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फाइनेंशियल प्लानिंग से करें महंगाई का सामना

प्रकाशित Sat, 28, 2011 पर 10:54  |  स्रोत : Moneycontrol.com

28 मई 2011

सीएनबीसी आवाज़



हाल ही में आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने अगरतला में प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि बढ़ती हुई महंगाई एवं ब्याज दर से आम आदमी के जीवन स्तर पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। ऐसे में महंगाई से जूझ रहे आम आदमी के सामने अपनी वर्तमान जरूरतों एवं भविष्य के लिए बचत करने के बीच सामंजस्य बैठाना एक बड़ी चुनौती हो गई है। अब हमारे पास दो ही रास्ते हैं या तो हम सड़कों पर उतर आएँ और महंगाई के खिलाफ आंदोलन करें या फाइनेंशियल प्लानिंग के द्वारा अपने सार्थक प्रयासों से वर्तमान जरूरतों एवं भविष्य के लिए नियमित बचत के बीच सामंजस्य बैठाएँ।

आंदोलन की बात करें तो, पेट्रोल मूल्य वृद्धि के बाद कई राज्यों में जनता ने विभिन्न स्थानों पर चक्काजाम कर अपना विरोध प्रदर्शन किया परंतु सरकार पर इसका कोई असर नजर नहीं आया। अब हमारे सामने केवल एक ही विकल्प है कि हम अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग के बारे में गंभीरता से विचार कर वर्तमान जरूरतों एवं भविष्य के लिए की जाने वाली बचत के बीच सामंजस्य बैठाएँ।

क्या है फाइनेंशियल प्लानिंग
आज 'फाइनेंशियल प्लानिंग' शब्द का प्रयोग महज एक फैशन बनकर रह गया है। इंश्योरेंस, म्युचूअल फंड से लेकर समस्त वित्तीय कंपनियाँ अपने प्रोडक्ट्स को बेचने के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग शब्द का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। फाइनेंशियल प्लानिंग के बारे में काफी भ्रांतियाँ हैं। कुछ लोग इसे महज टैक्स प्लानिंग समझते हैं, कुछ निवेश प्लानिंग, कुछ लोगों का मानना हैं कि फाइनेंशियल प्लानिंग केवल धनवान व्यक्तियों के लिए ही है एवं कुछ लोग मानते हैं कि फाइनेंशियल प्लानिंग केवल नौकरीपेशा लोगों के लिए होती है व्यवसायियों के लिए नहीं।

वास्तव में फाइनेंशियल प्लानिंग एक बहुत ही व्यापक विषय है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति विशेष की परिस्थितियों, आवश्यकता एवं जोखिम-क्षमता को ध्यान में रखकर बजटिंग, रिस्क प्रोफाइलिंग, केश-फ्लो मैनेजमेंट, ऋण प्रबंधन, टैक्स प्लानिंग, निवेश प्लानिंग, रिस्क मैनेजमेंट, इंश्योरेंस प्लानिंग, रिटायरमेंट प्लानिंग एवं एस्टेट प्लानिंग की जाती है। फाइनेंशियल प्लानिंग तैयार करने के लिए आवश्यक वित्तीय निर्णयों को न केवल लघु अवधि बल्कि दीर्घ अवधि के परिणामों का आकलन करके कॉस्ट इफेक्टिव विकल्प चुना जाता है। फाइनेंशियल प्लानिंग हर उन व्यक्तियों के लिए आवश्यक है, जो अपने जीवन के लक्ष्य को पाना चाहते हैं। फाइनेंशियल प्लानिंग से न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य की भी वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सकती है।

महंगाई का सामना करने में कैसे मददगार है फाइनेंशियल प्लानिंग
वैसे तो फाइनेंशियल प्लानिंग बहुत ही व्यापक विषय है एवं यह पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी सभी समस्याओं के निदान में मददगार है परंतु यहाँ हम उन्हीं पहलुओं पर प्रकाश डाल रहे हैं जो महंगाई से संबंधित है। फाइनेंशियल प्लानिंग निम्न प्रकार से महंगाई का सामना करने में मददगार हैः

* अनावश्यक खर्चों पर लगाम : फाइनेंशियल प्लानिंग में बजटिंग के तहत आय-व्यय का पूर्ण लेखा-जोखा तैयार किया जाता है एवं यह आकलन किया जाता है कि किस मद में कितनी राशि खर्च की जा रही है। साथ ही, आवश्यक एवं अनावश्यक खर्चों की सूची बनाई जाती है जो कि अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाने में सहायक होती है।

* लोन एवं ब्याज के भार को कम करने में सहायक : फाइनेंशियल प्लानिंग में ऋण प्रबंधन के तहत ऐसे विभिन्न उपाय किए जाते हैं जिससे लोन एवं ब्याज के भार में कमी की जा सके।

* टैक्स बचत में सहायक : फाइनेंशियल प्लानिंग में टैक्स प्लानिंग के तहत न सिर्फ टैक्स बचत के लिए कॉस्ट इफेक्टिव निवेश साधन पर ध्यान दिया दिया जाता है बल्कि ऐसे उपाय भी किए जाते हैं जिससे विभिन्न मदों जैसे निवेश आदि पर भी टैक्स का भार कम किया जा सके।

* निवेश पर अधिक रिटर्न : रिस्क और रिटर्न एक सिक्के के दो पहलु हैं एवं अधिक रिटर्न वाले साधनों में रिस्क भी अधिक होती है। परंतु फाइनेंशियल प्लानिंग में निवेश प्लानिंग के तहत ऐसे उपाय किए हैं जिससे निवेश पर रिस्क कम हो सके एवं रिटर्न को भी बढ़ाया जा सके।

* इमरजेंसी फंड का प्रबंधन : प्रत्येक व्यक्ति अपने लिए इमरजेंसी फंड बनाकर रखता है ताकि उसे आकस्मिक घटना के समय उपयोग किया जा सके। सामान्यतः हम ऐसा फंड केश में या सेविंग बैंक एकाउंट में रखते हैं जिसमें न के बराबर रिटर्न मिलता है। परंतु फाइनेंशियल प्लानिंग के तहत ऐसे उपाय किए जाते हैं जिससे व्यक्ति को रिटर्न भी मिलता रहे एवं जरूरत पड़ने पर वह पैसों की निकासी भी तुरंत कर सके।

* अनिश्चितता में मददगार : हमारा जीवन अनिश्चितताओं से घिरा हुआ है एवं एक भी अप्रिय घटना हमारे द्वारा की गई बचत को खत्म कर सकती है। फाइनेंशियल प्लानिंग में रिस्क मैनेजमेंट के तहत ऐसे उपाय किए जाते हैं जिससे अनिश्चित घटनाओं के समय हमें आर्थिक मदद मिल सके। इन उपायों में खास बात यह होती है कि यह बहुत ही कम खर्च में किए जा सकते हैं।

* कॉस्ट इफेक्टिव विकल्प : हमें अपने वित्तीय लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभिन्न वित्तीय उत्पादों का सहारा लेना होता है। आज हमारे पास बाजार में विभिन्न विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में हमारे सामने बड़ी चुनौती यह है कि कौनसा उत्पाद हमारी जरूरतों को पूरा करने के साथ सबसे कम लागत पर लिया जा सकता है। फाइनेंशियल प्लानिंग कॉस्ट इफेक्टिव विकल्प को भी चुनने में भी मददगार है।

यदि आप अपने सार्थक प्रयासों से महंगाई का सामना करना चाहते हैं तो आज ही अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए पहल करें। यदि आप स्वयं अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग करने में सक्षम नहीं हैं तो आप सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (सीएफपी) की मदद भी ले सकते हैं।

यह लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर उमेश राठी ने लिखा है।umesh.rathi@arihantcapital.com पर उमेश राठी से संपर्क किया जा सकता है।