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इक्विटी में निवेश से डरः एफएमपी के बारे में जानें

प्रकाशित Tue, 02, 2011 पर 17:18  |  स्रोत : Moneycontrol.com

2 अगस्त 2011

सीएनबीसी आवाज़



मध्यमवर्गीय हेमंत काफी चिंता में है क्योंकि उसके निवेश किए गए शेयरों की वैल्यू काफी नीचे आ चुकी है। इसके बाद उसने फैसला किया कि वो तयशुदा आमदनी और रिटर्न देने वाले साधनों में पैसा लगाएगा।



हेमंत फिक्सड इनकम वाले निवेश जैसे एफडी, एनसीडी, बॉन्ड जैसे ज्यादा सुरक्षित लगने वाले निवेश विकल्पों में पैसा लगाने की सोच रहा था तभी उसके दोस्त मनीष ने उसे समझाया कि इक्विटी निवेश को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। मनीष का कहना था कि हेमंत को इक्विटी में निवेश बनाए रखना चाहिए भले ही कुछ समय से उसके ऐसेट की वैल्यू नीचे आ रही हो।



ज्यादातर नए निवेशक इक्विटी में निवेश करना नहीं चाहते क्योंकि इनमें अस्थिरता का खतरा होता है। हालांकि इक्विटी में निवेश का यही समय होता है क्योंकि शुरुआती दौर में आप जोखिम उठा सकते हैं।



हालांकि हेमंत की राय अलग थी और वो फिकस्ड इनकम वाले निवेश में पैसे लगाने में ज्यादा उत्सुक था। इसलिए मनीष ने उसे ऐसे निवेश के बारे में बताया जिससे इक्विटी में निवेश रखकर भी कम जोखिम के साथ ज्यादा रिटर्न का फायदा उठाया जा सकता है।


फिक्सड मैच्योरिटी प्लान (एफएमपी)



फिक्सड मैच्योरिटी प्लान (एफएमपी) एक डेट इंस्ट्रूमेंट है जो बढ़िया रिटर्न दे सकता है। सारे टैक्स चुकाने के बाद एक एफएमपी में 8.5-9 फीसदी का रिटर्न मिलने की पूरी उम्मीद होती है। हालांकि बैंक एफडी भी 10.5 फीसदी का सालाना ब्याज देने की पेशकश करते हैं जो काफी आकर्षक लगता है। लेकिन जो लोग ऊंचे टैक्स ब्रेकेट में आते हैं, उनके लिए टैक्स चुकाने के बाद एफडी में सिर्फ 7.25 फीसडी का रिटर्न ही बच पाता है।



कर चुकाने के बाद बची रकम के आधार पर तुलना की जाए तो किसी बैंक एफडी की तुलना में एफएमपी 17-24 फीसदी ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं।



एफएमपी मूलतः डेट म्यूचुअल फंड स्कीम के जैसा ही होता है, जिसकी अवधि ज्यादा होती है। एफएमपी सिक्योरिटी के तहत सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (सीडी), कमर्शियल पेपर (सीपी), बॉन्ड वगैरह में निवेश किया जाता है। एफएमपी के तहत किसी तरह के इक्विटी में निवेश नहीं होता। सामान्यतया एफएमपी की अवधि 90 दिनों से 3 वर्षों की होती है। हालांकि इनमें से 1 साल से ज्यादा अवधि वाले सबसे ज्यादा प्रचलित एफएमपी हैं। इसका कारण है- टैक्स के नियम



डेट एमएफ में लगने वाले करों का स्वरूप काफी आसान होता है और इसी वजह से एफएमपी पर भी इसी दरों से कर लगते हैं।



कैपिटल गेन टैक्स के तहत एफएमपी पर इंडेक्सेशन के साथ 10 फीसदी और इंडेक्सेशन के अलावा 20 फीसदी टैक्स लगता है। अब मान लीजिए कि एफएमपी में आपको कुल 10.5 फीसदी की आय मिलती है, तो टैक्स चुकाने के बाद ये क्रमशः 9.45 फीसदी और 9.8 फीसदी हो जाएगी।



एफएमपी पर सामान्यतया 02-0.4 फीसदी के बीच टैक्स लगता है तो सब कर चुकाने के बाद एफएमपी पर आपको 9 फीसदी का रिटर्न निश्चित बच ही जाएगा।



1 साल के सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट पर आपको 10 फीसदी की आय मिलती है तो एफएमपी पर 1 साल में 9 फीसदी का रिटर्न काफी बढ़िया कहा जा सकता है।



अगर एफएमपी की अवधि 1 साल से कम समय की हो तो तत्कालीन आयकर नियमों और टैक्स स्लैब के तहत टैक्स लागू होगा। इस सूरत में एफएमपी का रिटर्न बैंक एफडी जैसा ही मालूम पड़ता है। लेकिन अगर कोई डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन ऑप्शन लेता है तो एफएमपी का नेट रिटर्न एफडी से ज्यादा ही बैठता है।



अगर कोई एफएमपी में डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन ऑप्शन लेता है तो इसमें डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) लगता है। एफएमपी का ये टैक्स म्यूचुअल फंड के द्वारा दिया जाता है। इस टैक्स को देने के बाद म्यूचुअल फंड बाकी बची रकम को निवेशकों में बराबर बांट देता है जो टैक्स फ्री होती है। फिलहाल डीडीटी 13.51 फीसदी है। ऐसे में जिस एफएमपी पर 10 फीसदी रिटर्न की पेशकश मिल रही है, ऐसे एफएमपी में निवेश करने से टैक्स चुकाने के बाद निवेशक के हाथ में सालाना 8.65 फीसदी का रिटर्न आएगा। इससे जाहिर है कि निवेशकों के लिए एफएमपी में निवेश करना शानदार विकल्प हो सकता है।



इसके बाद मनीष ने हेमंत को सलाह दी कि अगर 1 साल से कम समय के लिए एफएमपी में पैसा लगाना है तो डिविडेड ऑप्शन में पैसा लगाएं। अगर 1 साल से ज्यादा समय के लिए पैसा लगाना है तो ग्रोथ ऑप्शन सबसे बढ़िया रहेगा, खासकर उन लोगों के लिए जो 20-30 फीसदी के टैक्स ब्रेकेट में आते हैं।



ये लेख लैडर7 फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रिंसिपल फाइनेंशियल प्लानर सुरेश सदागोपन द्वारा लिखा गया है।