Moneycontrol » समाचार » टैक्स

टैक्स रिटर्न भरने में हुई गलती कैसे सुधारें

प्रकाशित Sat, 10, 2011 पर 12:35  |  स्रोत : Moneycontrol.com

10 सितंबर 2011

सीएनबीसी आवाज़



टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया के मुताबिक अगर इंकम टैक्स रिटर्न भरने में भूल-चुक हो गई है तो इसमें घबराने की जरूरत नहीं है। आयकर चालान भरने में हुई गलती सुधारी जा सकती है।



सुभाष लखोटिया के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को डायरेक्टरेट ऑफ टैक्स रेट सिस्टम्स ने आयकर रिटर्न भरने में हुई दिक्कत सुधारने के लिए अवसर दिया है। इंकम टैक्स चालान में छोटी-मोटी गलती जैसे नाम में सुधार, पैन नंबर, टैन नंबर में सुधार के लिए बैंक को पत्र लिखें। पत्र 7 दिन में बैंक के भीतर जमा हो जाना चाहिए।



अगर 7 दिन के भीतर टैक्स रिटर्न में गलती का पत्र ना पहुंचे तो इसके साथ ही आपको कुछ और समय भी मिल सकता है। देर होने पर सीधा ऐसेसिंग ऑफिसर को पत्र लिखें जो आपका चालान जमा करता है।



अगर पेमेंट अमाउंट में गलती, ऐसेसमेंट साल जैसी बड़ी गलती होती हो आयकर रिटर्न के लिए जमा किए गए चेक डिपॉजिट के 3 महीने के भीतर आपको इसकी सूचना देनी चाहिए जिससे आप पर गलत रिटर्न भरने का इल्जाम ना लगे।



टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया के मुताबिक होम लोन के टैक्स घर तैयार नहीं हुआ और पजेशन नहीं मिला तो होमलोन के ब्याज पर टैक्स छूट नहीं मिल सकती है। हालांकि होमलोन की ईएमआई चुकाने पर टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं।



अगर आप बैंक से लोन लेने की बजाए अपने पिता से होमलोन ले सकते हैं, इसके लिए अकाउंट पेई चेक लें। पिता से लिखकर ले कि उन्होंने आपको यानी अपने बेटे को अमुक राशि लोन या उपहार के रूप में दी है। अगर आप इस लोन पर ब्याज चुकाते हैं तो आप इस पर आयकर छूट भी हासिल कर सकते हैं और अगर पिता आपसे लोन वापस नहीं लेते हैं तो आपको दोगुना फायदा हो सकता है।



टीडीएस कटने के समय ध्यान रखें

टैक्स गुरू ने जानकारी दी कि आयकर की धारा 199 के नियम 37बीए के तहत टीडीएस नियमों में एफडी या ज्वाइंट खातों पर टीडीएस कटने के नियम बताए गए हैं। कई बार करदाता को जानकारी नहीं होती है कि टीडीएस किस तरह काटा जाता है। ज्वाइंट एफडी खातों के टीडीएस कटते समय पहले अकाउंट होल्डर के नाम पर ही टैक्स कटता है। अगर एफडी खाता दो लोगों के नाम पर है बैंक आमतौर पर पहले अकाउंट होल्डर व्यक्ति का ही टीडीएस काटता है।
   

इंफ्रा बॉन्ड के टैक्स पर छूट


इंफ्रा बॉन्ड के तहत मिलने वाले ब्याज को हर साल भी आय में जोड़कर दिखा सकते हैं और मैच्योरिटी के समय भी दिखा सकते हैं। टैक्स गुरू की सलाह है कि इंफ्रा बॉन्ड से मिलने वाली ब्याज आय को हर साल अपनी आय में जोड़कर दिखाना और इस पर टैक्स चुकाकर छूट लेना बेहतर विकल्प है।



वीडियो देखें