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कब करें लोन ट्रांसफर!

प्रकाशित Tue, 13, 2011 पर 11:53  |  स्रोत : Moneycontrol.com

13 सितंबर 2011

बैंक बाजार डॉटकॉम



आजकल अपने लोन का बोझ कम करने के लिए लोन को रिफाइनेंस कराना या लोन स्विच करने का विकल्प सामने आ गया है। इसे बैलेंस ट्रांसफर भी कहते हैं। बैलेंस ट्रांसफर के तहत आपके लोन का बचा हुआ या आउटस्टैंडिंग अमाउंट किसी और देनदार के पास चला जाता है।



आइये जानें कि कुछ लोग अपने लोन को स्विच क्यों करते हैं-

सस्ती ब्याज दरों के लिए- अगर आपने 2 साल पहले लोन लिया और अब बाजार की ब्याज दरें सस्ती हो गई हैं। लेकिन आपका बैंक आपको सस्ती दरों पर लोन देने को राजी नहीं और पहली दरों पर ही ब्याज वसूल रहा है तो आपको लोन स्विच करना चाहिए। जब ब्याज सस्ते हैं तो आप ऊंची ईएमआई का भुगतान क्यों करें।



अपने लोन की शर्ते बदलने के लिए- किसी समय जो लोन की शर्ते ठीक लगती हैं वो बदलते समय के साथ गलत साबित हो सकती है। उदाहरण- आप अपने लोन का टेन्योर बढ़ाना चाहते हैं लेकिन आपका देनदार इसके लिए राजी नहीं होता। इस स्थिति में आप दूसरे बैंक या एनबीएफसी से लोन ले सकते हैं।



अतिरिक्त पैसे की जरूरत- जबसे आपने होमलोन लिया तबते घर की कीमत बढ़ गई। अगर इस समय आपको अलग से पैसे की जरूरत हो और आपका बैंक आपको टॉप-अप लोन ना देना चाहे तो रिफाइनेंसिंग एक बढ़िया विकल्प है। अगर आपकी प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमत के साथ आपका कर्जदाता आपको टॉप-अप लोन देता है तो फिर आपको रिफाइनेंसिंग की जरूरत नहीं।



लोन ट्रांसफर में पुराना देनदार नए देनदार को लोन का सारा बचा हुआ अमाउंट स्थानांतरित कर देता है। एक बार ये कार्यवाई हो जाए तो आपकी प्रॉपर्टी के कागज नए कर्जदाता को दे दिए जाते हैं। आपकी बचे हुए पोस्ट डेटेड चेक, ईसीबी को रद्द कर दिया जाएगा और आपकी देनदारियां नए कर्जदाता को सौंप दी जाएगी।



आपको पुराने देनदार को प्री-क्लोजिंग चार्ज के रूप में अपने लोन का बची राशि का 2-5 फीसदी देना होगा। ये वो जुर्माना होता है जो आपको लोन समय से पहले बंद करने के लिए देना होता है क्योंकि बैंक को आपसे आगे कोई ब्याज नहीं मिलेगा। लेकिन अगर आप अपनी जेब से आउटस्टैंडिंग अमाउंट चुका देते हैं और लोन रिफाइनेंसिग के लिए बाद में जाते हैं तो हो सकता है कि आपके ऊपर प्री-क्लोजर चार्ज ना लगाए जाएं। इसके साथ ही आपको नए बैंक से लोन लेने के लिए भी लोन प्रोसेसिंग फीस के रूप में मांगे जाने वाले लोन का 0.5-1 फीसदी चुकाना पड़ सकता है। कई बैंक इसे फिक्स्ड रखते हैं और 5000 रुपये फीस के रूप में वसूलते हैं।



तो ध्यान रखें कि रिफाइनेंसिंग के तहत नया लोन लेना आपके लिए कुछ बचत लेकर आए। तो आप पूरी प्लानिंग और कैलकुलेशन के बाद ही लोन स्विच करने या रिफाइनेंसिग करने की सोचें।



उदाहरण
-अगर आप 20 लाख रुपये का लोन बंद कर रहे हैं जिसका 15 साल का टेन्योर बचा हो तो आपको 3 फीसदी प्री-क्लोजर चार्ज के रूप में 60,000 रुपये चुकाने होंगे। वहीं नए बैंक से दूसरा लोन लेने के लिए अगर 5000 रुपये का खर्च किया तो आपको लोन स्विच करने की कुल लागत 65,000 रुपये होगी।



अब एक दूसरा उदाहरण देखें- मान लीजिए आपने 11 फीसदी की दर से लोन लिया है और आप 10 फीसदी की ब्याज दर वाले लोन स्विच कर रहे हैं। सारे प्री-क्लोजर, प्रोसेसिंग फीस चुकाने के बाद 10 फीसदी ब्याज दर से लोन लेने पर आपकी 2 लाख रुपये तक की बचत होती है। तो इस तरह से आप तुलना करके ही लोन ट्रांसफर के बारे में सोचें।



जब आप लोन री-फाइनेंस करें तो सारी कागजी कार्यवाई सुनिश्चित करें। खासकर जमीन के मालिकाना हक से जुडे़ कागजातों का ट्रांसफर। कुछ बैंक नए कर्जदाता से चेक मिलने के बाद जमीन के कागजात सौपते हैं। कुछ लोग अतिरिक्त समय लेते हैं तो आप बैंकों से पूछें कि किस तरह कागजों का आदान-प्रदान किया जाएगा। अगर पेपर सही ना हों तो लेन के डिस्बर्समेंट में देरी हो सकती है। अगर इस प्रक्रिया के दौरान देनदार गफलत में ईएमआई चुकाना बंद कर दे तो क्रेडिट रिकॉर्ड खराब होने का डर है।



इसके साथ ही सभी नए लोन के सभी एग्रीमेंट ध्यान से पढ़े और नियम, शर्ते वगैरह का ध्यान रखें।



नया लोन लेने के लिए सभी प्रक्रिया से गुजरना होगा। प्रॉपर्टी कागजों का वैरीफिकेशन, तकनीक मूल्यांकन आदि। बैंक तभी आपको लोन देगा अगर आप उसकी मानदंडों पर खरे उतरेंगे।



आपको अपने मौजूदा कर्जदाता को लोन ट्रांसफर का पत्र लिखना होगा। इस पत्र के आधार पर जब बैंक आपको एनओसी दे देगा तो उसे दिखाकर आप नए लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं।



रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वो प्री-पेमेंट पेनेल्टी के रूप में वसूलने वाली राशि से ग्राहकों को कुछ राहत दें। कुछ बैंको ने ऐसा किया भी है।  इसके अलावा बैंक इस बात पर भी राजी हुए हैं कि मौजूदा ग्राहकों को बदलती ब्याज दरों का फायदा दिया जाए। पहले से ऊंची ब्याज देने वाले ग्राहकों को फ्लोटिंग रेट पर लोन चुकान की सुविधा मिल सके। तो लोन ट्रांसफर करने से पहले अपने बैंक से पूछ लें कि वहां भी इस तरह का सुविधा मिल रही है कि नहीं। हो सकता है आपको लोन ट्रांसफर करने की जरूरत ही ना पड़े।



लोन ट्रांसफर करना बहुत आसान नहीं है लेकिन अगर आपको अच्छी डील मिलती है जिससे ब्याज के रूप में जाने वाला भारी पैसा बचता है तो आपको इसके बारे में जरूर सोचना चाहिए।


बैक बाजार डॉटकॉम पर आप सस्ते लोन की जानकारी ले सकते हैं, विभिन्न लोन के बीच तुलना कर सकते हैं। इसके अलावा भारतीय बैंको और एनबीएफसी से पर्सनल लोन, होम लोन, कार लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन भी कर सकते हैं।