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आज से ही करें कल के मेडिकल खर्चों की प्लानिंग

प्रकाशित Sat, 11, 2011 पर 14:21  |  स्रोत : Moneycontrol.com

11 जून 2011


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मैं एक परिवार के बारे में जानता हूं जिन्होंने अच्छी नौकरी और सभी सुख सुविधाओं के बावजूद चिकित्सा सुविधाओं के लिए किसी तरह के प्रबंध नहीं किए। दुर्भाग्यवश जब उनकी 11 साल की बेटी बीमार पड़ी और उसे अस्पताल में भर्ती कराने की जररुत पड़ी तो उस परिवार के पास पर्याप्त रकम नहीं थी। ना तो उन्होंने मेडिकल इंश्योरेंस करवाया था ना ही किसी तरह की मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी।
                            


आप अच्छी तरह जानते हैं कि आपातकालीन स्थिति कभी भी आ सकती है। यह पहले से बताकर नहीं आती हैं। बढ़ती जीवन सीमा के साथ नई बीमारियों की संभावनाएं भी हमारे आसपास खतरे के रूप में मंडराती रहती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए हरेक को मेडिकल इंश्योरेंस कराने के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए।


अलग-अलग आयु वर्ग की अलग जरुरतें


हरेक व्यक्ति के जीवन में डॉक्टर की फीस, पैथोलॉजिकल टेस्ट और दवाइयों के खर्चे जुड़े होते हैं। इसके लिए या तो हम इंश्योरेंस से पैसा जुटा सकते हैं या फिर इसके लिए अपने पास मौजूद पूंजी का इस्तेमाल करना पड़ता है।


अगर आप कामकाजी व्यक्ति हैं और देर रात तक पार्टी करने में यकीन रखते हैं, कम सोते हैं, आपके खाने-पीने की आदतें समय के मुताबिक नहीं हैं तो जाहिर तौर पर आपके बीमार होने की संभावना बढ़ जाती हैं।


वाहन चलाने वाले के लिए पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस होना काफी जरुरी है। हालांकि अगर आप अनुशासित व्यक्ति हैं तो भी आपको अपने बच्चों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस करवाना चाहिए। उन्हें ऐसा सुरक्षा कवच मुहैया कराना तब तक आपकी जिम्मेदारी है जब तक वो स्वंय काबिल नहीं हो जाते हैं।



कंपनी इंश्योरेंस या खुद का इंश्योरेस


हममें से ज्यादातर लोग इस बात पर यकीन रखते हैं कि जिस कंपनी में हम काम करते हैं वो हमारे साथ हमारे परिवार को भी इंश्योरेंस के दायरे में रखती है। हम ये सोचकर निश्चिंत हो सकते हैं बशर्ते जीवन भर हम उसी कंपनी में काम करने का इरादा रखते हों।


अगर किसी कारण आप नौकरी छोड़ते हैं तो आपके ऊपर से कंपनी द्वारा मुहैया कराया गया इंश्योरेंस का कवच भी हट जाता है। इसके अलावा कंपनी द्वारा कराए गए इंश्योरेंस में गंभीर बीमारियों को भी कवर नहीं किया जाता है।


भारत में विभिन्न कंपनियों की मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी में अंतर होता है। कुछ पॉलिसी गंभीर बीमारियों के लिए बिल्कुल भी कवर नहीं करती हैं। वहीं कुछ पॉलिसी के तहत शुरुआती सालों में गंभीर बीमारियों के लिए कवर का प्रावधान नहीं होता है। हम आपको सलाह दे रहे हैं कि आप अपना खुद का मेडिकल इंश्योरेसं कराए जिससे जोखिम कम हो सके। जितनी जल्दी आप मेडिकल इंश्योरेंस कराएंगे उतना ही आपको फायदा होगा।



इंडीविजुअल पॉलिसी लें या फैमिली फ्लोटर


अगर आप खर्च को उठा सकने में सक्षम हैं तो बेहतर यही होगा कि आप परिवार के हर सदस्य के लिए अलग-अलग इंडीविजुअल पॉलिसी लें। इससे आपको ज्यादा कवर तो मिलेगा साथ ही आपका हर पारिवारिक सदस्य पूरी तरह सुरक्षित होगा। आपके अस्पताल में भर्ती होने की सूरत में 5 लाख रुपये तक के कवर की उम्मीद रख सकते हैं।


हालांकि अगर आप कुछ कम पैसा खर्च करना चाहते हैं तो फैमिली फ्लोटर लेना भी बुरा विकल्प नहीं है।


उदाहरणः एक परिवार जिसमें पति और पत्नी हैं और उनके दो बच्चे हैं। पति और पत्नी की आयु 30 साल के करीब है। ऐसे परिवार ने 5 लाख रुपये के कवर का फैमिली फ्लोटर लिया है जिसका सालाना प्रीमियम 7500 रुपये है। इसके हिसाब से अगर आप अस्पताल में भर्ती होते हैं और इलाज पर खर्चा किया जाता है तो पूरे परिवार के 5 लाख के कवर में से राशि कम हो जाएगी। वहीं अगर आपने इंडीविजुअल पॉलिसी ली होती तो एक सदस्य के अस्पताल खर्च के बावजूद बाकि परिवार के मेडिकल कवर में कोई कमी नहीं आएगी।


हालांकि एक बात जरूर ध्यान रखनी चाहिए कि हेल्थ और मेडिक्लेम पॉलिसी से रकम रिंबर्समेंट के रुप में मिलती है और इस रिइंबर्समेंट के लिए भी कुछ खर्च करना पड़ता है।


ये लेख लोवाली नवनखी द्वारा लिखा गया है। लोवाली नवनखी इंटरनेशनल मनी मैटर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर हैं।


 


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