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इंश्योरेंस से जुड़े सवाल-जवाब

प्रकाशित Sat, 16, 2011 पर 14:07  |  स्रोत : Moneycontrol.com

16 जुलाई 2011

सीएनबीसी आवाज़



ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के पंकज मठपाल इंश्योरेंस पर दे रहे हैं सलाह।


सवाल: मैं जिस कंपनी में काम करता हूं वहां से एक्सिडेंट कवर मिला हुआ है, क्या कोई और टर्म इंश्योरेंस लेना चाहिए। 1 करोड़ रुपये का पर्सनल एक्सिडेंट कवर 12,000 रुपये के प्रीमियम पर मिल रहा है, क्या इसे लेना चाहिए?


पंकज मठपाल: कंपनी से मिला इंश्योरेंस कवर टर्म इंश्योरेंस नहीं हो सकता, केवल सड़क एक्सिडेंट होने पर ही इसपर कवर मिलेगा। वहीं कंपनी से मिला इंश्योरेंस कवर की सीमा कंपनी में काम करने तक ही सीमित है। कंपनी से मिले एक्सिडेंट कवर के अलावा दूसरा कोई बेहतर टर्म प्लान लें जिसमें पूरे परिवार के लिए कवर उपल्बध हो। वहीं 1 करोड़ रुपये का एक्सिडेंट कवर ना लेकर जितनी जरूरत हो उतने का ही कवर लेना चाहिए।


सवाल: मेरे पास एलआईसी की मनी बैक पॉलिसी है। जिसका तिमाही प्रीमियम 2560 रुपये हैं। पॉलिसी 25 साल की है जिसके 15 साल पूरे हो चुके हैं। क्या पॉलिसी को सरेंडर करना ठीक रहेगा। यदि पॉलिसी को सरेंडर करते हैं तो कितना पैसा मिलेगा?


पंकज मठपाल: 25 साल की पॉलिसी कर 15 साल तक प्रीमियम भर चुके हैं तो ऐसे में पॉलिसी को सरेंडर करना सही फैसला नहीं होगा। 15 साल तक प्रीमियम भरने पर पॉलिसी सरवाइवल बेनेफिट मिल रहा होगा। मिलने वाले सरवाइवल बेनेफिट से पॉलिसी को बाकी 10 साल के लिए जारी रखना चाहिए।


सवाल: क्या कोई नई पॉलिसी लेते समय कंपनी को पुरानी पॉलिसी के बारे में जानकारी देना जरूरी होता है। वहीं यदि एजेंट ना हो तो पॉलिसी के लिए कैसे क्लेम किया जा सकता है?


पंकज मठपाल: कोई भी नई पॉलिसी लेते समय कंपनी को पुरानी पॉलिसी की जानकारी देना बेहद जरूरी होता है। पुरानी पॉलिसी की जानकारी नहीं देने पर क्लेम मिलने में दिक्कतें आ सकती हैं। वहीं एजेंट के नहीं होने पर कंपनी की ब्रांच अथवा क्लेम सेल के जरिए क्लेम किया जा सकता है।


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