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विदेश में पढ़ाई के लिए कैसे करें पैसे का सही प्रबंधन

प्रकाशित Sat, 27, 2011 पर 14:56  |  स्रोत : Moneycontrol.com

27 अगस्त 2011

सीएनबीसी आवाज़



कुछ समय पहले विदेशी स्कूलों में छात्रों को पैसे की महत्ता बताने के लिए एक गेम खेला जाता था। इसे एक तरह से मोनोपली का प्रकार माना जा सकता है। छात्रों को हर महीने की शुरूआत में कुछ करेंसी दी जाती थी जिससे वो कक्षा में अपनी सीट का किराया दे सकते थे। छात्रों को टीचर के सबसे नजदीक की सीट लेने के लिए सबसे ज्यादा किराया देना होता था जैसे प्राइन लैंड के मामले में होता है।



हालांकि छात्रों को जो पैसा मिलता था वो पूरे महीने सीट का किराया देने के लिए काफी नहीं होता था। लिहाजा बच्चे टेस्ट में अच्छे नंबर लाकर या फिर क्लास में अच्छा आचरण करके सबसे पसंदीदा सीट हासिल करने में कामयाब रहते थे। इस तरह से बचपन में ही छात्रों को पैसे के प्रबंधन का सबसे आसान और यादगार पाठ पढ़ा दिया जाता था जो उनके जीवन भर काम आता था।



आजकल के छात्रों के लिए भी पैसे का सही प्रबंदन करना काफी जरूरी होता है और खासकर अगर वो विदेश में पढ़ने जा रहे हों।



विदेश में पढ़ने से पहले सही प्लानिंग करें

आजकर ज्यादा से ज्यादा बच्चे पढ़ाई के लिए विदेश का सफर तय कर रहे हैं। उन्हें, रहने, पढ़ने, खाने, ट्यूशन फीस चुकाने और आरामदायक जीवन बिताने के लिए अच्छी खासी पूंजी की जरूरत होती है और बिना पैसे को मैनेज किए वो ऐसा नहीं कर पाएंगे।



आजकल बच्चों की परीक्षाओं से पहले ही उनके नए संस्थान की एप्लीकेशन वगैरह जमा हो जाती हैं ऐसे में अगर आपको पता है कि आपका बच्चा कल कहां पढ़ने जा रहा है तो बेहतर है आप पहले से ही प्लानिंग करा लें।



सभी शुल्क, फीस को चुकाने के लिए पूंजी का प्रबंध करें-

बीते साल की तुलना में इस साल शिक्षण संस्थानों की फीस स्वाभाविक रूप से बढ़ चुकी है। बढ़ती महंगाई के साथ-साथ ज्यादातर अंतर्राष्ट्रीय शिक्षण संस्थाओं में पढ़ाई का खर्च 7-9 फीसदी बढ़ चुका है। इसी के साथ रहने के खर्च में भी इतनी ही बढ़त का अनुमान लगाएं तो बेहतर रहेगा। जब आप विदेशी शिक्षा संस्थान में अपने बच्चे के रहने का इंतजाम करें( ज्यादातर संस्थानों में कैंपस सुविधा होती है) तो इस बाता का ख्याल रखना चाहिए कि आपका बच्चा छात्रावास में रहने की बजाए अपने लिए अलग कमरे या जगह की इच्छा रख सकता है।



रहन-सहन का खर्च

जिन माता-पिता के बच्चे पहले उन संस्थानों में पढ़ चुके हैं जिसमें अब आपका बच्चा पढ़ने के लिए जा रहा है, इन लोगों के अनुभव का फायदा जरूर उठाएं। उनसे संस्थान के रहन-सहन के बारे में पूछें और जानें। आपकी पहले से इकट्ठा की गई जानकारी का फायदा आपकी संतान को नए माहौल में मिल सकता है।



खाने का खर्च, किताबों का खर्च, मोबाइल बिल दोस्तों के लिए उपहार, परिवहन का खर्च और अखबार और मनोरंजन का खर्चा इन सभी का हिसाब लगाएं और उसी के हिसाब से अपनी संतान की पॉकेट मनी की रकम तय करें तो उसे भी आसानी होगी और आप भी निश्चिंत रहेंगे कि आपकी संतान को अपनी जरूरतों को पूरा करने में दिक्कत नहीं होगी।



अपनी संतान को एक बजट में सबकुछ प्रबंध करने की आदत सिखाना काफी आवश्यक है। आपके बच्चों को पैसे की महत्ता समझने में मदद करें जिससे आपको अलग ही खुशी मिलेगी।



करेंसी का उतार-चढ़ाव

विदेश में पढ़ने जाते समय बच्चों की वित्तीय हालत कैसी रहेगी, ये काफी विदेशी करेंसी के उतार-चढ़ाव के चलन पर भी निर्भर करता है।



आपको देखना होगा कि किन ब्याज दरों पर आप संतान के खाते में पैसे ट्रासफर करें जिससे आपकी भी सुविधा हो। विदेश में पैसे भेजने के लिए आपको मुद्रा के बदलते लेवल पर भी नजर रखनी होगी।



अगर आप थोड़ा ध्यान दें और सीखें कि किन घटनाओं से करेंसी में उतार-चढ़ाव होता है तो आपको ही रुपये का प्रबंध करने में आसानी होगी। उदाहरण के लिए अगर आप वैश्विक घटनाओं पर नजर रखते हैं और आपको पता है कि आगे चलकर डॉलर महंगा होने वाला है तो आप ज्यादा पैसा भेज सकते हैं।



अतः ये काफी जरूरी है कि आप अपनी संतान को विदेश में पढ़ने भेजे तो कुछ जागरूक अभिभावक बनकर भेजें। विदेश में पढ़ना जितना आपकी संतान के लिए बड़ी बात है उतनी ही आपकी जिम्मेदारी भी बड़ी हो जाती है।



ये लेख इंटरनेशनल मनी मैटर्स के लोवाली नवलखी द्वारा लिखा गया है।