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आपका सीटीसी क्या कहता है

प्रकाशित Thu, 03, 2010 पर 15:22  |  स्रोत : Hindi.in.com

गायत्री माधवन
मुझे आज आजतक अपनी पेस्लिप समझ नहीं आती। यह बात मुझे 25 साल की अवनि रुस्तगी ने कही, जो आईटी कंपनी में डिजाइन के तौर पर काम कर रही है।


ह एक अपार्टमेंट के किराए के रूप में 10,000 रुपए चुकाती है, लेकिन जब आप उससे पूछेंगे कि वह दूसरे खर्च कैसे पूरे करती है तो वह कहेगी, “संख्याओं से मुझे डर लगता है, मुझे वित्तीय गणित बिलकुल नहीं मालूम।”

अवनि बताती है, “मुझे अपने वेतन की संरचना या सीटीसी बिलकुल समझ नहीं आता कि मुझे इतना मिलता है और हाथ में कितना आता है।
हमें समझ आया कि अवनि की समस्या ज्यादातर लोगों की समस्या है। सीटीसी से अपने घर ले जाई जाने वाली रकम को लेकर हर कोई भ्रमित रहता है। पता करते हैं कि आखिर इस प्रक्रिया में होता क्या है?

सीटीसी क्या है?
सीटीसी वह लागत है, जो एक कंपनी आपको नियुक्त करने पर खर्च करती है। आपको काम पर रखने के लिए वेतन व अन्य लागत इसमें शामिल होते हैं। अब देखते हैं कि अवनि की कॉस्ट टू कंपनी (सीटीसी) क्या हैः
विवरण     रु (सालाना)
बुनियादी वेतन    480,000
डीयरनेस एलाउंस     48,000
मनोरंजन भत्ता    12,000
हाउसरेंट एलाउंस     96,000
कनवेंस एलाउंस     12,000
ओवरटाइम एलाउंस     12,000
मेडिकल रीइंबर्समेंट    15,000
     
ग्रास सेलरी    675,000
प्राविडेंट फंड में कंपनी का योगदान    57,600
      
सालाना सीटीसी     732,600
मासिक सीटीसी     61050

अवनि के वेतन का पैकेज पारदर्शी है। हर कंपनी का सीटीसी मापने का अपना पैमाना है। कंपनियां आकर्षक सीटीसी का प्रस्ताव देती हैं, लेकिन अंतिम रूप से बचने वाला वेतन (टेक होम) काफी कम हो सकता है। सीटीसी में कुछ घटक इस प्रकार इस्तेमाल किए जाते हैं :

1. आईटी कंपनियां अक्सर प्रशिक्षण की लागत सीटीसी में जोड़ लेती हैं। ये सारी लागतें कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने में कंपनी पर आती हैं। इसलिए ये खर्च टेक होम के रूप में नहीं आते। 
2. बैंक भी ब्याज पर सब्सिडी को सीटीसी में जोड़ते हैं। अगर आप बैंक कर्मचारी हैं तो आपको लोन पर कम ब्याज देना पड़ता है।
3. बोनस भी सीटीसी का हिस्सा होते हैं। ये बदलते रहते हैं। आपके कामकाज के आधार पर आपको प्रतिशत के रूप में बोनस मिलता है।
4. कंपनियों के ग्रुप मेडिकल या जीवन बीमा की लागत भी सीटीसी में जुड़ी होती है। कुछ कंपनियां फूड सब्सिडी को भी सीटीसी में जोड़ती हैं, जो कैंटीन के सस्ते भोजन में मिलती है।
5. कुछ कंपनियां सीटीसी में ग्रेच्युटी जोड़ती हैं। ग्रेच्युटी एक किस्म का बोनस है, जो आपको रिटायर होने या इस्तीफा देने के बाद मिलता है। किसी कंपनी में पांच साल पूरे करने के बाद ही ग्रेच्युटी मिलती है।

सीटीसी और टेक होम में क्या अंतर है?
सीटीसी और टेक होम में अंतर है। आपकी टेक होम हमेशा सीटीसी से कम रहेगी।
1. टैक्स देनदारी 
कंपनी आपके टैक्स की गणना करती है और हर माह आपके सीटीसी से घटाती है। इसमें आयकर और प्रोफेशनल टैक्स शामिल होते हैं।
2. पीएफ में योगदान
प्राविडेंट फंड के दो पक्ष हैं। नियोक्ता का योगदान और कर्मचारी का योगदान। नियोक्ता का योगदान सीटीसी में शामिल होता है, क्योंकि यह लागत कंपनी पर आपको रखने में आती है। यह बेसिक वेतन की 12 फीसदी होती है। यह आपको हर महीने नहीं दिया जाता। यह पीएफ खाते में जमा हो जाता है और जब आप इस्तीफा देते हैं या रिटायर होते हैं, तब आपके खाते में जमा हो जाता है।

पीएफ में कर्मचारी का योगदान भी होता है। यह रकम आपके मासिक वेतन से काटी जाती है और पीएफ खाते में जमा की जाती है।

अब देखते हैं कि अवनि का सीटीसी कैसे टेक होम बना
चरण 1: टैक्स की गणना करें :

विवरण     कर योग्य आय

बुनियादी वेतन    480,000 (1)
डीयरनेस एलाउंस    48,000 (2)
मनोरंजन भत्ता    12,000 (3)
एचआरए    52,800 (4)
कनवेंस    2,400 (5)
ओवरटाइम एलाउंस    12,000 (6)
मेडिकल रीइंबर्समेंट    निल (7)
      
सकल कर योग्य वेतन    607,200
टैक्स    86,685 (8)
      
नेट सालाना वेतन    205,155
नेट मासिक वेतन     43,376


टैक्स की गणना पर नोट्स:

1. बेसिक वेतन पूरी तरह सेक्शन 17 के तहत कर योग्य है। अवनि के मामले में 40,000 रुपए की रकम कर योग्य है।
2. आपका डीयरनेस एलाउंस और ओवरटाइम एलाउंस पूरी तरह कर योग्य है।
3. मनोरंजन भत्ते की कर देयता कंपनी की नीति पर निर्भर है। अवनि के मामले में यह पूरी तरह कर योग्य है। कुछ कंपनियों में मनोरंजन भत्ता बिल दाखिल करने पर टैक्स से मुक्त हैं।
4. मकान किराया (एचआरए) की छूट तभी मिलती है जब आप किराए के मकान में रह रहे हों। अवनि के मामले में एचआरए इस प्रकार होगा :
तीन राशियां कर से मुक्त होंगी :
सेलरी पैकेज में वास्तविक एचआरए भत्ता, जो 96,000 रुपए है।
या
एचआरए वेतन व डीए के दस फीसदी कम जो है 43,200 (96,000 – 10% of 528,000)
या
अगर आप मेट्रोपोलिटन (दिल्ली, चेन्नई, मुंबई और कोलकाता) में रहते हैं, तो वेतन व डीए का 50 फीसदी। अगर आप अन्य शहरों में रहते हैं तो यह वेतन व डीए का 40 फीसदी होगा।
अवनि के मामले में यह 2,11,200 (यानी 528,000 का 40 फीसदी) है।

तीनों में सबसे कम रकम 43,200 रुपए है जिस पर छूट मिलेगी। यानी वास्तविक कर योग्य रकम 96,000 रु – 43,200 रुपए = 52,800 रुपए होगी।

5. वाहन भत्ता (कनवेंस) 9000 रुपए प्रति वर्ष है, जिसे टैक्स से छूट प्राप्त है। अवनि के मामले में यह 2,400 रुपए है। जिस पर टैक्स लगेगा। कुछ कंपनियों में बैलेंस दफ्तर के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जाता है।

6. ओवरटाइम एलाउंस पूरी तरह कर योग्य है।

7. मेडिकल रीइंबर्समेंट में पर्याप्त बिल लगाए जाते हैं, तो सालाना 15,000 रुपए की छूट मिलती है। अवनि अधिकतम 15,000 रुपए तक के बिल दे सकती है। अब आपको 20,000 रुपए तक की छूट है लेकिन बिल आप 15,000 रुपए के देते हैं तो आपको 5,000 रुपए पर टैक्स लगेगा।

अन्य एलाउंस और रीइंबर्समेंट में खाने के कूपन, फोन, किताबें और पत्र-पत्रिकाएं शामिल हैं। यह कंपनी की पालिसी पर निर्भर है।
8. अवनि ज्यादा टैक्स के ब्रैकेट में आती है। इसमें एजुकेशन सेस भी शामिल है। अगर वह एक लाख रुपए तक की सीमा तक निवेश करती है तो उसकी कर देयता 55,785 रुपए रह जाती है।


चरण 2: प्राविडेंट फंड और प्रोफेशनल टैक्स काटें
सीटीसी में से नियोक्ता का पीएफ में योगदान टेकहोम में शामिल नहीं होता। अवनि का योगदान काटा जाएगा।

अवनि का मासिक वेतन होगा :
नेट मासिक वेतन (आयकर के बाद)  43376 रुपए
लेस अवनि का प्राविडेंट फंड में योगदान 4,800 रुपए 
लेस प्रोफेशनल टैक्स 200 रुपए 

मासिक टेक होम  38,376 रुपए

जब अवनि का मासिक सीटीी 61,050 रुपए था, उसकी टेक होम सेलरी थी केवल 38, 376 रुपए

अवनि अपनी टेक होम कैसे बढ़ा सकती है?
अवनि अपने टैक्स की योजना बनाकर टेकहोम बढ़ा सकती है। अगर अवनि एक लाख रुपए (सेक्शन 80 सी के तहत) पीपीएफ, ईएलएसएस आदि में निवेश करती है तो उसकी सालाना टैक्स देयता घटकर हो जाएगी 55,785 रुपए। 
सकल कर योग्य वेतन     607,200
टैक्स    55,785
      
नेट सालाना वेतन     551,415
नेट मासिक वेतन     45,951
      
(लैस) पीएफ योगदान    4,800
(लैस) प्रोफेशनल टैक्स    200
      
मासिक टेक होम    40,951

जब अवनि नौकरी में बदलाव करे तो उसे दिए गए प्रस्ताव पर कुछ समय लगाना चाहिए कि आखिर उसके सीटीसी का मतलब क्या है।