Moneycontrol » समाचार » फाइनेंशियल प्लानिंग

एजूकेशन लोन के बारे में जानें

प्रकाशित Tue, 12, 2011 पर 11:45  |  स्रोत : Moneycontrol.com

12 अप्रैल 2011



hindimoneycontrol.com



आजकल पढ़ाई के लिए छात्रों के साथ-साथ माता-पिता को भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है। अपने बच्चों के उच्च शिक्षा के सपने को पूरा करने के लिए अभिभावकों को अच्छी खासी रकम की जरुरत होती है। इस काम को आसान करने के लिए बैंकों की तरफ से विद्यार्थियों के लिए एजुकेशन लोन प्रदान किए जाते हैं।



जानिए कि अपने बच्चों के शिक्षा के सपने को पूरा करने के लिए एजूकेशन लोन किस तरह मददगार साबित हो सकता है।




एजूकेशन लोन लेने के लिए सबसे पहले आपको भारतीय नागरिक होना चाहिए। 16-22 साल की आयु वर्ग के छात्र इस लोन को ले सकते हैं। हालांकि आयु के मामले पर अलग-अलग बैंकों का अलग हिसाब होता है। एजूकेशन लोन लेने के लिए विद्यार्थी का शैक्षणिक रिकॉर्ड अच्छा होना चाहिए।



आपके माता-पिता या अभिभावक के पास आय का नियमित स्त्रोत होना चाहिए ताकि जरुरत पड़ने पर वो लोन का भुगतान कर सकें। जिस संस्थान में पढ़ने के लिए आप एजूकेशन लोन मांग रहे हैं वह मान्यता प्राप्त होना चाहिए।



ज्यादातर नाबालिगों को एजूकेशन लोन नहीं मिलता है क्योंकि बैंक ये देखता है कि लोन चुकाने की क्षमता है या नहीं। लेकिन अगर आपके माता-पिता लोन चुकाने में सक्षम हैं तो आपको एजूकेशन लोन मिल सकता है।



एजूकेशन लोन को हासिल करने के लिए आपको एक गारंटर की जरुरूत होगी। अगर आप कर्ज चुकाने में सफल नहीं हो पाते हैं तो गारंटर को स्टूडेंट लोन चुकता करना होगा। ज्यादातर बैंक ऐसे लोगों को गारंटर मानते हैं जिनकी नेटवर्थ या सालाना आय एजूकेशन लोन की कुल पूंजी से ज्यादा हो।



4 लाख रुपये से ज्यादा के एजूकेशन लोन के लिए कोलैट्रल की जरुरत होती है, मसलन जितना लोन होता है उसके अनुपात में थर्ड पार्टी गारंटी की जरुरत हो सकती है। सह-लेनदार (माता-पिता या अभिभवक) को अपने बैंक खातों के स्टेटमेंट, पिछले 2 साल के टैक्स रिटर्न स्टेटमेंट एसेट और देनदारी के स्टेटमेंट और आय प्रमाण पत्र दिखाने पड़ सकते हैं। सामान्य तौर पर बैंक नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट, बॉन्ड, सोना-चांदी, वाहन, घर या प्रॉपर्टी को सिक्योरिटी के रुप में स्वीकार करते हैं।



4 लाख रुपये से लेकर 7.5 लाख रुपये तक के लोन के लिए थर्ड पार्टी गारंटी के रुप में कोलेट्रल की जरुरत हो सकती है। कुछ मामलों में बैंक थर्ड पार्टी गारंटर की बाध्यता समाप्त कर सकता है अगर सह लेनदार (माता-पिता) द्वारा मुहैया कराए गए दस्तावेज से बैंक संतुष्ट होता है।



7.5 लाख रुपये से ज्यादा की रकम के लिए कोलेट्रल के सिक्योरिटी के साथ थर्ड पार्टी गारंटी की जरुरत हो सकती है। इसके साथ ही एक दस्तावेज भी देना होता है जिसमें छात्र के भविष्य की आमदनी जिसके जरिए लोन की किस्तें चुकाई जाएंगी का ब्यौरा होता है।



आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग (कुल पारिवारिक आय सालाना 4.50 लाख रुपये से कम) के लिए मानव संसाधन विभाग की केंद्रीय योजनाओं के तहत कुछ प्रावधान हैं। इसके तहत भारत में तकनीकी और व्यावसायिक कोर्स के लिए एजूकेशन लोन के ब्याज पर सब्सिडी दी जाती है। ये पूंजी एक निश्चित समय के लिए दी जाती है। उदाहरण के लिए कोर्स खत्म होने के एक साल बाद तक या नौकरी मिलने के 6 महीने के भीतर जो भी पहले हो।



जब 1 लाख रुपये से ज्यादा का एजूकेशन लोन हो तो बैंक ज्यादातर उन विद्यार्थियों को लोन देना पसंद करते हैं जिनके पास लोन के बराबर या ज्यादा पूंजी का लाइफ इंश्योरेंस हो। ये एक सुरक्षा फीचर से ज्यादा कुछ नहीं है और इसे सहायक के रुप में भी जाना जा सकता है। अगर लेनदार को कुछ हो जाता है तो बैंक की पूंजी डूबेगी नहीं और इंश्योरेंस पॉलिसी के जरिए बैंक बचे हुए लोन को वसूल सकता है।



कुछ बैंको ने विशेष संस्थानों के खास कोर्स करने के लिए छात्रों को एजूकेशन लोन देने का करार किया है।




क्या एजूकेशन लोन के जरिए सभी खर्चों को कवर किया जाता है



•    कॉलेज, स्कूल, हॉस्टल और टूयूशन फीस का खर्च
•    परीक्षा शुल्क, लाइब्रेरी और लैबोरेटरी शुल्क
•    किताबों, शैक्षणिक उपकरणों और यूनिफार्म का खर्च
•    कॉशन मनी, बिल्डिंग फंड, रिफंडेबल डिपॉजिट इन सभी के साथ संस्थान के बिल और रसीदें की जरुरत होगी
•    छात्र की विदेश यात्रा के लिए ट्रैवल अलाउंस
•    अगर कोर्स पूरा करने के लिए कंप्यूटर खरीदना अनिवार्य हो
•    पढ़ाई पूरी करने के लिए अन्य जरुरी खर्चें जैसे एजूकेशन टूर, थीसिस, प्रोजेक्ट वर्क आदि का खर्च
•    कुछ बैंक छात्र का 50,000 रुपये तक का टू-व्हीलर खर्च भी उठाते हैं




निजी वित्तीय जानकार हर्ष रूंगटा के मुताबिक भारत में शिक्षा सेक्टर के बेहतर भविष्य के लिए एजूकेशन गारंटी फंड बनाना सही कदम होगा। एजूकेशन गारंटी फंड के जरिए शिक्षा सेक्टर को काफी मदद मिल सकती है। इसके अलावा वित्त मंत्रालय को एक एजूकेशन री-फाइनेंस कॉर्पोरेशन बनाने की योजना पर भी ध्यान देना चाहिए। ये मामला 4 साल से लटका हुआ है।



यह लेख अपना पैसा डॉटकॉम के चीफ एडिटर बियानु वाघेला द्वारा लिखा गया है।