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क्रेडिट पॉलिसी का आम आदमी पर असर

प्रकाशित Sat, 11, 2011 पर 14:12  |  स्रोत : Moneycontrol.com

11 जून 2011

बैंक बाजार डॉटकॉम



16 जून को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया क्रेडिट पॉलिसी की समीक्षा करने वाला है। माना जा रहा है कि इस बार भी आरबीआई प्रमुख दरों में कुछ इजाफा अवश्य कर सकता है।



लेकिन आरबीआई के दरें बढ़ाने से आम आदमी पर क्या असर होता है यह जानना काफी जरुरी है। यहां हम आपको बताएंगे कि आरबीआई का बैंकों के लिए रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट बढ़ने से आपकी जेब पर क्या असर पड़ता है।



जमा खातों पर ब्याज दरें बढ़ने का असर

पिछले 8 सालों से सेविंग बैंक अकाउंट (बचत जमा खाते) पर ब्याज की दरें लगभग स्थिर रही है और पिछली क्रेडिट पॉलिसी में आरबीआई ने इसमें बढ़ोतरी की। आरबीआई ने बैंको के लिए बचत खातों पर ब्याज की दरें 3.5 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी कर दी है। इसका अर्थ है कि अपनी बचत को बैंक में रखने पर आपको ज्यादा ब्याज मिल सकता है।



हांलांकि ये कब तक जारी रहेगी ये कहना मुश्किल है क्योंकि रिजर्व बैंक इस तरह के ब्याज दरों को नियंत्रण मुक्त करने पर चर्चा करा रहा है। अगर बचत खातों पर ब्याज दरें नियंत्रण मुक्त हो जाती हैं तो आम आदमी पर इसका अच्छा-बुरा दोनों तरह का असर पड़ सकता है।



रेपो और रिवर्स रेपो में बढ़ोतरी का असर

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जिस दर पर छोटी अवधि के लिए बैंकों को कर्ज देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। जिस दर पर रिजर्व बैंक को बैंकों से कर्ज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट बढ़ाने से बैंको को रिजर्व बैंक से छोटी अवधि के फंड पर बढ़ी दरों पर कर्ज मिलेगा। अंततः बैंक अपनी लागत निकालने के लिए ब्याज दरें बढ़ाकर ग्राहकों पर इसका बोझ डाल सकते हैं।



बैंक रेट और सीआरआर

बैंक रेट (वो रेट जिस पर आरबीआई लंबी अवधि के लिए बैंको को उधार देता है) और कैश रिजर्व रेश्यो (वो दर जिसपर बैंक अपनी कुल जमा और देनदारियों का कुछ फीसदी हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखते हैं)। ये दोनों काफी समय से 6 फीसदी के आसपास ही बरकरार हैं, इसका मतलब है कि आम आदमी कुछ समय के लिए राहत की सांस ले सकता है। बैंक रेट और सीआरआर ना बढ़ने से बैंकों को होमलोन, कार लोन, पर्सनल लोन आदि महंगा करने की जरुरत नहीं होती है।



रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की पिछली क्रेडिट पॉलिसी में कुछ वित्तीय कदम भी उठाए गए हैं जो इस प्रकार हैं-



एनआरआई और पीआईओ के लिए किए गए बदलाव

पिछली क्रेडिट पॉलिसी में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एनआरआई और पीआईओ के लिए विदेशी विनिमय के नियम सरल बनाने पर जोर दिया। इससे एनआरआई और पीआईओ की जटिल नीति से परेशान विदेश में रहने वाले भारतीयों को राहत मिलेगी।



माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को कर्ज लेने पर राहत

आरबीआई ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि बैंक माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को दिए कर्ज पर 26 फीसदी से ज्यादा ब्याज नहीं वसूल सकेंगे। बशर्ते लोन प्रायोरिटी सेक्टर के लिए दिया गया हो। इसके अलावा आरबीआई ने क्वालिफाइड एसेट की एन नई श्रेणी निकाली है जिससे आंध्रा प्रदेश में किसानों की आत्महत्या जैसे हादसे दुबारा ना हो।



नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग

आरबीआई चाहता है कि बैंकों और गैर बैंकिंग कंपनियों का इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर ज्यादा जोर हो सके। मोबाइल के जरिए होने वाले वित्तीय लेन-देन की सीमा में बदलाव किया गया है। एनईएफटी का दायरा बढ़ाने से लेकर क्रेडिट कार्ड इंफ्रास्ट्रक्टर में भी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हो सकता है। जिससे चिप और पिन आधारित क्रेडिट कार्ड जल्ह ही आ सकते हैं।



शहरी को-ऑपरेटिव बैंको के ग्राहकों को भी इंटरनेट से जोड़ने के लिए नई सुविधाएं मुहैया कराने के प्रयास हो रहे हैं।



बैंक बाजार डॉटकॉम पर आप सस्ते लोन की जानकारी ले सकते हैं। विभिन्न लोन की ब्याज दरों के बीच तुलना कर सकते हैं। इसके अलावा भारतीय बैकों और एनबीएफसी से पर्सनल लोन, कार लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन भी कर सकते हैं।



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