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कब फाइल करना होगा इनकम टैक्स रिटर्न!

प्रकाशित Sat, 18, 2011 पर 14:35  |  स्रोत : Moneycontrol.com

18 जून 2011



hindimoneycontrol.com



रिटर्न फाइल करने का भार कम करने के उद्देश्य से कर निर्धारण वर्ष 2011-12 से एन्युअल इन्फॉरमेंशन रिपोर्ट (एआईआर) के अंतर्गत आने वाले व्यवहारों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।



इसका लाभ उन लाखों लोगों को मिलेगा, जिनकी आय बेसिक एक्जेम्पशन लिमिट से कम है, परंतु उन्हें एआईआर के दायरे में आने के कारण रिटर्न फाइल करना अनिवार्य होता था। कर निर्धारण वर्ष 2011-12 के सभी रिटर्न फार्म में से एमआईआर के तहत मांगी जाने वाली जानकारियों को हटा दिया गया है।



कर निर्धारण वर्ष 2010-11 तक व्यक्ति की आय बेसिक एक्जेम्पशन से अधिक नहीं होने पर भी एआईआर के अंतर्गत आने वाले निम्न व्यवहारों के लिए रिटर्न फाइल करना अनिवार्य होता था



*बैंकिंग रेग्यूलेशन एक्ट 1949 (10 ऑफ 1949), जिसमें कोई भी बैंक या बैंकिंग संस्था (जो इस एक्ट की धारा 51 के तहत हो) के बचत खाते में वित्तीय वर्ष में दस लाख रुपए या अधिक राशि जमा करने की स्थिति में।



*वित्तीय वर्ष में क्रेडिट कार्ड के बिल के तहत दो लाख रुपये या अधिक का भुगतान करने की स्थिति में।



*वित्तीय वर्ष में दो लाख रुपये या उससे अधिक के म्‍युचुअल फंड की खरीदी के भुगतान की स्थिति में।



*वित्तीय वर्ष एक लाख रुपये या उससे अधिक कंपनी के शेयरों की खरीदी के भुगतान की स्थिति में।



*वित्तीय वर्ष में किसी कंपनी या संस्था के पांच लाख रुपये या उससे अधिक के बांड या डिबेंचर की खरीदी के भुगतान की स्थिति में।



*तीन लाख रुपये या इससे अधिक की किसी प्रॉपर्टी की खरीदी की स्थिति में।



*तीन लाख रुपये या इससे अधिक की किसी प्रॉपर्टी की विक्रय की स्थिति में।



*रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए बांड पांच लाख रुपये या इससे अधिक की खरीदी के भुगतान की स्थिति में।



एआईआर के अंतर्गत आने वाले व्यवहारों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अनिवार्यता समाप्त करने के बाद व्यक्तिगत एवं एचयूएफ करदाताओं को निम्न परिस्थितियों में रिटर्न फाइल करना अनिवार्य है- 



*बेसिक एक्जेम्पशन से अधिक आय पर- व्यक्तिगत/एचयूएफ करदाता, जिनकी आय बेसिक एक्जेम्पशन लिमिट से अधिक हो तो उन्हें रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य होता है। बेसिक एक्जेम्पशन से अधिक आय की गणना में धारा 10 ए, 10 बी, 10 बीए और धारा 80 सी-80 यू तक की छूट नहीं घटाई जाती है। वित्तीय वर्ष 2010-11 कर निर्धारण वर्ष 2011-12 में व्यक्तिगत एवं एचयूएफ करदाताओं के लिए बेसिक एक्जेम्पशन निम्न प्रकार है-



पुरुष करदाता : (65 वर्ष से कम) रुपये 1,60,000
महिला करदाता : (65 वर्ष से कम) रुपये 1,90,000
सीनियर सिटीजन : (65 वर्ष से अधिक) रुपये 2,40,000
एचयूएफ : रुपये 1,60,000



*हानि को आगामी वर्षों में समायोजन किए जाने की स्थिति में- वैसे तो व्यक्तिगत एवं एचयूएफ करदाता के लिए हानि की दशा में रिटर्न फाइल करना अनिवार्य नहीं होता है, परंतु यदि हानि को आगामी वर्षों में समायोजन किया जाना हो तो रिटर्न नियत तिथि या इसके पूर्व फाइल किया जाना अनिवार्य है अन्यथा हानि का समायोजन आगामी वर्षों में नहीं किया जा सकेगा।



*विशिष्ट धाराओं के तहत छूट प्राप्त करने की दशा में- यदि धारा 10 ए, 10 बी, 80 आईए, 80 आईएबी, 80 आईबी और 80 आईसी के तहत छूट प्राप्त की जाना हो तो रिटर्न नियत तिथि के पूर्व फाइल करना अनिवार्य है अन्यथा उक्त धाराओं के तहत छूट प्राप्त नहीं की जा सकेगी।



*रिफंड क्लेम करने की दशा में- यदि आपकी डीडीए कटौती हुई है एवं आपका टैक्स रिफंड लेना निकलता है तो रिफंड क्लेम करने के लिए भी रिटर्न फाइल करना अनिवार्य है।



रिटर्न फाइल करने की नियत तिथि : व्यक्तिगत एवं एचयूएफ करदाता, जो ऑडिट की श्रेणी में नहीं आते हैं, के लिए रिटर्न फाइल करने की नियत तिथि 31 जुलाई है एवं जो ऑडिट के दायरे में आते हैं, वे अपना रिटर्न 30 सितंबर तक फाइल कर सकते हैं।



व्यक्तिगत एवं एचयूएफ करदाता को कब करना होगा ऑडिट : कर निर्धारण वर्ष 2011-12 से व्यक्तिगत एवं एचयूएफ करदाताओं को वित्तीय वर्ष 2010-11 में रुपए 60 लाख से अधिक टर्न ओवर करने की दशा में या प्रोफेशन से रुपए 15 लाख से अधिक सकल प्राप्ति की दशा में अपने खाते अनिवार्य रूप से ऑडिट कराने होंगे।



यह लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर उमेश राठी ने लिखा है। umesh.rathi@arihantcapital.com पर उमेश राठी से संपर्क किया जा सकता है।