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विशेषज्ञ से ही लें वित्तीय सलाह

प्रकाशित Sat, 27, 2011 पर 12:17  |  स्रोत : Moneycontrol.com

27 अगस्त 2011

सीएनबीसी आवाज़



आज अधिकांश लोगों ने अपने घर एवं ऑफिस के बाहर "सेल्समैन अंदर न आवें" की तख्तियाँ लगा रखी हैं। लेकिन यदि हम वित्तीय मामलों की बात करें तो आज भी हम ऐसे सेल्समैनों पर निर्भर हैं जिनका हित किसी कंपनी-विशिष्ट के वित्तीय उत्पाद को विक्रय करने में है न कि हमारी आर्थिक प्रगति में। वर्षों से हम अपने वित्तीय निर्णय इनकी सलाह से ही लेते आए हैं एवं आज इन पर पूर्ण रूप में निर्भर हो गए हैं।



ग्लोबलाइजेशन एवं उदार आर्थिक नीति की राह अपनाकर जहाँ एक तरफ हमारे देश की अर्थव्यवस्था निरंतर विकास कर रही है ,वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटकों का प्रभाव हमारे पर्सनल फाइनेंस पर पड़ रहा है। दो दशक पूर्व जहाँ भारतीय वित्तीय बाजार, बैंक एवं एलआईसी तक ही सीमित थे, वहीं आज वित्तीय बाजार काफी व्यापक हो गया है एवं हमारे पास विभिन्ना वित्तीय उत्पाद और उत्पाद प्रदाता कंपनियों के विकल्प मौजूद हैं। पहले जहाँ बैंक एफडी और एलआईसी जैसे सुरक्षित निवेश साधनों में इतना रिटर्न मिल जाता था कि टैक्स चुकाने के बाद भी हम महँगाई दर को मात दे पाते थे, वहीं आज इन निवेश साधनों में रिटर्न इतना कम हो गया है कि टैक्स एवं महँगाई दर को मात दे पाना बड़ी चुनौती हो गया है।



ग्लोबलाइजेशन की वजह से न सिर्फ आर्थिक बल्कि सामाजिक परिवर्तन भी हुए हैं। जैसे संयुक्त परिवार से एकल परिवार की ओर झुकाव, व्यापार एवं नौकरी की वजह से बुढ़ापे में बच्चों का अपने माता-पिता के साथ नहीं रह पाना, अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं के कारण औसत उम्र दर में वृद्धि। इन सामाजिक परिवर्तनों का प्रभाव भी पर्सनल फाइनेंस पर पड़ा है।



आज पर्सनल फाइनेंस बहुत ही जटिल हो गया है एवं एक वित्तीय निर्णय का प्रभाव कई वित्तीय मामलों पर पड़ता है। ऐसे में आज भी हम समय एवं वित्तीय साक्षरता के अभाव में सेल्समैनों द्वारा दी गई सभी को एक जैसे उत्पाद लेने की सलाह पर निर्भर हो जाते हैं, जबकि प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता, जीवन के लक्ष्य, जोखिम वहन क्षमता, आय-व्यय, जीवनशैली अलग-अलग है, तो कैसे एक समान सलाह सभी के लिए उचित हो सकती है? आज हमें ऐसे वित्तीय डॉक्टर (विशेषज्ञ) की आवश्यकता है, जो प्रत्येक वित्तीय निर्णय के प्रभाव को समझकर व्यक्ति विशेष की परिस्थितियों के अनुसार वित्तीय सलाह दे सके।



आप अपने वित्तीय निर्णयों के लिए सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (सीएफपी) को अपने विश्वासपात्र सलाहकार के रूप में चुन सकते हैं। विश्वभर में पर्सनल फाइनेंस के क्षेत्र में सीएफपी सर्टिफिकेशन सर्वोच्च है। इस सर्टिफिकेशन को भारत सहित २३ देशों में मान्यता प्राप्त है। फाइनेंशियल प्लानिंग स्टैंडर्ड बोर्ड ऑफ इंडिया निर्धारित प्रक्रिया को पूर्ण करने वाले व्यक्ति को ही यह सर्टिफिकेशन प्रदान करती है जिसमें उम्मीदवारों को निम्न प्रक्रिया से गुजरना होता है-



एजुकेशन- निर्धारित एजुकेशन में पर्सनल फाइनेंस से जुड़े समस्त विषयों का ज्ञान अर्जित करना।



*  एक्जामिनेशन- संचालित एक्जाम से उनके ज्ञान की परख।



*  अनुभव- पर्सनल फाइनेंस में न्यूनतम ३ साल के अनुभव के बाद सर्टिफिकेशन।



*  कोड ऑफ इथिक्स- निर्धारित इथिक्स का पालन करना अनिवार्य जैसे कि ग्राहकों का हित सर्वोपरि एवं उनके साथ पूर्ण पारदर्शिता आदि।



* निरंतर शिक्षा- प्लानर के अपडेट रहने के लिए निरंतर शिक्षा अनिवार्य।



आज हम सभी कार्य करने के लिए विशेषज्ञ की मदद लेते हैं, जैसे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के लिए डॉक्टर, भवन निर्माण के लिए आर्किटेक्ट, टैक्स संबंधी मामलों के लिए सीए एवं न्यायिक विषयों के लिए वकील। तो क्यों न वित्तीय निर्णयों के लिए सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर की सलाह लें?


 


यह लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर उमेश राठी ने लिखा है।umesh.rathi@arihantcapital.com पर उमेश राठी से संपर्क किया जा सकता है।