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अपने बच्चे के लिए चाइल्ड प्लान कैसे चुनें!

प्रकाशित Sat, सितम्बर 10, 2011 पर 12:25  |  स्रोत : Moneycontrol.com

10 सितंबर 2011

सीएनबीसी आवाज़



मेरी एक दोस्त रिद्दी के यहां हाल ही में बेटी के रूप में खुशियां घर आई हैं। परिवार के नए सदस्य की खुशी सेलिब्रेट करने के लिए उन्होंने घर पर एक पार्टी का आयोजन किया है।



पार्टी के दौरान एक परिवार ऐसा भी आया जिनकी बेटी ने अभी- अभी 3 साल पूरे किए थे और उसके माता-पिता बदलते समय में बच्चों की परवरिश से जुड़ी दिक्कतों से वाकिफ थे। उन्होंने बताया कि बच्ची को प्राइमरी स्कूल में दाखिल करवाते समय ही उन्हें भारी पूंजी खर्च करनी पड़ी थी। इससे चिंताएं और बढ़ जाती हैं कि अगर प्राइमरी शिक्षा के लिए इतना पैसा खर्च होने लगा है तो आगे जाकर स्थिति क्या होने वाली है जब 15 साल बाद उसकी प्रोफेशनल शिक्षा के लिए काफी पैसे की जरूरत होगी।



ये सब सुनकर अभय और रिद्धी को बच्चों से जुड़े वे सारे विज्ञापन याद आने लगे जो उनके भविष्य में आने वाली पैसे की जरूरत को बंया करते हैं। अभय और रिद्धी को महसूस हुआ कि बच्चे के जन्म के साथ ही नहीं अगर संभव हो तो माता-पिता को पहले ही बच्चे की आगामी जरूरतों के लिए पैसा जुटाने की कुछ ना कुछ प्लानिंग जरूर करनी चाहिए।



अभय और रिद्धी ने टीवी पर आने वाले चाइल्ड प्लान के विज्ञापनों को ध्यान से देखना शुरु किया। मौजूदा समय के काफी सारे चाइल्ड प्लान नाम जानने के बाद उन्होंने मुझसे संपर्क किया कि कौनसा प्लान उनकी बेटी के लिए उपयुक्त होगा जो उसके भविष्य में पढ़ाई और अन्य जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा।



उनकी सूची में ज्यादातर इंश्योरेंस कंपनियों के वो प्लान थे जिनमें चाइल्ड नाम जुड़ा था। जाहिर था जिस प्लान में चाइल्ड नाम आएगा वो बच्चों की जरूरतों को सोचकर ही बनाया गया होगा। अभय और रिद्धी इतने सारे चाइल्ड प्लान विकल्पों के बीच असमंजस में पड़ गए थे।



मैनें उन्हें चाइल्ड प्लान के बारे में बताना शुरु किया कि ये प्रमुख तौर पर बीमा और निवेश का संयोजन होता है। इन प्लान के बीमा विकल्प के तहत माता-पिता के ना रहने की सूरत में प्रीमियम माफ किए जाने की सुविधा मिलती है। किसी असमय घटना के चलते यदि बच्चे के अभिभावक को कुछ हो जाता है चाइल्ड प्लान के जरिए बच्चे को इतनी पूंजी मिलनी सुनिश्चित होती है जिसमें उसकी पढ़ाई के खर्च पूरे हो सकते हों। हर हाल में बच्चे को मैच्योरिटी की राशि मिलती ही है।



दूसरा विकल्प जिसमें निवेश के फायदे मिलने का भी भरोसा होता है। इसके तहत माता-पिता अपनी मर्जी से प्लान चुनकर पैसा निवेश करते हैं। ये एक यूनिट लिंक्ड प्लान (यूलिप) हो सकता है या फिर एक परंपरागत प्लान हो सकता है। अगर युलिप प्लान चुना जाए तो निवेशक पॉलिसी के तहत मिलने वाले विभिन्न फंड ऑप्शन में से कोई भी फंड चुन सकता है। या तो वो इक्विटी फंड चुन सकता है या फिर डेट फंड याफिर चाहे तो दोनों और दोनों का मिश्रित रूप।



ये सब सुनने के बाद अभय और रिद्धी अपनी बेटी के लिए एक ऐसा चाइल्ड प्लान लेने के लिए तैयार हो गए। अभय ने फैसला किया कि वो अपनी बेटी के लिए हर महीने 2.500 रुपये का निवेश करेगा जिससे 18 साल की होने तक उसकी बेटी के लिए अच्छा-खासा कोष इकट्ठा हो जाए जब वो कॉलेज में प्रवेश करे।



मैनें उन्हें बताया कि अब यहां से कुछ गणित की मदद लेनी होगी। अगर अभय एक चाइल्ड प्लान में हर महीने 2500 रुपये डालता है तो सालाना 30,000 रुपये प्रीमियम के हिसाब से उसे 3-6 लाख रुपये तक का लाइफ कवर मिल सकता है जो उसके सालाना प्रीमियम का सिर्फ 10-20 गुना बनता है।



जाहिर तौर पर ये अभय की उम्मीदों से काफी कम होगा क्योंकि अमूमन एक व्यक्ति के पास अपनी सालाना आमदनी के 10-12 गुना ज्यादा राशि का लाइफ कवर होना चाहिए।



इसलिए अभय के लाइफ इँश्योरेंस की जरूरत करीब 75 लाख रुपये की होगी। अगर 31 साल की उम्र में अभय 30 साल के लिए 7000 रुपये सालाना प्रीमियम का बीमा लेता है तो उसे 75 लाख रुपये का कवर मिल सकता है।



इसके बाद अपनी बेटी के लिए चाइल्ड प्लान लेने के लिए अभय के पास सिर्फ 23,000 रुपये ही बचेंगे। ऐसे में चाइल्ड प्लान लेने पर उसकी बेटी के लिए बीमे की ज्यादा रकम नहीं बचेगी। दूसरा यूलिप में कई अन्य शुल्क भी शामिल होते हैं। वैसे भी तुलनात्मक अध्य्यन करने पर पाया गया है कि रेगुलर यूलिप फंड की बजाए इक्विटी म्यूचुअल फंड में बेहतर रिटर्न मिल सकते हैं।



यूलिप में काफी अपफ्रंट चार्ज होते हैं जो सीधा प्लान के प्रीमियम में से कट जाता है। जिससे कुल चुकाई गई रकम में से निवेश के लिए काफी कम पैसा बचता है। वहीं म्यूचुअल फंड में कोई अपफ्रंट चार्ज नहीं वसूले जाते हैं जिससे आपकी द्रारा डाला गया सारा पैसा निवेश हो जाता है।



इन सब बातों पर गौर करके ये साफ हो जाता है कि चाइल्ड प्लान की टर्म इंश्योरेंस प्लान या म्यूचुअल फंड के साथ तुलना करना सही नहीं है। टर्म इंश्योरेंस आपको ऊंचा कवर दिला सकता है जबकि म्यूचुअल फंड के जरिए आप लंबे समय के लिए पैसा इक्ट्ठा कर सकते हैं। कुल मिलाकर इसका मतलब है कि आपको सिर्फ चाइल्ड प्लान का नाम सुनकर ही किसी प्लान के पीछे नहीं जाना चाहिए। आपको पूरी तरह रिसर्च करकर ही ये देखना चाहिए कि आपको किस चाइल्ड प्लान में सबसे ज्यादा पैसे की सुरक्षा और निवेश की सुविधा मिल रही है।



तो, सभी नए बने माता-पिता को सलाह दी जा रही है कि आपके बच्चे के सुरक्षित भविष्य के लिए चाइल्ड प्लान चुनें, लेकिन देखकर। आखिरकार नाम में क्या रखा है, प्लान के सभी दिशानिर्देशों को देखकर ही चुनाव करें तो बेहतर होगा।



ये लेख अपना पैसा डॉटकॉम के अभिषेक कुमार सिंह द्वारा लिखा गया है।



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पोस्ट करनेवाले: SaintEquityपर: 14:05, अक्तूबर 20, 2014

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