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छोटे से छोटे वित्तीय निर्णय भी प्लानिंग करके ही लें

प्रकाशित Sat, 17, 2011 पर 09:45  |  स्रोत : Moneycontrol.com

17 सितंबर 2011

सीएनबीसी आवाज़


 


इंडस्ट्रीयलिस्ट गिरीश मल्होत्रा (उम्र 38 वर्ष), उनकी पत्नी रजनी मल्होत्रा (उम्र 36 वर्ष) अपने दस वर्षीय बेटे के साथ भोपाल में स्वयं के फ्लैट में रहते हैं। गिरीश की सालाना आय (टैक्स अदा करने के बाद) नौ लाख रुपए है। उनका सालाना घर खर्च तीन लाख रुपए है। बच्चों की शिक्षा का सालाना खर्च 90 हजार रुपए है। उन्होंने सन् 2008 में फ्लैट खरीदने के लिए 20 लाख रुपए का लोन लिया था जिसकी मासिक किस्त 20456 रुपए है। हाल ही में उन्हें बहन की शादी के लिए चार लाख रुपए का पर्सनल लोन भी लेना पड़ा जिसकी मासिक किस्त 11187 रुपए है। गिरीश ने स्वयं एवं पत्नी के नाम विभिन्न इंश्योरेंस पॉलिसियां भी ले रखी हैं। इन पॉलिसियों के तहत गिरीश का बीमाधन 15.75 लाख रुपए एवं उनकी पत्नी का बीमाधन आठ लाख रुपए है। इन सभी पॉलिसियों की सालाना प्रीमियम 179900 रुपए है।



लोन के भार के कारण गिरीश अब इंश्योरेंस प्रीमियम भरने में सक्षम नहीं है। गिरीश और रजनी अपनी इस समस्या के लिए फाइनेंशियल प्लानर से मिले। फाइनेंशियल प्लानर ने गिरीश से कुछ सवाल किए। फाइनेंशियल प्लानर के सवाल एवं गिरीश के जवाब निम्नलिखित हैं-



फाइनेंशियल प्लानर- आपने ये इंश्योरेंस पॉलिसियां क्यों ली थी?



गिरीश - टैक्स बचत एवं निवेश के लिए।



फाइनेंशियल प्लानर- परंतु टैक्स बचत के लिए तो हाउसिंग लोन का रिपेमेंट एवं बच्चों की टयूशन फीस ही पर्याप्त है।



गिरीश- हम सभी इंश्योरेंस पॉलिसियां हाउसिंग लोन लेने के पूर्व ही ले चुके थे।



फाइनेंशियल प्लानर- आपने अधिकांश पॉलिसियां 20-25 वर्ष की अवधि के लिए ली हुई हैं। क्या इतनी लंबी अवधि की पॉलिसियां आपने बिना प्लानिंग के ले ली?



गिरीश- पॉलिसियां लेते समय हमें प्लानिंग की आवश्यकता महसूस ही नहीं हुई। उस समय हमारे पास पर्याप्त रुपए थे। हमें कुछ पॉलिसियां टैक्स बचत एवं कुछ पॉलिसियां परिचित एजेंटों के मुलायजे में लेना पड़ी।



फाइनेंशियल प्लानर- अब जब आपके ऊपर 20-22 लाख के लोन का भार है एवं आप पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी है, तब आप इंश्योरेंस पॉलिसी बंद करना चाहते हैं? क्या यह सही निर्णय है?



गिरीश- परंतु अब हमारे पास कोई विकल्प भी तो नहीं है। अब आप ही बताइए हम क्या करें?


फाइनेंशियल प्लानर ने गिरीश की परिस्थितियों, आवश्यकताओं, जीवन के लक्ष्य एवं जोखिम क्षमता को समझकर निम्न सलाह दी-



* प्रत्येक इंश्योरेंस पॉलिसी के अनुमानित रिटर्न, सरेंडर वेल्यू, पेडअप वेल्यू एवं उपलब्ध लोन की जानकारी एकत्रित की। प्रत्येक इंश्योरेंस पॉलिसी एवं लोन का कॉस्ट बेनिफिट एनालिसिस करने के बाद गिरीश की कुल 1.05 लाख रुपए सालाना प्रीमियम एवं उनकी पत्नी की कुल 40900 रुपए सालाना प्रीमियम की पॉलिसियों को सरेंडर करने की सलाह दी और बताया कि इन पॉलिसियों को सरेंडर करने पर 674351 रुपए प्राप्त होंगे।



* गिरीश को एक करोड़ रुपए का ऑनलाइन टर्म प्लान लेने की सलाह दी जिसकी सालाना प्रीमियम मात्र 20500 रुपए होगा।



* इंश्योरेंस पॉलिसियों की सरेंडर राशि से चार लाख रुपए का पर्सनल लोन तुरंत चुकाने की सलाह दी।



* वर्तमान होम लोन को ओव्हरड्राफ्ट होम लोन में तब्दील करने की सलाह दी एवं 274351 रुपए की शेष सरेंडर राशि को ओव्हरड्राफ्ट होम लोन में जमा कराने की सलाह दी जिससे जरूरत पड़ने पर गिरीश राशि निकाल भी सके एवं कोई भी अतिरिक्त राशि आने पर ओव्हरड्राफ्ट होम लोन में जमा कर ब्याज की बचत भी कर सके।



* बजटिंग करके घर खर्च में सालाना लगभग 50 हजार रुपए की बचत करने के उपाय सुझाए।



* साथ ही वसीयत भी लिखने की सलाह दी।



आपने देखा कि बिना प्लानिंग से लिए गए छोटे-छोटे वित्तीय निर्णय ने भी गिरीश को कैसे बड़ी परेशानी में डाल दिया। अतः यह आवश्यक है कि छोटे से छोटे वित्तीय निर्णय भी प्लानिंग करके ही लें जिससे बाद में हमें नुकसान न उठाना पड़े। फाइनेंशियल प्लानिंग करने में आप स्वयं सक्षम नहीं हों तो सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (सीएफपी) से संपर्क करें।



यह लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर उमेश राठी ने लिखा है,umesh.rathi@arihantcapital.com पर उमेश राठी से संपर्क किया जा सकता है।