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छुट्टियों के दौरान कैसे बचाएं टैक्स

प्रकाशित Tue, 12, 2011 पर 16:56  |  स्रोत : Moneycontrol.com

12 अप्रैल 2011



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इस समय लगभग सभी घरों में छोटे बच्चों के साथ गर्मी की छुट्टियां बिताने की प्लानिंग चल रही होगी। ऐसे में हमें भारत सरकार को धन्यवाद देना चाहिए जो यात्रा के खर्चों से निपटने के लिए एलटीए जैसी टैक्स छूट प्रदान करती है। हालांकि एक बात ध्यान रखनी कि जहां टैक्स छूट के लिए वित्त वर्ष को आधार माना जाता है वहीं एलटीए के लिए साल को ध्यान में रखा जाता है।



आयकर धारा के सेक्शन 10 के तहत अगर कोई कर्मचारी कम से कम 5 दिन के लिए अपने परिवार के साथ छुट्टी पर जाता है तो वह एलटीए के लिए क्लेम कर सकता है। साथ ही ये एलटीए की राशि टैक्स छूट के अंतर्गत आती है। इसके लिए कर्मचारी को कम से कम 2 दिन की छुट्टी लेनी जरुरी है। अलग-अलग कंपनियों की विभिन्न पॉलिसी होती हैं। यह क्लेम सिर्फ भारत में यात्रा पर ही टैक्स छूट दिला सकता है, भारत से बाहर से यात्रा पर नहीं।



एलटीए क्लेम के लिए यात्रा के दस्तावेज सही और मूलरुप में होने चाहिए। एलटीए के तहत जो क्लेम मिलता है इसमें सिर्फ टिकट की पूंजी शामिल होती है। होटल में रहना, खाने और अन्य सहायक खर्चे इसमें शामिल नहीं हैं। हालांकि ट्रैवल अलाउंस पर कोई सीमा नहीं है लेकिन कंपनियां अपने हिसाब से ट्रैवल अलाउंस के लिए अधिकतम सीमा निर्धारित कर सकती हैं। आप अन्य अलाउंस के लिए उसी सूरत में आवेदन कर सकते हैं अगर ये आपकी सैलरी ढ़ांचे का हिस्सा हो।



क्लेम कैसे करें



एलटीए हर 4 साल के दौरान लिया जा सकता है। 1986 से शुरु होकर हर 4 साल के दौरान एलटीए के लिए क्लेम किया जा सकता है। फिलहाल साल 2008 से 2011 (31 दिसंबर 2011 को खत्म) के 4 सालों के दौरान की गई यात्रा पर एलटीए की सुविधा ली जा सकती है। एक व्यक्ति सिर्फ दो बार ही एलटीए क्लेम कर सकता है।



अगर कोई कर्मचारी 4 सालों के तय समय के दौरान क्लेम नहीं करता है तो अगले 4 सालों के दौरान उसे यात्रा के लिए विशेष सुविधा दी जाती है, हालांकि इसे 4 साल के समय के पहले साल में ही क्लेम करना जरुरी होता है।



क्लेम के फायदे लेने के लिए दस्तावेज और योग्यता



सड़क परिवहन यात्राः इसके तहत या तो जन परिवहन साधन प्रयोग किए जाएं या फिर निजी गाड़ी के जरिए अपनी मंजिल तक पहुंचे। एलटीए क्लेम के अंतर्गत अगर जाना पहचाना सरकारी परिवहन लिया गया हो तो शर्त है कि फर्स्ट क्लास या डीलक्स के किराए से ज्यादा रकम नहीं होनी चाहिए। साथ ही मंजिल तक पहुंचने के लिए सबसे छोटा रास्ता अपनाया गया हो।



अगर सड़क परिवहन के फर्स्ट एसी का किराया रेल के फर्स्ट एसी के किराये की सीमा से ज्यादा हो तो यात्रा के लिए सबसे छोटे रास्ता का किराया एलटीए क्लेम के तहत माना जा सकता है।



रेल यात्राः
अगर रेल परिवहन से यात्रा की जा रही हो तो यात्रा का कुल किराया सबसे छोटे रास्ते से एसी फर्स्ट क्लास के किराये से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इसके अलावा यात्रा की मंजिल के स्टॉप भी भी एक होने चाहिए। एक ही मंजिल के कई स्टॉपेज भी नहीं होने चाहिए।



हवाई यात्राः अगर हवाई रास्ते से सफर कर रहे हैं तो यात्रा के सबसे छोटे रास्ते के इकॉनॉमी क्लास से ज्यादा नहीं होना चाहिए। उदाहरण के लिए अगर कोई दिल्ली से बंगलुरु जा रहा है तो उसे सीधा एक ही स्टॉपेज का किराया क्लेम करना चाहिए। एक मंजिल के लिए अलग-अलग स्टॉपेज पर रुककर पूरी ट्रिप के लिए एलटीए क्लेम नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही यात्रा के क्लेम पर टैक्स छूट के लिए कर्मचारी को मूल टिकट दिखाने होंगे।



एलटीए क्लेम के तहत कर्मचारी के सिर्फ अपने परिवार को ही शामिल किया जाता है। आश्रित माता-पिता, पति-पत्नी, दो बच्चे या फिर कर्मचारी पर आश्रित भाई-बहन की यात्रा को ही एलटीए के तहत क्लेम किया जा सकता है। आयकर कानून में इसकी पूरी परिभाषा दी गई है।



ज्यादातर लोग लीव ट्रेवल अलाउंस को क्लेम किए बगैर ही छोड़ देते हैं। उम्मीद है कि इस जानकारी के बाद छुट्टियों पर जाने का साथ टैक्स बचाने में भी सक्षम होंगे।



यह लेख अनिल रेगो द्वारा लिखा गया है।