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आप कितनी ईएमआई का भार उठा सकते हैं?

प्रकाशित Sat, 09, 2011 पर 14:49  |  स्रोत : Moneycontrol.com

9 जुलाई 2011

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अपने घर खरीदने के सपने, कार खरीदने के लिए व्यक्ति को कुछ अतिरिक्त मदद की जरूरत होती है। ये मदद बैंक से लोन के रूप में मिल सकती है। बदलते समय में बढ़ती ब्याज दरों के चलते आपको लोन से जुड़ी जानकारी लेना बहुत जरूरी है।



लोन लेने की प्रक्रिया से जड़े अहम तथ्यों को जानने के बाद आप बेहतर फैसला कर सकते हैं। इससे आपको मासिक बजट और लोन रिपेमेंट की प्लानिंग करने में आसानी होगी।



ईएमआई क्या है?

इक्वेटेड मंथली इन्स्टालमेंट (ईएमआई) वो राशि है जो कर्ज के बदले देनदार को हर महीने दी जाती है। ये दो भाग में बांटी जाती है। मूल राशि और लोन के कुल टेन्योर के दौरान लगने वाले ब्याज के रूप में हर महीने दी जाने वाली राशि।



तब तक लोन टेन्योर पूरा नहीं हो जाता और कर्ज खत्म नहीं हो जाता है तब तक बैंक को हमेशा हर महीने तयशुदा तिथि से पहले ईएमआई दी जाती है।



आप ये मान सकते हैं कि आपका ब्याज और मूल राशि को हर महीने दी जाने वाले राशि में बराबर भाग में बांटा जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है। कर्ज लेने के शुरुआती कुछ महीने तक ब्याज की राशि अधिक वसूली जाती है जबकि लोन टेन्योर खत्म होने के निकट समय में मूल राशि ज्यादा वसूली जाती है।



इसलिए अगर आपने 10 साल के लिए लोन लिया है और आप सोचते हैं कि 5 साल की ईएमआई देने के बाद आपने आधा लोन चुकता कर लिया है तो ऐसा नहीं है। हो सकता है कि अभी तक आपने अपने लोन के ब्याज का ही ज्यादातर हिस्सा चुकाया हो और अभी कर्ज की मूल राशि का बहुत सा हिस्सा चुकाना बाकी बचा हो।



( अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके लोन टेन्योर के दौरान कुल लोन का रिपेमेंट कैसे होता है तो आप – http://www.bankbazaar.com/finance-tools/emi-calculator.html इस लिंक पर जाकर ईएमआई कैल्कुलेटर की सहायता ले सकते हैं। इस लिंक पर आपको आपके पूरे रिपमेंट शेड्यूल की जानकारी मिल सकती है)



ईएमआई और आपकी आमदनी

क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी मासिक ईएमआई आपकी कुल आमदनी का सिर्फ 30 या 40 फीसदी ही क्यों होना चाहिए। आपकी आमदनी की विस्तृत जानकारी, आपकी क्वालिकेशन और आपका नियोक्ता, कारोबारी संस्थान की सभी जानकारी लेने के बाद ये तय किया जाता है कि आप कितना लोन लेने के काबिल हैं जो आप आसानी से चुका सकते हैं। इसके अलावा आपके पास आय के अन्य स्त्रोत हैं या नहीं इस पर भी आपके लोन की कुल राशि निर्भर हो सकती है।



सामान्यतया आपका रिपेमेंट शेड्यूल इस तरह तय किया जाता है कि आपके मासिक आमदनी का सिर्फ 30-40 फीसदी ही ईएमआई के तहत आए। इसके तहत आपकी आमदनी के तहत इन खर्चों और मुख्य बातों का ध्यान रखा जाता है-



आपकी आमदनी के 10 फीसदी के करीब पूंजी की जरुरत आपको भविष्य में पड़ सकती है। आपकी आमदनी का 20-25 फीसदी हिस्सा आपके निवेश के लिए हो सकता है और आपको इस पूंजी की आवश्यकता हो सकती है।



इस सब के बाद आपके पास अपनी कुल आमदनी का 40-50 फीसदी ही बचेगा जिसे आपकी रिपेमेंट की क्षमता माना जाएगा।



ये तो बात हुई नियमित आमदनी पाने वाले कर्मचारियों की लेकिन कुछ ऐसे भी व्यक्ति होते हैं जिनके आय का स्त्रोत उनका खुद का कारोबार होता है।



खुद का कारोबार करने वाले व्यक्तियों के लिए लोन लेने की क्षमता इस आधार पर तय की जाती है कि उन्हें कारोबार से कितना मुनाफा मिल रहा है। जितना ज्यादा आपका लोन समय (लोन टेन्योर) होगा उतनी ही कम आपकी ईएमआई होगी और आपको लोन के रूप में ज्यादा बड़ी पूंजी भी मिल सकती है।



इसके अलावा आपको मिलने वाले लोन के लिए कुछ और बातों पर भी ध्यान दिया जाता है मसलन जिस संस्था के लिए आप काम करते हैं या जिस शहर में आप रहते हैं और आपकी क्रेडिट हिस्ट्री कैसी रही है।



लंबी अवधि के लिए लिया गया कर्ज जैसे होम लोन आपके मासिक बजट का एक हिस्सा होता है। अगर आप सिर्फ लोन चुकाने पर ही सारा ध्यान लगा देंगे तो आपको अपने दैनिक खर्चों को उठाने में दिक्कत आ सकती हैं वहीं किसी आकस्मिक स्थिति में आपके पास पैसे की कमी हो सकती है।



उदाहरण- अगर हर महीने ईएमआई में ही सारा पैसा लगा दिया और तो बचत नहीं होगी और भविष्य में बच्चों की पढ़ाई के लिए आपके पास पर्याप्त रकम नहीं होगी। इसके अलावा आपके दुर्भाग्यवश सामने नौकरी खोने की स्थिति आ जाए तो आप भारी मुसीबत में पड़ सकते हैं।



कई बार लोन की ब्याज दरें बढ़ जाती हैं, ऐसी स्थिति में कई बार बैंक खुद ही कर्जधारक का लोन टेन्योर बढ़ा देते हैं जिससे उसके ऊपर बढ़ी ईएमआई का भार ना पड़े।



हांलांकि अगर समय के साथ आपकी आमदनी बढ़ने के चलते ज्यादा पैसा आता है तो आप तयशुदा लोन टेन्योर से पहले लोन चुकाने के बारे में भी सोच सकते हैं। इससे आपको ज्यादा समय तक ब्याज का भार नहीं उठाना पडे़गा। लेकिन इस स्थिति में भी बहुत ऊंची दर पर ईएमआई ना लें वर्ना आपके ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।



बैक बाजार डॉटकॉम पर आप सस्ते लोन की जानकारी ले सकते हैं, विभिन्न लोन के बीच तुलना कर सकते हैं। इसके अलावा भारतीय बैंको और एनबीएफसी से पर्सनल लोन, होम लोन, कार लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन भी कर सकते हैं।



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