कब निष्पादित करें पावर ऑफ अटर्नी -
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कब निष्पादित करें पावर ऑफ अटर्नी

प्रकाशित Sat, 14, 2011 पर 11:49  |  स्रोत : Moneycontrol.com

14 मई 2011

सीएनबीसी आवाज़



सामान्यत: हम व्यापार में कार्य की अधिकता, देश से बाहर जाने, गंभीर बीमारी या अक्षमता की स्थिति उत्पन्न होने पर ही पावर ऑफ अटार्नी (मुख्‍त्यारनामा) निष्पादित करने की योजना बनाते हैं, परंतु कई बार व्यक्ति गंभीर बीमारी या अक्षमता की स्थिति में पावर ऑफ अटर्नी निष्पादित करने में असमर्थ होता है।



ऐसे में यदि वित्तीय संसाधन परिवार के उस सदस्य के नाम पर है तो परिवार वित्तीय आवश्यकता होने पर भी अपने ही पैसों का इस्तेमाल करने से वंचित रह जाता है। साथ ही दिन-प्रतिदिन के कई महत्वपूर्ण कार्य अटक जाते हैं, जो परिवार के लिए बड़ी मुश्किलें पैदा कर देते हैं, परंतु यदि स्वस्थ एवं सक्षम रहने के दौरान ही पावर ऑफ अटर्नी निष्पादित कर दी जाए तो उपरोक्त परेशानियों से बचा जा सकता है एवं परिवार के सदस्य आवश्यकता होने पर अपने वित्तीय संसाधनों का उचित उपयोग करने में समर्थ रहेंगे।



पावर ऑफ अटर्नी निष्पादित करना बहुत ही आसान है। इससे संबंधित कुछ तथ्‍य निम्न प्रकार हैं -



क्या है पावर ऑफ अटर्नी
यह एक लिखित दस्तावेज होता है, जिसे निष्पादित करने वाला व्यक्ति प्रिंसिपल कहलाता है एवं जिसके पक्ष में निष्पादित किया जाता है वह एजेंट कहलाता है। इनके बीच के संबंध को एजेंसी कहते हैं। इसके तहत प्रिंसिपल एजेंट को अपने कार्यों को निष्पादित करने का अधिकार प्रदत्त करता है एवं एजेंट द्वारा इसकी शर्तों के तहत किया गया कार्य प्रिंसिपल पर बाध्य होता है। एजेंट उसी प्रकार से कार्य कर सकता है जिस प्रकार से प्रिंसिपल।



कितने प्रकार की होती है?
पावर ऑफ अटर्नी जनरल एवं स्पेशल दो प्रकार की होती है।
1. जनरल पावर ऑफ अटर्नी : इसके तहत एजेंट प्रिंसिपल के सभी कार्य करने के लिए अधिकृत होता है।
2. स्पेशल पावर ऑफ अटर्नी - इसके तहत एजेंट किसी स्पेसिफिक (विशिष्ट) कार्य करने के लिए अधिकृत होता है।



किन कार्यों के लिए निष्पादित की जा सकती है?
चल-अचल संपत्ति से संबंधित व्यवहार के लिए, कॉन्ट्रेक्ट या अनुबंध करने के लिए, आयकर रिटर्न या इससे संबंधित व्यवहार के लिए एवं व्यक्तियों आदि से व्यवहार करने के लिए पावर ऑफ अटर्नी निष्पादित की जा सकती है।



किसके हित में निष्पादित करें?
पावर ऑफ अटर्नी के तहत एजेंट की नियुक्ति बहुत ही सावधानीपूर्वक की जानी चाहिए क्योंकि एजेंट द्वारा किए गए कार्य प्रिंसिपल पर बाध्य होते हैं। एजेंट ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया जाना चाहिए, जो विश्वासपात्र होने के साथ-साथ आपके कार्यों को करने में सक्षम हो।



कैसे करें निष्पादन?
सामान्यत: पावर ऑफ अटर्नी का निष्पादन 100 रुपए के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर किया जाता है एवं इसे नोटराइज्ड कराना आवश्यक होता है, परंतु यदि पावर ऑफ अटर्नी मप्र एवं छग में स्थित किसी अचल संपत्ति के हस्तांतरण से संबंधित है तो उसे 1000 रुपए के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पर निष्पादित कराना होता है एवं उसे सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर्ड कराना आवश्यक होता है। इसमें निष्पादित करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर, स्वीकार करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर एवं दो गवाह आवश्यक होते हैं।



वैधता
सामान्यत: इसकी वैधता तब तक होती है, जब तक उसे निरस्त न किया जाए या स्वत: निरस्त न हो जाए, परंतु अचल सं‍पत्ति के हस्तांतरण के संबंध में निष्पादित की गई पावर ऑफ अटर्नी की वैधता एक वर्ष ही होती है।



निरस्तीकरण
प्रिंसिपल द्वारा निरस्त करने पर, प्रिंसिपल की मृत्यु, दिवालिया या पागल होने की स्थिति में, जिस कार्य के लिए पावर ऑफ अटर्नी निष्पादित की गई है, उस कार्य के समाप्त होने पर, प्रिंसिपल एवं एजेंट की सहमति से अथवा एजेंट द्वारा अधिकार त्याग करने पर पावर ऑफ अटर्नी निरस्त हो जाती है।



अत: गंभीर बीमारी अथवा अक्षमता की स्थिति में परिवार को मुश्किलों से बचाने के लिए भी स्वस्थ एवं सक्षम रहने के दौरान ही पावर ऑफ अटर्नी का निष्पादन कर देना चाहिए।



यह लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर उमेश राठी ने लिखा है। umesh.rathi@arihantcapital.com पर उमेश राठी से संपर्क किया जा सकता है।