol.com

5 मार्च 2011

सीएनबीसी आवाज़  



यदि चालू वित्तीय वर्ष में आपने किसी ऐसी संपत्ति को बेचा है, जो 36 माह से अधिक समय से आपके पास थी, तो ऐसी संपत्ति के विक्रय से होने वाला लाभ लांग टर्म केपिटल गेन की श्रेणी में आएगा।



आयकर अधिनियम की धारा 54, 54 बी, 54 डी, 54 ईसी, 54 एफ, 54 जी एवं 54 जीए के तहत विभिन्न प्रकार की संपत्ति पर बनने वाले केपिटल गेन का कर मुक्ति प्रावधान है। यदि आप केपिटल गेन पर टैक्स बचत करना चाहते हैं तो आयकर अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आपके पास निम्न दो विकल्प हैं-



1. यदि आयकर अधिनियम की धारा 54 ईसी के तहत किसी भी करदाता द्वारा कोई भी संपत्ति का विक्रय किया जाता है एवं उस पर उत्पन्न लाभ लांग टर्म केपिटल गेन की श्रेणी में आता है तो उक्त हस्तांतरण के 6 माह के अंदर नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया या रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन बॉण्ड में निवेश कर केपिटल गेन कर मुक्त हो सकता है।



2. यदि आयकर अधिनियम की धारा 54, 54 बी, 54 डी, 54 एफ, 54 जी एवं 54 जीए में उल्लेखित संपत्ति का विक्रय किया जाता है एवं उससे उत्पन्न लाभ लांग टर्म केपिटल गेन की क्षेणी में आता है, तो उक्त संपत्ति से उत्पन्न गेन का निवेश विभिन्न धाराओं में उल्लेखित संपत्ति में किया जाकर उक्त संपत्ति से उत्पन्न केपिटल गेन कर मुक्त हो सकता है।



केपिटल गेन में छूट के लिए यह आवश्यक है कि नई रहवासी संपत्ति में निवेश विभिन्न धाराओं में उल्लेखित समय में किया जाए, परंतु यदि आयकर विवरणी दाखिल करने की निर्धारित तिथि तक नई उल्लिखित संपत्ति में निवेश नहीं किया गया है, तो केपिटल गेन की राशि को 'केपिटल गेन डिपॉजिट अकाउंट' जो कि किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में खोला जा सकता है, में जमा करा दी जाना अनिवार्य है एवं बाद में नई संपत्ति में निवेश इसी खाते से किया जाना चाहिए अन्यथा छूट का लाभ नहीं मिल सकेगा।


यह लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर उमेश राठी ने लिखा है। umesh.rathi@arihantcapital.com पर उमेश राठी से संपर्क किया जा सकता है।