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पर्सनल लोन लेने से पहले ध्यान रखें

प्रकाशित Sat, 09, 2011 पर 15:00  |  स्रोत : Moneycontrol.com

9 जुलाई 2011

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पर्सनल लोन लेने का फैसला सोच समझकर करना चाहिए क्योंकि इन लोन की ब्याज दरें काफी ऊंची होती हैं। इसलिए आपको सलाह दी जाती है कि पर्सनल लोन उन्हीं हालातों में लें अगर-



आपके पास लोन लेने के लिए कोई ऐसेट या सिक्योरिटी ना हो, उदाहरण के लिए अगर आपके पास कोई ऐसी प्रॉपर्टी है जिसपर होम लोन नहीं लिया गया हो तो इसका उपयोग कर्ज लेने के लिए किया जा सकता है।



अगर आपके पास पूंजी की कमी नहीं है और आपको भरोसा है कि आप ईएमआई समय पर चुका सकते हैं, वर्ना आप कर्ज के जाल में फंसते चले जा सकते हैं।



अगर कोई आपात स्थिति है और आपको अचानक पैसे की जरूरत है। ऐसे हालात में पर्सनल लोन लिया जा सकता है क्योंकि इसमें कम समय लगता है और दस्तावेजी प्रकिया भी छोटी होती है।



पर्सनल लोन का विकल्प उसी हालत में लें अगर आपकी जरूरतें इंतजार नहीं कर सकती हैं। अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के लिए पर्सनल लोन लेना आखिरी पसंद होनी चाहिए। जुआ खेलना, नई कार खरीदना आदि शौक के लिए पर्सनल लोन लेना भारी पड़ सकता है।



आपके लोन की लागत निकालने के प्रमुख तथ्य

पर्सनल लोन की ब्याज दर सिर्फ मूल राशि पर निर्भर नहीं होती है। कई अन्य शुल्क लोन की लागत को बढ़ा सकती हैं। इसलिए सिर्फ अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों को पैमाना मानकर पर्सनल लोन की तुलना ना करें।



ऐसे कुछ अतिरिक्त शुल्कों के बारे में यहां पढ़ें-


1.प्रोसेसिंग फीस-
लोन की प्रक्रिया पूरी करने और कर्ज की अर्जी के लिए कर्जधारक से प्रोसेसिंग फीस ली जाती है। सामान्यतया लोन अमाउंट का 1-2 फीसदी इस मद में शुल्क के रूप में लिया जाता है। लोन लेने के समय अर्जी देते समय इस शुल्क को अदा करना होता है।



2. प्री-पेमेंट शुल्क- अगर ईएमआई लोन टेन्योर के समय से पहले चुका दी जाती हैं तो बैंक इसके लिए लेनदार से प्री-पेमेंट फीस वसूल सकते हैं। अमूमन ये फीस बचे हुए लोन का 2-5 फीसदी के बीच होती है। अधिकांशतया प्री-पेमेंट फीस उसी सूरत में वसूली जाती है अगर लोन की लागत का कुछ निश्चित हिस्सा बचा हो।



3.विलंब पेमेंट पेनेल्टीः
अगर आप अपनी मासिक ईएमआई चुकाने में देरी करते हैं तो बैंक ईएमआई के साथ लेट फीस भी वसूल सकते हैं। ये भी मुख्य तौर पर ईएमआई के 2 से 5 फीसदी के बीच होती है।



4. चैक बाउंस शुल्कः अगर आपने ईएमआई के रूप में कुछ चैक दिए और आपका चैक बाउंस हो गया तो आपको इसके लिए भी कुछ फीस देनी पड़ सकती है। आपको चैक बाउंस के लिए पेनेल्टी चुकानी पड़ सकती है। ये शुल्क 250-500 रुपये के बीच हो सकता है।



5. डॉक्यूमेंटेशन चार्जः लोन देने के लिए लेनदार के दस्तावेज को सत्यापित कराने की जरूरत पड़ती है। ज्यादतर बैंक इसके लिए किसी थर्ड-पार्टी वेंडर के जरिए ये काम कराते हैं। सामान्यतया इसके लिए चार्ज 500-1000 रुपये के बीच हो सकता है।



सबसे बेहतर पर्सनल लोन ऑफर को कैसे चुनें-



एक ऐसा पर्सनल लोन चुनना जो आपको सबसे ज्यादा फायदा दे सके, इसके लिए आपको निम्न बातों का ध्यान रखना जरूरी है-



1. ब्याज दरः ये रेट अलग अलग बैंकों में अलग अलग हो सकता है। विभिन्न बैंक आपके रिस्क प्रोफाइल( जोखिम उठाने की क्षमता) के आधार पर इस रेट को तय करते हैं।



2. अन्य चार्जः जैसे कि पहले बताया जा चुका है कि अलग-अलग बैंक विभिन्न शुल्क वसूलते हैं जिनसे आपके लोन की कुल लागत बढ़ जाती है। इसलिए सिर्फ सस्ती ब्याज दर के आधार पर लोन की लागत का फैसला ना करें। लोन की कुल लागत देखने के बाद ही फैसला करें।



3. लोन की राशिः
आपको देखना होगा कि बैंक जितना लोन दे रहा है वह आपकी जरूरत को पूरा करने के लिए काफी है कि नहीं।



4. लोन टेन्योर और ईएमआईः अगर छोटी अवधि के लिए लोन लिया है तो जाहित तौर पर ईएमआई ज्यादा होगी। तो अगर आपको लगता है कि आप ऊंची ईएमआई का भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं तो इससे भी आपके लोन लेने के फैसले पर असर पड़ सकता है।



अतः किसी भी बैंक से पर्सनल लोन लेने से पहले इन सभी तथ्यों का ख्याल रखें तो आपको सहूलियत होगी।



आप पर्सनल लोन पर सबसे अच्छा ब्याज दर कैसे हासिल कर सकते हैं-

•अपने क्रेडिट स्कोर का ख्याल रखें- अपने पर्सनल लोन के लिए आपको सबसे सस्ती ब्याज दरें मिलें, इसके लिए आपको क्रेडिट हिस्ट्री सही होनी चाहिए। क्रेडिट रेटिंग सिबिल क्रेडिट हिस्ट्री का रिकॉर्ड रखती है जिसके जरिए आपका क्रेडिट स्कोर रखा जाता है। इसकी जानकारी बैंकों के साथ बांटी जाती है। क्रेडिट स्कोर ही वो चाबी है जिससे आपके लोन की ब्याज दर निर्धारित होती है। बैंक इसके आधार पर फैसला करते हैं कि आपको सबसे पहले लोन दिया जाए या नहीं। अगर आपका पिछला रिपेमेंट रिकॉर्ड अच्छा है तो ना सिर्फ आपको लोन जल्दी मिलेगा बल्कि निचली ब्याज दरों पर भी मिलेगा।


•बैंक के साथ अपनी मौजूदा रिश्तों का इस्तेमाल करें-
ज्यादातर बैंक उन ग्राहकों को अतिरिक्त फायदे देते हैं जो उनके साथ नियमित तौर पर बने रहते हैं। अतः अगर आप बैंक के नियमित ग्राहक हैं तो हो सकता है कि बैंक आपके लोन की प्रोसेसिंग फीस माफ कर दे, आपका डॉक्यूमेंटेशेन चार्ज ना वसूले या फिर आपको बेहतर ब्याज दरें मुहैया कराए।



अगर आप पर्सनल लोन की ईएमआई नहीं चुका पा रहे हैं तो आपको क्या करना चाहिए?



पर्सनल लोन (जो एक अन्सिक्योर्ड लोन है) को सिक्योर्ड लोन में कन्वर्ट करवा लें। इसके लिए आपको घर, गाड़ी और म्यूचुअल फंड का इस्तेमाल गारंटी के रूप में करना पडे़गा। इसके अलावा आरबीआई बॉण्ड और गोल्ड ईटीएफ, बैंक फंड का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। आप अपनी ईएमआई को इस स्तर तक पर ले आएं जो राशि चुकाना आपके लिए भारी बोझ ना हो।



अगर अभी भी आपको लगता है कि इससे आप पर्सनल लोन की ईएमआई चुकाने में सक्षम नहीं है तो आपको अपने ऐसेट गिरवी रखकर कुछ लोन लेना चाहिए और इस पैसे का इस्तेमाल पर्सनल लोन को चुकाने में कर सकते हैं