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निवेश विकल्प की तलाशः बॉन्ड में करें निवेश

प्रकाशित Sat, 27, 2011 पर 13:35  |  स्रोत : Moneycontrol.com

27 अगस्त 2011

सीएनबीसी आवाज़



अर्थव्यवस्था में मंदी के असर से बॉन्ड की आय पर भी असर देखा जा रहा है। पिछले 1 साल के दौरान बॉन्ड से मिलने वाली आय भी अपने उच्च स्तरों से नीचे आ चुकी है लेकिन बॉन्ड में पैसा लगाने और बॉन्ड को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करने का सही मौका अभी है।



इसलिए अगर आप सीधे तौर पर बॉन्ड में पैसा नहीं लगाना चाहते तो कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और सरकारी बॉन्ड में पूंजी लगाने का विकल्प भी आपके पास मौजूद है।



फिलहाल 10 साल के लिए सरकारी बॉन्ड पर आय करीब 8.25 फीसदी के आसपास बनी हुई है। 2021 में मैच्योर होने वाले सरकारी बॉन्ड पर करीब 7.80 फीसदी की दर से रिटर्न मिल रहा है। वहीं मई 2011 में मैच्योर होने वाले सरकारी बॉन्ड पर करीब 8.45 फीसदी का रिटर्न मिलने का अनुमान है।



5 और 10 साल के बेंचमार्क एएए बॉन्ड 9.75 फीसदी के औसतन रिटर्न से गिरकर 9.5 फीसदी के आसपास कारोबार कर रहे हैं। फिलहाल बॉन्ड की आय अपने 3 साल के उच्च स्तर पर चल रही है और इसकी पीछे एक बड़ी वजह महंगाई है।



महंगाई थोक मूल्य सूचकांक ( होलसेल प्राइस इंडेक्स) यानि डब्ल्यूपीआई के आधार पर मापी जाती है और फिलहाल ये करीब 9.06 फीसदी के आसपास चल रही है। हाल ही में जून में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद महंगाई फिर से ऊपर चढ़ रही है। लगातार बढ़ती महंगाई के चलते आरबीआई नीतिगत दरों में लगातार इजाफा करता जा रहा है।



पिछले 15 महीनों में महंगाई दर 5 फीसदी से धीरे-धीरे बढ़कर 9 फीसदी तक जा पहुंची है। इसकी वजह से पिछले 15 महीनों में आरबीआई ने रेपो रेट में 2.75 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है और फिलहाल रेपो रेट 8 फीसदी है।



देश की ग्रोथ की रफ्तार धीमी होने के असर से आईआईपी ग्रोथ भी नीचे आ रही है। देश में मौद्रिक नीति की स्थिति कड़ी है और इसके साथ ही बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ भी नीचे आ रही है। पिछले 6 महीने के दौरान बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ 23.5 फीसदी से घटकर 20 फीसदी तक आ गई है।



ब्याज दरों के असर से प्रभावित होने वाले सेक्टर जैसे रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर में मंदी छा रही है। वाहनों की बिक्री 10 फीसदी के आंकड़े से नीचे जाकर इकाई में पहुंच गई है। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि बढ़ती ब्याज दरों के असर से लागत बढ़ रही है। वहीं लिक्विडिटी कड़ी होने से भी ऑटो सेक्टर पर मार पड़ रही है।



वहीं कैपिटल मार्केट की खस्ता हालात के चलते फाइनेंशियल सर्विसेज (वित्तीय सेक्टर) भी बुरे दौर से गुजर रहा है। इक्विटी बाजार 2007 के दौरान देखे गए स्तर तक नीचे आ चुके हैं।



ऊंची ब्याज दरों और कैपिटल मार्केट की सुस्त दशा के चलते कॉर्पोरेट को अपने क्षमता विस्तार प्लान ठप्प करने पर मजबूर होना पड़ा है। इसकी वजह से जाहिर तौर पर देश की अर्थव्यवस्था के विकास पर असर होगा।



विश्व की आर्थिक हालत ठीक नहीं लग रही है। अमेरिका, चीन और जापान जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ की रफ्तार सुस्त हो चुकी है। अमेरिका के बेरोजगारी के आंकड़े 2006 के बाद से 6 फीसदी से बढ़कर 9.2 फीसदी पर आ चुके हैं और इसके घटने के फिलहाल कोई आसार भी नहीं नजर आ रहे हैं।



वहीं चीन भी महंगाई की समस्या से जूझ रहा है, इसके चलते चीन में ब्याज दरें बढ़ रही हैं और देश ने अपनी ग्रोथ के पूर्वानुमान में भी कटौती कर दी है। दूसरी तरफ जापान पिछले दिनों आए भूकंप और सुनामी की तबाही से उबरने की कोशिश कर रहा था तभी रेटिंग एजेंसी मूडीज ने इसकी रेटिंग भी घटा दी है।  



यूरोप में छाए कर्ज संकट के चलते यूरोपीय बाजार पहले से ही गिरावट को झेल रहे हैं। ग्रीस, स्पेन, इटली जैसे कई देश कर्ज चुकाने के लिए खर्चों में कमी कर रहे हैं लेकिन इसके फलस्वरूप इन देशों की ग्रोथ पर सवालिया निशान लग गया है।



देशों की विकास की रफ्तार धीमी होने और महंगाई के चढ़ते जाने से कुछ चिंताएं उबर रही हैं। हालांकि फिलहाल कमोडिटी की कीमतों में गिरावट आने से महंगाई कम होने की उम्मीद है। इस तरह के आर्थिक माहौल में जब बॉन्ड यील्ड अपने 3 साल के उच्च स्तरों के आसपास चल रही हैं तो बॉन्ड में पैसा लगाने का विकल्प अच्छा साबित हो सकता है।



अर्जुन पार्थसारथी डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट इंवेस्टरआरइडीयट्स डॉटकॉम के एडीटर
हैं। ये एक वित्तीय वेबसाइट है जो निवेशकों के लिए वित्तीय समाधान प्रस्तुत करती है।