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लोन ट्रांसफर के लिए कुछ उपयोगी सुझाव

प्रकाशित Tue, 12, 2011 पर 19:04  |  स्रोत : Moneycontrol.com

12 अप्रैल 2011



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होम लोन ट्रांसफर (इसे बैलेंस ट्रांसफर या रिफाइनेंसिंग के रूप में भी जानते हैं) एक ऐसा विकल्प है जिसे ज्यादातर वो लोग अपनाते हैं जो बाजार में निचली ब्याज दरों के चलते मिल रही सुविधाओं का फायदा उठाना चाहते हैं।



सामान्यतया किसी बैंक के मौजूदा लेनदारों को लोन अवधि के 2 साल से पहले बाजार की निचली ब्याज दरों का फायदा नहीं मिल पाता है। हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मौजूदा लेनदारों को भी निम्न ब्याज दरों का फायदा पहुंचाने की सिफारिश की है। कुछ लोग अपने अच्छे रिपेमेंट रिकॉर्ड के आधार पर बैंक से ब्याज दरों के घटाने की सिफारिश कर सकते हैं। अगर बैंक उनकी सिफारिश को नहीं मानता है तो वो किसी और बैंक में जा सकते हैं जो बाजार में चल रही निम्न ब्याज दरों के आधार पर ही लोन पर ब्याज वसूलते हैं।



ये प्रक्रिया कैसे काम करती है



आपको मौजूदा देनदार को एक पत्र लिखकर लोन ट्रांसफर की अर्जी देनी होगी। आपके आवेदन के आधार पर बैंक आपको बची हुई रकम के विवरण सहित सहमति पत्र या एनओसी (नॉन ऑब्जैक्शन सर्टिफिकेट) प्रदान कर सकता है।



आपको ये पत्र नए देनदार को देना होगा जो पुराने देनदार को लोन की पूरी राशि प्रदान करेगा और अकाउंट बंद करने की अर्जी देगा। एक बार ये ट्रांजैक्शन पूरा हो जाएगा तो उसके बाद आपकी संपत्ति के कागजात नए देनदार को सौंप दिए जाएंगे। इसके बाद आपके पोस्ट डेटेड चेक/ईसीएस निरस्त कर दिए जाएंगे।



इसके बाद नया बैंक आपको वैसी दरों पर होम लोन देने की पेशकश करेगा जिन दरों पर बैंक के मौजूदा ग्राहकों को होम लोन मिला है। साथ हीआपके मौजूदा देनदाता द्वारा रिफाइनेंसिंग के समय आपको प्री-पेमेंट पेनेल्टी लगाई जा सकती है जो लोन की बची हुई राशि का 2-5 फीसदी के बीच हो सकता है। याद रखें कि इसके अलावा आपको नए देनदार को प्रोसेसिंग फीस भी देनी होगी। यह कुल लोन की पूंजी के 0.5 फीसदी से 1 फीसदी के बीच हो सकती है। ज्यादातर बैंकों ने इस रकम को 5,000 रुपये तक सीमित कर रखा है।



इन सब खर्चों को देखते हुए अगर आपको ऐसा लगता है कि लोन को दूसरे बैंक में स्विच करने से आपको ब्याज बचाने में ज्यादा फायदा मिल सकता है, तो ही आप एक देनदार से दूसरे में स्विच करने की सोचें।



मौजूदा ब्याज दरों के परिप्रेक्ष्य में लोन ट्रांसफर करना ज्यादा उपयुक्त नहीं दिखाई पड़ रहा है बशर्ते आपके पास दूसरे कारण ना हों। नए साल की शुरुआत से ही सभी बैंको ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी से लेकर 0.75 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इसके अलावा आरबीआई की आने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा के चलते ब्याज दरों में और बढ़त की संभावना जताई जा रही है।



याद रखें कि होम लोन स्विच करने की प्रक्रिया में आपको एक बार फिर सारी कार्रवाई को दोहराना होगा। संपत्ति दस्तावेजों का कानूनी वेरिफिकेशन से लेकर नए बैंक के तकनीकी मूल्यांकन सभी कुछ दोबारा होंगे। और याद रखें कि लोन उसी सूरत में पास होगा जब सारी शर्तें पूरी होती हों।



ब्याज बचाने के साथ कुछ अन्य तथ्य भी हैं जो होम लोन स्विच करने के पीछे अहम कारण बन सकते हैं -



अगर बैंक लोन टर्म बदलने के लिए नहीं मानते हैं- हो सकता है कि कई बार आप अपने लोन की शर्तें और नियम बदलना चाहते हों लेकिन बैंक इसके लिए राजी नहीं होते हैं। उदाहरण के लिए आप अपने लोन की अवधि बढ़ाना चाहते हैं जिससे आपकी ईएमआई सस्ती हो सकें लेकिन बैंक इसकी इजाजत नहीं देता है। नतीजा आप लोन को किसी ओर बैंक में शिफ्ट करने की सोच सकते हैं।



टॉप अप लोनः हो सकता है कि आपने जिस संपत्ति पर लोन लिया है उसकी वैल्यू मूल कीमत से काफी ज्यादा हो चुकी है। इस आधार पर अगर आप टॉप अप लोन लेना चाहते हैं जो आपकी पैसे की जरुरतों को पूरा कर सके और आपका देनदार इसकी मंजूरी नहीं देता है तो आप नए देनदार को ढ़ूंढ सकते हैं।



सर्विस के मामलेः कई बार आप बैंक द्वारा मुहैया कराई गई सर्विस से खुश नहीं होते हैं और बदलाव चाहते हैं।



कुछ खास बातों का ध्यान रखें



बेहतर होगा कि आप अपने लोन की अवधि के शुरुआती समय में ही लोन स्विच कर लें क्योंकि पहले ही आप ऊंची ब्याज दरों वाले लोन पर काफी खर्च कर चुके हैं।



पिछले कुछ सालों में लोन ट्रांसफर सबसे ज्यादा प्रचलन में आया जब कुछ बैंकों द्वारा टीजर लोन दिए जा रहे थे। हालांकि ये बात भी ख्याल में रखनी चाहिए कि एक समय के बाद टीजर लोन के ऊपर भी ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं।



अपने मौजूदा देनदाता से एक स्टेटमेंट ले लें जो इस बात को निश्चित करता हो कि आपके प्रॉपर्टी दस्तावेज एक समयसीमा के भीतर आपको मिल जाएंगे जिससे लोन शिफ्ट करने के दौरान ज्यादा परेशानी ना हो। याद रखें कि अगर आप लोन रिपेमेंट के मामले में नियमित नहीं हैं तो आपको लोन स्विच करने में परेशानी हो सकती है।