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नए जमाने की नई निवेश नीति कैसी हो!

प्रकाशित Tue, 13, 2011 पर 15:39  |  स्रोत : Moneycontrol.com

13 सितम्बर 2011

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हमें अपनी आर्थिक योजनाओं को लगातार जांचते रहना चाहिए कि बदलते समय के साथ ये कारगर हैं या नहीं। बदलते समय के साथ आपकी वित्तीय जिम्मेदारियां घटती-बढ़ती रहती हैं।



उदाहरण- शादी के बाद व्यक्ति के ऊपर उसके जीवनसाथी की जिम्मेदारी भी आती हैं। उसके लिए भी प्लानिंग होनी चाहिए, इसी तरह भविष्य में बच्चों की पढ़ाई, शादी, रिटायरमेंट, विदेश यात्रा जैसे कई पड़ाव आते हैं जिनके लिए निवेश की नीति बदलते रहनी होती है।



इसलिए आपको यहां सलाह दी जा रही है कि बदलते दौर में आपकी निवेश की स्ट्रेटेजी कैसी होनी चाहिए।



1. वित्तीय लक्ष्यों का विश्लेषण करें

इसके तहत आने वाले समय के सभी खर्चों का अनुमान लगाना चाहिए। लोन, लोन का ब्याज, बढ़ती महंगाई के चलते बढ़ने वाले खर्चों का कुछ हिसाब लगाया जा सकता है। बजट और टैक्स के सभी मुमकिन बिंदुओं पर सोचविचार करें। अपने जीवनसाथी के साथ मिलकर सभी लक्ष्यों, जिम्मेदारियों को निभाने की प्लानिंग करें।



इसे बनाते समय अपनी नेटवर्थ का ख्याल रखना चाहिए। आपको तय करना होगा कि वित्तीय जिम्मेदारियां आप दोनों मिलकर उठाएंगे या नहीं। आप अपने लक्ष्यों को एक साथ ना मिलाएं, अलग-अलग लक्ष्यों के लिए अलग खाते बनाएं और इनके लिए अलग-अलग प्लानिंग के साथ बचत और निवेश करें।



2. जरूरत के मुताबिक दस्तावेज संभालें

अपने आर्थिक दस्तावेजों को समय समय पर अपडेट करते रहें। उनमें नए उपनाम, नए पते, लाभार्थी आदि वगैरह सभी के नाम जोडते रहें। महिलाओं की शादी-ब्याह, तलाक आदि की सूरत में उपनाम में बदलाव होता है और इनकी सूचना हर बैंक खाते, बीमा पॉलिसी, हेल्थ इंश्योरेंस वगैरह में समय पर बदलवाएं। वहीं पुरुषों को अपने नए पते, कॉन्टैक्ट नंबर, ई-मेल आदि की पूरी जानकारी देनी चाहिए।



शादी-ब्याह की सूरत में मैरिज सर्टिफिकेट और पावर ऑफ एटार्नी वगैरह सबसे जरूरी कागजों में से एक हैं। वहीं अपनी वसूयत बनवाते समय भी आपको सभी बेनेफिशयरीज, नॉमिनी वगैरह के नाम अच्छी तरह सही स्पैलिंग के साथ लिखवाने चाहिए।



3. अपने बीमा कवर की प्लानिंग दोबारा करें

बढ़ती जिम्मेदारियों के साथ आपको अपने बीमा कवर को भी बढ़ाना चाहिए। अपनी पॉलिसी में आपके ऊपर आश्रित लोगों के नाम- पत्नी,संतान को नॉमिनी के रूप में शामिल करना ना भूलें। सुनने में ये बात साधारण लगती है लेकिन कई बार कुछ लोग ऐसा करना भूल जाते हैं।



आप इंश्योरेंस को टॉप-अप कार सकते हैं जिससे आपको उसी बीमा में ज्यादा फायदे मिल सकें।



4. एक संयुक्त फाइनेंशियल प्लान बनाएं

लंबी और छोटी अवधि के लिए अलग अलग फाइनेंशियल प्लान बनाएं और योजना के मुताबिक काम करें। आपको अपने जीवनसाथी को हर योजना में शामिल करना चाहिए और उसकी सलाह लेनी चाहिए। संयुक्त निवेश नीति बनाकर चलेंगे तो आप दोनों को सभी बातों की जानकारी होगी और निवेश लक्ष्यों को हासिल करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। इससे आप बेहतर रिटर्न और बेहतर कमाई हासिल कर सकते हैं।



एक बार निवेश योजना बना ली तो इसके बाद हर 3 महीने में इसे जांचे, देखें कि लोन स्विच करने, फंड खरीदने-बेचने, बदलने या नए फंड जोड़ने की जरूरत तो नहीं है। अगर आप खुद ये सब करने में सक्षम नहीं है तो इसके लिए आप किसी फाइनेंशियल प्लानर की सलाह भी ले सकते हैं।



5. इमरजेंसी फंड का निर्माण करना ना भूलें

अगर आपके परिवार में कुछ सदस्य आपके ऊपर निर्भर करते हैं तो आपको एक बड़ा इमरजेंसी फंड बनाने के बारे में जरूर सोचना चाहिए। अपनी मासिक खर्च का 6 गुना कम से कम अपने इमरजेंसी फंड में रखें। नौकरी छूट जाने, बीमारी और किसी दुर्घटना की सूरत में आपको इस फंड की जरूरत पड़ सकती है।



6. परिवार का बजट बनाएं और उसके अनुसार चलें

आप फालतू खर्चा ना करें इसके लिए पारिवारिक बजट बनाना काफी जरूरी है। बजट के जरिए ना केवल आप फालतू खर्चों से बचते हैं बल्कि लंबी अवधि के लिए अपना पैसे का प्रबंधन कर सकते हैं। आपको बजट बनाने के तहत अपने खर्चों को लिखना चाहिए, आपके निवेश का लक्ष्य क्या है और आपको किस मद में कितना पैसा खर्च करना है, इस बात का ख्याल रखना चाहिए।



अपने बजट का प्रबंध करने के लिए आप कुछ फाइनेंशियल सॉफ्टवेयर भी इस्तेमाल कर सकते है, पेरिफोस, एमप्रॉफिट और इंवेस्टप्लस जैसे सॉफ्टवेयर आपको पोर्टफोलियो का प्रबंधन करने और बजट बनाने में मदद कर सकते हैं।



7. आर्थिक जिम्मेदारियों को सौपें


अगर आपने अपनी वसीयत में दो नॉमिनी रखें हैं ते आपको दोनों पर बराबर रूप से वित्तीय जिम्मेदारियां रखनी चाहिए। आपके नॉमिनी होने के बाद उनलोगों को तनाव नहीं होना चाहिए बल्कि उन्हें आपके निवेश लक्ष्यों को पूरा करने में कुछ मदद देनी चाहिए।



अगर आप घर के एकमात्र कमाने वाले प्राणी हैं तो आपकी पति-पत्नी को कम से कम बिल भरने और अन्य छोटी-मोटी जिम्मेदारियों में साथ निभाने को कहें।



अगर आपकी पत्नी कमाती हैं और घर के बिल भरने की जिम्मेदारी वो उठाती हैं तो आपको उन्हें ही सारा हिसाब रखने को कहें। इस तरह घर की अलग-अलग जिम्मेदारियों को पूरी स्वतंत्रता से निभाएं।



आपसी विचारों के आदान-प्रदान से आप मानसिक शांति का फायदा ले सकते हैं। अपने परिवार के साथ बैठें और वित्तीय जानकारी, निवेश रणनीति सभी कुछ तय करें जिससे एक बेहतर भविष्य का निर्माण हो सकता है।



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