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रिटायरमेंट के लिए कहां करें निवेश?

प्रकाशित Thu, 03, 2010 पर 15:30  |  स्रोत : Hindi.in.com

लोवाई नवलखी
जो भी कहता है d उपभोक्ता के लिए विभिन्नता फायदेमंद है, उसे बाजार की जानकारी कम है। ज्यादा विकल्प होने से उपभोक्ता चुनाव की समस्या से घिर जाता है। क्या रिटायरमेंट की योजना में यही हो रहा है?
कई कारण हैं कि रिटायरमेंट की योजना इतनी जरूरी हो गई हैः लंबा जीवनकाल, मेडिकल कास्ट में इजाफा, मुद्रास्फीति आदि।

कौन से विकल्प उपलब्ध हैं?

इक्विटी: रिटायरमेंट की वित्तीय योजना के बारे में आमतौर पर शेयरों को नहीं चुना जाता है। अगर आप शेयरों में निवेश जल्दी शुरू करते हैं तो आपके निवेश में ज्यादा फायदा हो सकता है।

बीमा: रिटायरमेंट की योजना में बीमा काफी लोकप्रिय है। विशेषज्ञों की राय में इसे जोखिम कवर की तरह देखना चाहिए। निवेश की तरह नहीं।
प्राविडेंट फंड और पीपीएफ : सर्वकालिक तौर पर पसंदीदा विकल्प। हमारे पुरखों का मानना था कि इन योजनाओं में जोखिम कम है।
फिक्स्ड डिपाजिट: सुरिक्षत, लेकिन मुद्रास्फीति के कारण कमजोर प्रतिफल।
म्यूचुअल फंड्स:  काफी लोग निवेश करते हैं। विशेषज्ञों की सलाह का फायदा मिल जाता है।

प्रापर्टी : लंबी अवधि में लगातार लाभ देने वाली संपत्ति। खासतौर से रीयल एस्टेट में तेजी को देखते हुए। तरलता की समस्या। हर किसी के पास इतना ज्यादा धन निवेश के लिए नहीं होता।
फिर आपके विकल्प क्या हैं?

आप्शन 1. पेंशन प्लान

रिटायरमेंट के लिए आदर्श विकल्प है। आपके पोर्टफोलियो में डेट निवेश कुशन का काम करता है और विविधीकरण करता है। इसके फायदे हैं :

i. अगर आप एक लाख रुपए तक इन फंडों में लगाते हैं तो आपको कर योग्य आय में कटौती का लाभ मिलता है। आपकी कर योग्य आय में कमी आती है और आप कम टैक्स चुकाते हैं।

iii. रिटायर होने के बाद आप एक तिहाई धन निकाल सकते हैं जो कर मुक्त होता है। बाकी धन आपके एनुटी प्लान में लगाया जाता है। इससे आप तिमाही या मासिक आमदनी का विकल्प चुन सकते हैं।

विकल्प 2: यूनिट लिंक्ड पेंशन प्लान

अगर आप थोड़ा सा जोखिम लेने को तैयार हों तो ये अच्छी योजनाएं हैं। कुछ विकल्पों पर आप जा सकते हैं :

i. आप आक्रामक इक्विटी स्कीम में निवेश कर सकते हैं।
ii. आप जरूरत के मुताबिक विभिन्न स्कीमों में धन लगा सकते हैं (जिनमें डेट से लेकर इक्विटी व अन्य शामिल हैं) स्विच करने में कैपिटल गेन टैक्स पर छूट मिलती है। ट्रांजैक्शन फीस भी नहीं लगती। (कुछ कंपनियां चार्ज लेती हैं।)
iii. म्यूचुअल फंडों के विपरीत आप एंट्री लोड से दूर रह सकते हैं।
ये कुछ विकल्प हैं। डेट, बांड, डिबेंचर, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट्स भी उपलब्ध हैं। यह इस पर निर्भर करता है कि आप कैसे निवेश करना चाहते हैं और कितना जोखिम लेना चाहते हैं।
टिपः मिश्रित विकल्प अपनाएं बेहतर प्रतिफल मिलेगा।