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समय पर रिटर्न फाइल कर परेशानियों से बचें

प्रकाशित Sat, 30, 2011 पर 14:01  |  स्रोत : Moneycontrol.com

30 जुलाई 2011


 


सीएनबीसी आवाज़


 


 


व्यक्तिगत एवं एचयूएफ करदाता, जो ऑडिट की श्रेणी में नहीं आते हैं, के लिए आयकर एवं वैल्थ टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित है। 31 जुलाई में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं एवं यदि आपने अभी तक अपना आयकर एवं वैल्थ टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया है तो तुरंत फाइल कर देना चाहिए।



समय पर आयकर रिटर्न फाइल कर निम्न परेशानियों से बचा जा सकता है :



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दंडित ब्याज यदि करदाता ने अपना बकाया टैक्स, रिटर्न फाइल करने की नियत तिथि के पूर्व नहीं चुकाया है, तो उसे आयकर अधिनियम की धारा 234-ए के तहत एक फीसदी प्रतिमाह की दर से बकाया टैक्स पर ब्याज अदा करना होता है।

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जुर्माना: यदि रिटर्न कर निर्धारण वर्ष की समाप्ति के बाद फाइल किया जाता है तो आयकर अधिनियम की धारा 271-एफ के तहत पांच हजार रुपए. का जुर्माना अदा करना होता है।



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हानि का आगामी वर्षों में समायोजन : वित्तीय वर्ष में करदाता को अगर ऐसी कोई भी हानि है, जो अंतर मद से समायोजित नहीं की जा सकती है तो उसे आगामी वर्ष में समायोजन के लिए नियत तिथि के पूर्व रिटर्न फाइल करना अनिवार्य होता है अन्यथा हानि का आगामी वर्षों में समायोजन नहीं किया जा सकता है।



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विभिन्न धाराओं के तहत छूट : नियत तिथि पर रिटर्न फाइल नहीं करने की स्थिति में आयकर अधिनियम की धारा 10-, 10-बी, 80-आईए, 80-आईएबी, 80-आईबी, 80-आईसी, 80-आईडी एवं 80-आईईई के तहत प्राप्त का लाभ नहीं लिया जा सकता है।



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रिफंड : यदि करदाता का टैक्स रिफंड लेना निकलता है तो उसे रिफंड क्लेम करने के लिए भी रिटर्न फाइल करना अनिवार्य होता है।



कब कराना होता है ऑडिट : आयकर अधिनियम की धारा 44 एबी के तहत निम्न व्यक्तिगत एवं एचयूएफ करदाता को अनिवार्य रूप से ऑडिट करवाना होता है :



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व्यवसायी जिनका वित्तीय वर्ष में टर्न ओवर/ बिक्री 60 लाख रपए से अधिक हो।



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पेशेवर जिनकी वित्तीय वर्ष में सकल प्राप्ति 15 लाख रुपए से अधिक हो।