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ट्रस्ट से जुड़े टैक्स बचत के फायदे

प्रकाशित Sat, 04, 2011 पर 13:54  |  स्रोत : Moneycontrol.com

4 जून 2011

सीएनबीसी आवाज़



टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया के मुताबिक संपत्ति के मामलों में ज्यादातर लड़ाई-झगड़े सही वसीयत ना होने या बंटवारे के नियमों पर सहमति ना होने के चलते होती है। ऐसे में डिस्क्रीशनरी ट्रस्ट बनाना फायदे का सौदा हो सकता है। एक परिवार के लोग संपत्ति के इच्छानुसार बंटवारे के लिए डिस्क्रीशनरी ट्रस्ट बना सकते हैं। इसमें परिवार की आय या जायदाद, एसेट्स का बंटवारा ट्रस्ट्रीज की इच्छा के मुताबिक हो सकता है।



डिस्क्रीशनरी ट्रस्ट बनाने पर आयकर कानून के मुताबिक 30 फीसदी की दर से आयकर लगता है। हालांकि अगर आप टैक्स बचाना चाहते है तो इसके लिए भी टैक्स गुरु ने कुछ उपाय बताए हैं।



अगर परिवार के किसी सदस्य ने वसीयतनामा के जरिए डिस्क्रीशनरी ट्रस्ट बनाया जाए तो फिर सामान्य आयकर की दर ही लागू होगी। हांलांकि वसीयतनामे के जरिए बनाया गया ट्रस्ट पर आयकर छूट वसीयत बनाने वाले की मृत्य होने के बाद ही लागू हो सकती है।



लिविंग ट्रस्ट के फायदे


टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया के मुताबिक अमरीका में प्रचलित लिविंग टैक्स लिविंग ट्रस्ट के तहत एक व्यक्ति अपनी सभी संपत्ति, जायदाद के लिए खुद का ट्रस्ट बना सकता है। नाबालिग बच्चों के लिए सुरक्षा और टैक्स प्लानिंग की दृष्टि से लिविंग ट्रस्ट बना सकते हैं।



इस ट्रस्ट का कामकाज मैनेजर के पास रहता है और बेनेफिशयरी ओनर को रोज का काम नहीं देखना पड़ता है।



एनडाओमेंट ट्रस्ट और चैरिटेबिल ट्रस्ट


भगवान के नाम पर दान देना चाहते हैं तो एनडाओमेंट ट्रस्ट बना सकते हैं। इस ट्रस्ट की आय पर सामान्य दर से टैक्स लगता है। इसके अलावा गरीबों-जरुरतमंद के लिए दान देना चाहते हैं तो चैरिटेबिल ट्रस्ट बना सकते हैं।



अयकर रिटर्न भरने के फायदे


आयकर रिटर्न भरने की तयसीमा के अंदर हैं और रिटर्न भरना अनिवार्य नहीं तो भी आयकर रिटर्न फाइल कर सकते हैं। इससे बैंक से लोन लेने में सहूलियत रहती है। बैंक लोन देने के समय आयकर रिटर्न के दस्तावेज मांगता है।



अगर केवल एफडी से आय आती है और आयकर की टैक्स सीमा से कम आय है फिर भी रिटर्न भरना चाहते हैं तो बैंक में 15जी फॉर्म भरकर दें। इससे टीडीएस नहीं काटा जाएगा और टैक्स बचत होगी।



उपहार में संपत्ति पर टैक्स बचत


उपहार में प्रॉपर्टी देना चाहते हैं तो गिफ्ट डीड बनाकर सब-रजिस्ट्रार में जमा कराएं। इसके अलावा प्रॉपर्टी की स्टैंप ड्यूटी भी देनी होगी। लेकिन अगर आप वसीयत के जरिए निकट संबंधी को प्रॉपर्टी देते हैं तो इस पर मामूली खर्च आएगा और टैक्स की बचत होगी।



ग्रेच्युटी पर टैक्स बचत

आयकर विभाग के नियम के मुताबिक 24 मई 2010 तक कर्मचारियों की 3.50,000 रुपये तक की ग्रेच्युटी पर टैक्स छूट मिल सकती है। ग्रेच्युटी की रकम इससे ज्यादा होगी तो कुल ग्रेच्युटी से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स देना होगा।


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