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आपके यूलिप में जुड़ी हैं कई लागतें

प्रकाशित Thu, 03, 2010 पर 15:11  |  स्रोत : Hindi.in.com

अबिता दीपक

यूलिप पालिसी में लगने वाले कई शुल्कों का विश्लेषण हमारे विशेषज्ञों ने किया है। यूलिप खरीदने से पहले इनका अध्ययन कर लीजिए।

मैं 38 साल का हूं। एक करोड़ रुपए के बीमित धन का जीवन बीमा वाला यूलिप खरीदना चाहता हूं। अगर बीमित धन एक करोड़ हो तो किस कंपनी की यूलिप प्रीमियम सबसे कम है?

यूलिप में बीमित धन के लिए कोई निश्चित प्रीमियम नहीं है। आपकी पसंद के बीमित धन में से मोर्टेलिटी शुल्क घटते हैं। आपको फंड मैनेजमेंट शुल्क, प्रशासनिक शुल्क भी चुकाने पड़ते हैं। ये शुल्क आरंभिक वर्ष में आपके प्रीमियम के 40-65 फीसदी हो सकते हैं। एक साल खत्म होने के बाद 5-15 फीसदी हो जाएगा। यह बाकी रकम फंड में निवेश की जाती है।  

उदाहरण के लिए आप यूलिप में 15 साल के लिए दो लाख रुपए लगाते हैं। करीब 15 साल तक 10 फीसदी की दर से प्रतिफल के बाद आप 54 लाख रुपए पाते हैं। शून्य लागत के बाद आपको 70 लाख रुपए मिलेंगे।

नतीजा: यूलिप तभी ज्यादा लाभ देते हैं, जब लंबी अवधि के लिए खरीदे जाएं।

फायदों का ब्योरा लें
हर बीमा कंपनी के पास लाभों का विस्तृत ब्योरा होता है। जिसमें लागत और निवेश किए गए धन का जिक्र होता है। लाभ का यह ब्योरा आपको अन्य कम अवधि की बीमा योजनाओं की प्राथमिक लागत से तुलना करने का मौका देता है। इस तुलना के बाद आप सबसे कम लागत वाले विकल्प को चुन सकते हैं। जब आप यूलिप पालिसी का चुनाव करें, इसमें शामिल लागत और शुल्कों को अच्छी तरह समझ लें।

टिप: पहले कुछ सालों में पालिसी से बाहर नहीं निकलें। अन्यथा आपको नुकसान होगा।  

आमतौर पर लगने वाली लागतें इस प्रकार हैं-
1. प्रीमियम अलोकेटिंग चार्ज
यह लगाए गए धन का एक निश्चित प्रतिशत है, जो एक हिस्सा निवेश करने के पहले ही अलग कर लिया जाता है। यह कुछ यूलिप योजनाओं में 60 फीसदी तक हो सकता है।

2. मोर्टेलिटी शुल्क
इसमें बीमा लागत या जीवन बीमा की प्रीमियम पर शुल्क होता है। यह उम्र, स्वास्थ्य और कवरेज से इस शुल्क का निर्धारण होता है। इस शुल्क का आधार यूलिप के प्रकार पर निर्भर करता है। कई बार यह शुल्क बीमित रकम के एक प्रतिशत के तौर पर होता है। अंतिम स्तर पर यह बीमित धन और कोष मूल्य के अंतर पर तय किया जाता है। कुछ यूलिप में मोर्टेलिटी शुल्क पूरी अवधि के लिए बीमित धन पर लिया जाता है।

3. फंड मैनेजमेंट फीस
यह आपके शुल्क का प्रबंधन करने लिए वसूला जाता है। आपके फंड की कोई नेट असेट वैल्यू आने के पहले ही इसे काट लिया जाता है। यह प्रबंधित संपत्तियों के 1-1.5 फीसदी के बीच हो सकता है।

4. प्रशासनिक शुल्क
यह मासिक आधार पर वसूला जाने वाला शुल्क है अथवा एक निश्चित समय के बाद खास प्रतिशत में बढ़ता जाता है।

5. सरेंडर शुल्क
जब आप पूरे फंड को या आंशिक तौर पर सरेंडर करते हैं तो सरेंडर शुल्क लगाया जाता है।

6. फंड स्विचिंग शुल्क
आपकी पालिसी के हिसाब से जब आप अपना धन इक्विटी या डेट में निवेश करने का विकल्प चुनते हैं, तब यह शुल्क लगता है। आप कुछ बार ही यह स्विचिंग कर सकते हैं। उससे ज्यादा बार करने से अतिरिक्त शुल्क लगता है। यह प्रत्येक स्विच पर 100-150 रुपए हो सकता है।

7. सर्विस टैक्स
जब प्रीमियम से प्राप्त धन का एक भाग निवेश में इस्तेमाल किया जाता है तब सर्विस टैक्स लगता है।

देखते हैं कि चुकाई गई प्रीमियम में से ये शुल्क किस तरह काटे जाते हैं।
महेश ने 7 लाख रुपए के बीमित धन के लिए सालाना प्रीमियम 70,000 रुपए चुकाई। पहले साल में ही उसने 65 फीसदी धन शुल्क में दे दिया। जो करीब 45,000 रुपए था। यह दूसरे और तीसरे साल में 7.5 व 5 फीसदी होगा।
वह 500 रुपए प्रति लाख प्रसासनिक शुल्क के तौर पर चुकाता है, जो सालाना 3,500 रुपए हो जाता है। वह 1,000 रुपए सर्विस टैक्स चुकाता है और 800 रुपए मोर्टेलिटी शुल्क लगता है। यह वास्तविक फंड हैं या निवेश योग्य अतिरिक्त धन हैं जो 70,000 रुपए की प्रीमियम पर 22,000 रुपए लगता है।

प्रशासनिक शुल्क, मोर्टेलिटी शुल्क आदि में बदलाव के कारण यह आंकड़ा बदलता रहता है। जब आप यूलिप चुनें तो सारे खर्चों का हिसाब समग्रता से करें। इस तरह अपने निवेश का सही मूल्य पता करें। जाहिर है कि तीन साल अवधि के लिए यूलिप योजनाएं ठीक नहीं हैं। पालिसीधारक को कोई फायदा नहीं होता।

अबिता दीपक ऑनलाइन BankBazaar.com  में कंटेंट व रिसर्च हैड हैं।