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वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए टैक्स गुरु की राय

प्रकाशित Sat, 19, 2011 पर 13:58  |  स्रोत : Moneycontrol.com

19 मार्च 2011

सीएनबीसी आवाज़



टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया के मुताबिक हर साल कंपनियां अपने वेतनभोगी कर्मचारियों को निवेश की जानकारी देने के लिए एक तारीख तय करती हैं। तय तारीख तक कंपनी को अपने सभी निवेश की जानकारी देकर ही आप टैक्स बचा सकते हैं। टैक्स गुरु के मुताबिक किसी कारणवश कर्मचारी तय समय तक कंपनी को निवेश की जानकारी ना दे सकें तो आयकर रिटर्न फाइल करके छूट क्लेम कर सकते हैं।



नौकरी के साथ पढ़ाई के खर्च पर टैक्स छूट

सुभाष लखोटिया के मुताबिक नौकरी करने के साथ अगर पढ़ाई भी कर रहे हैं और अपनी शिक्षा का खर्च सैलरी में से देते हैं तो इस पर टैक्स छूट नहीं मिल सकती है। अगर टैक्स छूट लेनी है तो एजूकेशन लोन के जरिए ही टैक्स छूट का फायदा उठा सकते हैं। सैक्शन 80 ई के तहत कर्मचारी अपनी पढ़ाई के लिए लिए गए एजूकेशन लोन के ब्याज पर टैक्स छूट ले सकते हैं।



वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए आयकर की धारा सैक्शन 80 डी के तहत केवल दो बच्चों की पढ़ाई पर किया गया खर्च टैक्स फ्री हो सकता है।


बच्चों को दिए उपहार पर टैक्स छूट


टैक्स गुरु के मुताबिक अगर वेतनभोगी कर्मचारी अपनी आमदनी में से नाबालिग बच्चों को उपहार के रुप में कुछ राशि देते हैं तो इस पर टैक्स छूट नहीं मिल सकती है। साथ ही बालिग बच्चों के उपहार के रुप में दी गई राशि को कल्बिंग ऑफ इन्कम माना जाएगा और इसपर भी टैक्स देनदारी बनेगी। टैक्स गुरु के मुताबिक आमदनी में से बच्चों को कुछ राशि देने से आप टैक्स देने से नहीं बच सकते हैं।


नौकरी बदलने के तहत टैक्स देनदारी



सुभाष लखोटिया के मुताबिक नौकरी बदलने के बाद आयकर की धारा 192 के तहत पुरानी कंपनी के सैलरी और टीडीएस की जानकारी नई कंपनी को देना जरुरी है। नए कार्यालय में सभी जानकारी देने के बाद पुराने और नई टैक्स देनदारी के आधार पर आपका टीडीएस काटा जाएगा।



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