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मिश्र ब्याज की ताकत

प्रकाशित Thu, जून 03, 2010 पर 14:47  |  स्रोत : Hindi.in.com

पहला सिद्धांत: साधारण ब्याज जैसा कुछ नहीं
मिश्र ब्याज प्रतिफल (कंपाउंडिंग) का मतलब है कि आपकी आय का समान दर से फिर निवेश। साल दर साल मूलधन का बढ़ना। आपका ब्याज भी मूलधन बनता जाता है। क्यूमुलेटिव फिक्स्ड डिपाजिट इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। आपको उस अवधि के लिए जितना ब्याज मिलता है, वह वास्तव में जमा अवधि के लिए निर्धारित दर से वसूले जाने वाले ब्याज से ज्यादा है।

आपने धन उधार लेने वालों (बैंक, वित्त कंपनियों, मैन्युफैक्चरिंग कंपिनयों) के विज्ञापन देखे होंगे, जो वास्तव में मौजूदा ब्याज दरों से काफी ज्यादा प्रतिफल देने की बात करते हैं। ये विज्ञापन अक्सर भ्रामक होते हैं। विज्ञापनदाता तो उस साधारण ब्याज दर की बात कर रहा है, जो आप निवेश की अवधि के दौरान कमाने वाले हैं।

दूसरा सिद्धांतः छोटी रेट से बड़ा फर्क
आपकी प्रतिफल की दर 12 फीसदी है या 14 फीसदी, क्या आप इसकी चिंता करते हैं? सचाई यह है कि अगर आप इस अंतर पर ध्यान दें तो लंबी अवधि में आपकी दौलत में बड़ा फर्क आ जाएगा। मिश्र ब्याज का फायदा यह है कि आमदनी लगातार बढ़ती है तो मूलधन बढ़ता है और ज्यादा प्रतिफल देता है। प्रतिफल की ज्यादा दर या लंबी अवधि के निवेश के कारण मूलधन ज्यामितीय अनुपात में बढ़ता जाता है।

नीचे एक टेबल बताती है कि 100 रुपए का निवेश अलग-अलग दर से कैसे बढ़ता है। बैंक के बचत खाते में धन डालने का मतलब है कि 5 फीसदी की दर। एक साल के बैंक डिपाजिट पर आप दस फीसदी की दर की उम्मीद कर सकते हैं। थोड़े ज्यादा जोखिम वाली कंपनी में आप 15 फीसदी की दर से निवेश की अपेक्षा कर सकते हैं। अगर आप शेयरों में निवेश करें तो दर 20 फीसदी की हो सकती है।

मिश्र ब्याज का असर
नीचे बनी टेबल का इस्तेमाल कीजिए। मिश्र ब्याज की ताकत का हिसाब देखिए।
साल का अंत    5%    10%     15%     20%
1                रु105    रु110    115    120
5                रु128    रु161    201     249
10              रु163    रु259    405    619
15              रु208    418    814    1541
25              रु339    1,083    3,292    9,540

आप इस टेबल से एक नतीजे पर तो पहुंच ही गए होंगे। इसे समझने के लिए आप मिश्र ब्याज का कैल्कुलेटर इस्तेमाल कर सकते हैं।

यह समय और धन की बर्बादी है कि आप अपने पैसे को लंबे समय तक कम प्रतिफल पर लगाए रखें। मिश्र ब्याज आय के लिहाज से समय सबसे बड़ी चीज है। कम अवधि में प्रतिफल उतना ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। लंबी अवधि के लिहाज से दस साल या ज्यादा समय में अंतर इतना ज्यादा होता है कि प्रतिफल को आप अनदेखा नहीं कर सकते।
जब आप धन उधार लेने जाएं तो याद रखें कि मिश्र ब्याज का गणित आपके खिलाफ काम कर रहा है। मिश्र ब्याज के कर्ज का हिसाब लगा लें। जब भी आप क्रेडिट कार्ड के बकाया का भुगतान करने जाते हैं आप हर माह न केवल दो फीसदी ब्याज का भुगतान कर रहे हैं बल्कि आप 26.8 फीसदी सालाना भुगतान कर रहे हैं।

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पोस्ट करनेवाले: Guestपर: 13:37, जुलाई 17, 2014

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पोस्ट करनेवाले: MMB Messengerपर: 13:37, जुलाई 17, 2014

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