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होम लोनः सहयोगी की मदद से होगी राह आसान

प्रकाशित Tue, 12, 2011 पर 17:09  |  स्रोत : Moneycontrol.com

12 जुलाई 2011

बैंक बाजार डॉटकॉम



जब आप होम लोन लेते हैं तो आपके सामने कुछ समस्या आ सकती हैं। या तो आपको लोन के भुगतान की अवधि जरूरत से कम लंबी अवधि का मिलता है या आपको लोन की कुल लागत उठाने में दिक्कत महसूस हो सकती है। आपको लगता है कि लोन लेने के रास्ते बंद हो गए हैं लेकिन ऐसे में किसी को लोन सहयोगी बनाना अच्छी रणनीति हो सकती है।



लोन के लिए सह-आवेदक (को-एप्लीकेंट) कौन हो सकता है?

जो व्यक्ति लोन लेने वाले आवेदक के साथ मिलकर लोन के लिए आवेदन देता है उसे सह-आवेदक (को-एप्लीकेंट) कहा जाता है। इसे इस तरह से प्रयोग किया जाता है कि लोन लेने वाले मुख्य व्यक्ति के साथ सह-आवेदक की आय को जोड़ा जाता है जिससे उक्त व्यक्ति की लोन लेने की क्षमता बढ़ी हुई दिखाई दे।



क्या कोई भी सह-आवेदक हो सकता है



नहीं, बैंक और नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां केवल कुछ ही रिश्तेदारों को सह-आवेदक बनने की मंजूरी दे सकता है। हालांकि ये जरूरी नहीं कि आवेदक के साथ सह-आवेदक का कानूनी रिश्ता ही हो। बैंक नाबालिग व्यक्ति को भी सह-आवेदक बनने को मंजूरी नहीं देते हैं।



ये बात भी ख्याल रखें कि जिसका प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक हो वह लोन के लिए स्वाभाविक रूप से सह-आवेदक होता है।



मेरे होमलोन के लिए सह-आवेदक कौन हो सकता है?



हमारे देश में ज्यादातर बैंक सिर्फ कुछ ही रिश्तेदारों को लोन के लिए सह-आवेदक बनने को मंजूरी देते हैं। भाई-भाई, पिता-पुत्र, माता-पुत्र, पति-पत्नी आदि को संयुक्त रूप से लोन लेने के लिए मंजूरी दे सकता है।



पिता और पुत्र



अगर पिता और पुत्र संयुक्त रूप से लोन ले रहे हैं तो- इस स्थिति में अगर केवल पुत्र ही लोन ले रहा है तो वह अपने पिता के साथ संयुक्त रूप से लोन के लिए अर्जी दे सकता है। इस सूरत में लोन देते समय पिता और पुत्र की आय को एक साथ जोड़कर देखा जाएगा और प्रॉपर्टी को उन-दोनों के नाम में लिखा जाएगा।



अगर किसी सूरत में किसी व्यक्ति के दो या दो से ज्यादा पुत्र हैं तो और वह किसी एक के साथ दोनों के साथ संयुक्त रूप से लोन के लिए सह-आवेदक बनना चाहता हैं तो उसे संपत्ति का प्रमुख मालिक नहीं बनना चाहिए। ये प्रावधान इसलिए लगाया जाता है कि अगर पिता की मृत्यु हो जाती है तो उसके बाद संपत्ति के मालिकाना हक के लिए पुत्रों के बीच नाहक ही विवाद हो सकते हैं।



ऐसी सूरत में पिता को सह-आवेदक के रूप में आवेदन करन चाहिए और उसकी आय को लोन लेने के लिए पुत्रों की आय में जो़ड़ा जा सकता है। वह संपत्ति का सह-मालिक हो सकता है लेकिन उसे संपत्ति के मालिक नहीं होना चाहिए।



अविवाहित पुत्री और पिता को लोन के लिए सह-आवेदन होने की शर्ते-



एक अविवाहित पुत्री अपने पिता के साथ लोन लेने के लिए संयुक्त रूप से आवेदन कर सकती है। हालांकि इस स्थिति में संपत्ति केवल बेटी के नाम होगी और इसके लिए पिता की आय को ध्यान में नहीं रखा जाएगा। ऐसा प्रवधान इसलिए किया जाता है जिससे बेटी की शादी के बाद संपत्ति के मालिकान हक को लेकर किसी तरह के विवाद की स्थिति ना पैदा हो।



अविवाहित पुत्री और माता को लोन के लिए सह-आवेदन होने की शर्ते-



एक अविवाहित पुत्री अपनी माता के साथ लोन लेने के लिए संयुक्त रूप से आवेदन कर सकती है। हालांकि इस स्थिति में संपत्ति केवल बेटी के नाम होगी और इसके लिए माता की आय को ध्यान में नहीं रखा जाएगा।



भाई-भाई


एक भाई अपने भाई के साथ लोन के लिए सह-आवेदक के रूप में आवेदन कर सकता है लेकिन इसके लिए जरूरी हैं कि दोनो भाई एक साथ रह रहे हैं और आगे भी जिस संपत्ति के लिए लोन लिया जा रहा है उसमें साथ रहने की इच्छा रखते हों।



पति और पत्नी



कोई भी व्यक्ति अपने साथी के साथ लोन लेने के लिए सह-आवेदक बन सकता है। लोन लेने के लिए पति-पत्नी दोनों की आय को संयुक्त रूप से जोड़कर देखा जा सकता है और इसके आधार पर लोन की कुल रकम का निरेधारण किया जा सकता है। वैसे भी बैंक इस तरह के लोन देने के लिए आसाना से राजी हो जाते हैं क्योकि ये लोन देने के लिए आदर्श स्थिति होती है।



लोन के लिए सह-आवेदक कोन नहीं हो सकते हैं-

निम्न लोगों को लोन के लिए सह-आवेदक बनने की सुविधा बैंक नहीं दे सकते हैं-

•विवाहित बेटी और माता/ पिता
•बहन-बहन
•बहन और भाई



सह आवेदक का काम क्या होता है-



अगर लोन लेने वाला मुख्य आवेदक लोन को चुकाने में सक्षम नहीं होता है तो लोन चुकाने की पूरी जिम्मेदारी सह-आवेदक की होती है। प्रमुख लोन लेनदार की मृत्यु होने, लोन चुकाने से इंकार करने की सूरत में सह आवेदक को लोन चुकाना पड़ता है। बैंक बकाया लोन की राशि को हासिल करने के लिए संपत्ति के लोन एग्रीमेंट को देखे बिना दूसरे सह-आवेदक को ही पकड़ता है।



जानकारों का कहना है कि सह-आवेदक भी कानूनी रूप से लोन का साझीदार होता है और इस लिहाज से बैंक को पूरा हक है कि वो लोन के रिपेमेंट के लिए सह-आवेदक को पकड़े।



चूंकि मुख्य लेनदार की मृत्यु होने की सूरत में भी सह-आवेदक को रिपेमेंट करना पड़ता है क्योंकि वह लोन को चुकाने के लिए बराबर का सहयोगी होता है। अगर मुख्य आवेदक के पास इंश्योरेंस कवर हो तो भी सह-आवेदक लोन चुकाने की जिम्मेदारी से पीछा नहीं छुड़ा सकता है।



सह आवेदक होने के फायदे

•  आपके लोन के पास होने की संभावना ज्यादा होती है
• लोन लेने की क्षमता बढ़ने से आप बड़ी राशि का लोन ले सकते हैं और बड़ा घर खरीद सकते हैं
• प्रमुख रुप से लोन लेने वाले और सह-आवेदक दोनो को टैक्स छूट का फायदा



बैक बाजार डॉटकॉम पर आप सस्ते लोन की जानकारी ले सकते हैं, विभिन्न लोन के बीच तुलना कर सकते हैं। इसके अलावा भारतीय बैंको और एनबीएफसी से पर्सनल लोन, होम लोन, कार लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन भी कर सकते हैं।



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