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इक्विटी निवेश पर टैक्स कैसे बचाएं

प्रकाशित Tue, 12, 2011 पर 15:06  |  स्रोत : Moneycontrol.com

12 अप्रैल 2011



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अगर आप इक्विटी में निवेश करते हैं और कुछ घाटा उठा चुके हैं तो इस अवसर को टैक्स छूट की क्षमता में सुधार के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। इक्विटी में समझदारी के साथ ट्रेडिंग करने के साथ टैक्स चुकाने में भी कुछ समझदारी अपनाएं तो फायदा हो सकता है।



कैपिटल लॉस के प्रकार



अपने पास शेयर रखने की अवधि को आधार मानकर आपके घाटे और मुनाफे को दो श्रेणी में बांटा जा सकता है। लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन और लॉस। अगर आपने 1 साल के लिए शेयर अपने पास रखा और इसे घाटे में बेच दिया तो इसे लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस माना जाएगा। 1 साल से कम समय तक रखने के बाद शेयर को घाटे में बेचा तो इसे लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस माना जाएगा।



शॉर्ट टर्म लॉस को आगे भी 8 साल के लिए जारी रखा जा सकता है। शॉर्ट टर्म लॉस को उसी साल के दौरान शॉर्ट टर्म गेन के बदले में बंद किया जा सकता है, या आठ सालों के दौरान कभी भी बंद किया जा सकता है। लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को आगे जारी नहीं रखा जा सकता है क्योंकि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स छूट मिलती है।



शेयरों के जरिए हुए लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को आगे भी जारी रखा जा सकता है अगर आप स्टॉक एक्सचेंज के जरिए लेन-देन ना करें और विक्रेता से सीधे ऑफ मार्केट डील कर लें। हालांकि इस तरह के लेन-देन के लिए खरीददार को ढूंढना कोई आसान काम नहीं है। इसके अलावा लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को सिर्फ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के बदले में ही बंद कर सकते हैं।



ये याद रखें कि शेयरों और फंड में से पहले खरीदें, पहले बेचें का नियम लागू होता है। जो शेयर आपने पहले खरीदें हैं उन्हें पहले बेचा जाएगा। अगर 1 साल के दौरान थोड़ा-थोड़ा करके काफी शेयर खरीदें हैं और अब आप उनमें से कुछ बेच रहे हैं तो शॉर्ट टर्म लॉस की गणना करते वक्त सावधानी बरतें। इस तरह के लेन-देन में कुछ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के दायरे में आ सकते हैं।



बोनस स्ट्रिपिंग



टैक्स देनदारी कम करने के लिए बोनस स्ट्रिपिंग भी एक विकल्प है। अक्सर देखा जाता है कि जब कंपनियां बोनस की घोषणा करती हैं तो निवेशक भारी मात्रा में शेयर खरीदते हैं। बोनस स्ट्रिपिंग के तहत निवेशक ऐसे समय शेयर खरीदते है जब कंपनियां बोनस इश्यू लाती हैं। बाद में जब पहले के खरीदे हुए शेयर एक्स बोनस शेयर हो जाते हैं तो निवेशक इन्हें नुकसान पर बेच देते हैं। ये नुकसान उनकी दूसरी होल्डिंग्स के कैपिटल गेन के बदले बंद हो सकते हैं। इसके बाद लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के जरिए टैक्स छूट पाने के लिए निवेशक बोनस शेयरों को 12 महीने से ज्यादा के लिए अपने पास रख सकते हैं।



उम्मीद है कि इक्विटी में ट्रेडिंग करते वक्त इन सभी सुझावों के जरिए आप अपना टैक्स बचाने में कामयाब हो पाएंगे।



यह लेख अनिल रेगो द्वारा लिखा गया है।